बजट 2026: प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित राशि पिछले साल हुए ख़र्च से भी कम

देश में प्रदूषण लोगों के जीवन और आजीविका के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरा है. प्रदूषण नियंत्रण मद के अंतर्गत इस वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित संशोधित राशि 1,300 करोड़ रुपये है. लेकिन बजट में संशोधित अनुमान से भी कम केवल 1,091 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं. जबकि पिछले वर्ष इसके लिए मात्र 854 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: देश भर में वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. इस बीच इस वर्ष प्रदूषण नियंत्रण के लिए बजटीय अनुमान घटकर 1091 करोड़ रुपये रह गया है – जो पिछले साल खर्च की गई राशि से कम है.

रिपोर्ट के अनुसार, वार्षिक बजट में ‘प्रमुख योजनाओं के लिए व्यय’ खंड में 1000 करोड़ रुपये से अधिक के व्यय वाली योजनाओं को सूचीबद्ध किया गया है.

इसमें प्रदूषण नियंत्रण मद के अंतर्गत इस वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित संशोधित राशि 1,300 करोड़ रुपये है. लेकिन बजट में संशोधित अनुमान से भी कम केवल 1,091 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं. जबकि पिछले वर्ष इसके लिए मात्र 854 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.

मालूम हो कि पिछले वर्ष, 2024-25 में इस मद के अंतर्गत वास्तविक व्यय मात्र 16 करोड़ रुपये था.

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ समय में प्रदूषण लोगों के जीवन और आजीविका के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरा है. इस संबंध में बीते दिनों स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा था कि वायु प्रदूषण भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका द्वारा लगाए गए किसी भी टैरिफ से कहीं अधिक बड़ा खतरा है.

उन्होंने कहा था कि भारत को वायु प्रदूषण से निपटने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है.

ज्ञात हो कि इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदूषण और इसके समाधान के लिए ‘वास्तविक संसाधनों’ पर संसदीय बहस की मांग की है.

उन्होंने कहा था, ‘प्रदूषण अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, यह एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल है. संसद को इस पर चर्चा करनी चाहिए. सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए. और इस बजट में वास्तविक समाधानों के लिए वास्तविक संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए. भारतीय रिपोर्ट या खोखले वादे नहीं चाहते. वे स्वच्छ हवा चाहते हैं.’

वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म डालबर्ग एडवाइजर्स और क्लीन एयर फंड की एक नई रिपोर्ट, ‘द बिजनेस केस फॉर क्लीन एयर: अनलॉकिंग इकोनॉमिक अपॉर्चुनिटीज फॉर इंडिया’ के अनुसार, भारत वायु प्रदूषण से निपटान के जरिए 2030 तक 220 अरब डॉलर तक कमा सकता है.

यह रिपोर्ट प्रदूषण को एक नए आर्थिक अवसर के रूप में देखती है. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि प्रभावी कार्रवाई से भारत को व्यापारिक नुकसान में 85 अरब डॉलर की बचत भी हो सकती है.

इसमें बताया गया है कि महीन कण पदार्थ (पीएम2.5) प्रदूषण के स्तर को लगभग 20 प्रतिशत तक कम करने से भारत हर साल ‘1 करोड़ विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष’ बचा सकता है.

हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के करीब डेढ़ घंटे के बजट भाषण में प्रदूषण शब्द का कोई उल्लेख नहीं हुआ.