नई दिल्ली: जनगणना 2027 के दौरान सरकारी अधिकारियों की मदद के लिए निजी तकनीकी (टेक्निकल) कर्मियों को शामिल किया जाएगा. ताकि ‘कम से कम समय में जनगणना के आंकड़े जारी किए जा सकें.’
आधिकारिक सूत्रों ने द हिंदू को को यह जानकारी दी है. ऐसा पहली बार हो रहा है जब इस प्रक्रिया में निजी कर्मियों को शामिल किया जा रहा है. इसके साथ ही, आबादी से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने और उसे प्रबंधित करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन जैसे डिजिटल उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाएगा.
जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, गणनाकर्मी, जिनमें अधिकतर सरकारी स्कूलों के शिक्षक और अन्य सार्वजनिक अधिकारी होंगे, अपने निजी स्मार्टफोन में इंस्टॉल मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे.
भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने एक पत्र में राज्य सरकार को बताया कि जनगणना 2027 में कई नए डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जाएगा. इनमें मोबाइल-आधारित डेटा ऐप, सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम, हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर वेब एप्लिकेशन और सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल शामिल हैं.
उनका कहना है कि इसका उद्देश्य ‘फील्ड से ही डिजिटाइज्ड डेटा प्राप्त करना’ है.
बताया गया है कि इस तकनीक-आधारित प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलने के लिए केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अनुबंध के आधार पर तकनीकी स्टाफ रखने की अनुमति देगी. ये कर्मी डिजिटल एप्लिकेशन और संबंधित कार्यों के प्रबंधन में जनगणना अधिकारियों की सहायता करेंगे.
इसके अलावा, राज्य और जिला स्तर पर कार्यालयी कामकाज के लिए मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) भी उपलब्ध कराया जाएगा. मृत्युंजय कुमार नारायण के अनुसार, ‘इन कर्मियों को जनवरी 2026 से अधिकतम 18 महीनों की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा.’
स्वीकृत स्टाफिंग पैटर्न के तहत राज्य स्तर पर चार तकनीकी सहायक और दो एमटीएस होंगे; जिला स्तर पर दो तकनीकी सहायक और एक एमटीएस होंगे; नगर निगमों में, जहां प्रमुख जनगणना अधिकारी तैनात रहेंगे, वहां दो तकनीकी सहायक और एक एमटीएस; जबकि चार्ज या तहसील स्तर पर एक तकनीकी सहायक रखा जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्था देश के 700 से अधिक जिलों में लागू रहेगी.
रिपोर्ट के अनुसार, पत्र में कहा गया है कि तकनीकी सहायक के लिए अधिकतम मासिक वेतन 25,000 रुपये और एमटीएस के लिए 18,000 रुपये होगा. इसके अलावा, इन कर्मियों से संबंधित किसी भी अन्य प्रकार की वित्तीय सहायता भारत सरकार की ओर से उपलब्ध नहीं किया जाएगा.
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह सहायता ‘पूरी तरह अल्पकालीन अनुबंध’ के आधार पर होगी और 18 महीने बाद समाप्त हो जाएगी. इसके बाद केंद्र सरकार पर इनको लेकर कोई वित्तीय या प्रशासनिक दायित्व नहीं रहेगा. साथ ही, नियुक्त कर्मियों को न तो नियमित किए जाने का अधिकार होगा और न ही भविष्य में वे सरकारी नौकरी का दावा कर सकेंगे. वे आकस्मिक, एड हॉक, अस्थायी या नियमित कर्मचारियों से जुड़े किसी भी लाभ के हकदार नहीं होंगे.
भर्ती केवल आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए की जाएगी और सभी भुगतान इन्हीं एजेंसियों के माध्यम से होंगे. जरूरी शर्तें पूरी करने पर सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को रखने पर भी विचार किया जा सकता है.
फील्ड कार्यों के लिए करीब 31 लाख गणनाकर्मियों (सभी सरकारी अधिकारी होंगे) को तैनात किया जाएगा. प्रत्येक गणनाकर्मी 750 से 800 लोगों की गणना के लिए जिम्मेदार होगा और उसे 25,000 रुपये का मानदेय मिलेगा. अन्य जनगणना अधिकारियों, जैसे नोडल अधिकारियों और क्लर्कों को 30,000 से 75,000 रुपये तक का भुगतान किया जाएगा.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 दिसंबर 2025 को जनगणना 2027 के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति दी थी.
