श्रीनगर: उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती कुपवाड़ा ज़िले के निवासी दानिश गनई पिछले तीन-चार सालों से सर्दियों में उत्तराखंड में कश्मीरी शॉल बेचकर अपना गुजारा करते आ रहे हैं. इस साल उनके छोटे भाई ताबिश राशिद ने भी अपने गरीब परिवार का सहारा बनने के लिए उनके साथ जाने की जिद की.
बुधवार (28 जनवरी) की शाम हिमाचल प्रदेश के पवित्र नगर पांवटा साहिब में शॉल बेचने के बाद जब दोनों भाई उत्तराखंड स्थित अपने आवास पर लौट रहे थे, इस दौरान रास्ते में वे राज्य के विकास नगर के बाहरी इलाके में एक दुकान पर कुछ खाने के लिए रुके. यहीं राशिद पर हमला हुआ.
सिर पर लोहे की रॉड से जोरदार वार होने से पहले ही राशिद ने हमलावर को दुकानदार से यह कहते हुए सुना था, ‘ये मुसलमान हैं. पहले एक को निपटाते हैं, दूसरे से बाद में निपटेंगे.’
राशिद ने फोन पर द वायर को बताया, ‘दुकानदार को पहले तो इस बात पर आपत्ति हुई कि हम कश्मीरी भाषा में बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कश्मीर नहीं है. फिर उन्होंने मुझे धक्का दिया और हमें वहां से जाने को कहा. जैसे ही हम उठे, उन्होंने शॉल और अन्य सामान से भरा हमारा थैला छीन लिया और उसे सड़क पर फेंक दिया.’
इसके बाद दोनों भाइयों की दुकानदार से बहस हुई. इन लोगों ने कहा कि इन्होंने ऐसा कोई अपराध नहीं किया था जिसके लिए उन्हें इस तरह के ‘अपमान’ का सामना करना पड़े.
इस संबंध में राशिद ने बताया, ‘उन्होंने लाठी निकाली और दुकान के बाहर मेरे भाई को पीटना शुरू कर दिया. जब मैंने उसे बचाने की कोशिश की, तो एक और आदमी लोहे की रॉड लेकर वहां आ गया. वह ऐसे बोल रहे थे मानो मुसलमान और कश्मीरी होना गुनाह हो. उन्होंने मुझे एक तरफ धकेल दिया और मेरे सिर पर ज़ोर से मारा, जिसके बाद मैं बेहोश हो गया.’
कुपवाड़ा निवासी मोहम्मद शफीक, जो उत्तराखंड के विकास नगर में दोनों भाइयों की देखभाल कर रहे हैं, ने भी इस बात की पुष्टि की कि दुकानदार और उसके साथी ने इन लोगों को पीटा था. उन्होंने मामले में हस्तक्षेप करने और दोनों भाइयों को बचाने के लिए कुछ स्थानीय हिंदू पुरुषों और महिलाओं को सराहा.
बताया गया है कि इस हमले में राशिद को गंभीर चोटें आई हैं, जिसमें उनके हाथ की हड्डी टूट गई है. जबकि उनके बड़े भाई को पैर में कुछ चोटें आई हैं. शफीक ने बताया, ‘उनके सिर पर आठ से दस टांके लगे हैं.’
राशिद ने बताया कि जब उन्हें होश आया, तो वे अस्पताल में थे और उनके आसपास अन्य कश्मीरी शॉल विक्रेता और कुछ स्थानीय लोग मौजूद थे. बाद में उन्हें अपने भाई से पता चला कि हमले की चश्मदीद एक हिंदू महिला ने गवाही दी है कि दोनों भाइयों की कोई गलती नहीं थी.
दोनों भाइयों के पिता गुरुवार (29 जनवरी) को उत्तराखंड पहुंचे. इस बीच विकास नगर थाने ने दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 117 (2) (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना) और 352 (जानबूझकर सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया है.
आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग
इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी हुई है या नहीं, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल पाई है. इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है और कांग्रेस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और अन्य दलों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
हालांकि, उत्तराखंड में कश्मीरी शॉल बेचकर अपना जीवन यापन करने वाले कम से कम दो अन्य लोगों ने बताया कि पीड़ितों पर स्थानीय समुदाय द्वारा शिकायत वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है, जिसके आधार पर पुलिस में मामला दर्ज किया गया है.
द वायर इन दावों की तत्काल पुष्टि नहीं कर सका है.
इस मामले को लेकर राशिद ने धीमी आवाज़ में कहा, ‘मेरे पिता यहीं हैं और वही फैसला लेंगे. लेकिन अगर आज हम पर हमला हुआ है, तो कल किसी और की बारी होगी. देश में कश्मीरियों के साथ लगभग हर दिन ऐसा हो रहा है. क्या कश्मीरी मार खाने के लिए ही इस दुनिया में आए हैं? अगर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे और हमले भड़केंगे.’
उन्होंने दुख जताया कि हमले के बाद उनके शॉल और अन्य सामान के साथ-साथ लगभग 21,000 रुपये नकद गायब हो गए. उन्होंने कहा, ‘बोरी में कई हज़ार रुपये की कीमत के 47 शॉल थे.’
उल्लेखनीय है कि सैकड़ों कश्मीरी पुरुष, जिनमें से अधिकांश गरीब परिवारों से हैं, सर्दियों के दौरान घाटी से निकलकर देश के बड़े शहरों और कस्बों में कश्मीरी शॉल और अन्य हस्तशिल्प वस्तुएं बेचकर जीविका कमाते हैं. हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू दक्षिणपंथी भीड़ द्वारा कुछ कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हमले किए गए हैं, जिससे राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों में आक्रोश फैल गया है.
गौरतलब है कि बीते कुछ समय में उत्तराखंड कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हमलों का विशेष केंद्र बनकर उभरा है और हिमाचल प्रदेश में भी इसी तरह के हमले दर्ज किए गए हैं.
हाल ही में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के डेरा क्षेत्र में एक कश्मीरी शॉल विक्रेता को संदिग्ध हिंदू दक्षिणपंथी भीड़ की धमकियों के बावजूद ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाने से इनकार करने पर परेशान किया गया था.
इससे पहले 22 दिसंबर को उत्तराखंड में एक अन्य कश्मीरी शॉल विक्रेता पर हमला किया गया, जिसके बाद बजरंग दल के एक संदिग्ध कार्यकर्ता को उनके साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया था.
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