श्रीनगर: हिमाचल प्रदेश में रविवार (1 फरवरी) को दो कश्मीरी शॉल विक्रेताओं को एक संदिग्ध हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ता द्वारा परेशान करने का मामला सामने आया है. आरोप है कि पुलिस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया है.
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि कुपवाड़ा जिले के बुजुर्ग निवासी मोहम्मद रमज़ान शॉलों से भरी बोरी पीठ पर लादकर हिमाचल प्रदेश के नूरपुर स्थित एक बाजार की ओर जा रहे हैं, तभी उन्हें आरोपी द्वारा रोक दिया जाता है.
इस मामले में दूसरे पीड़ित व्यक्ति भी कुपवाड़ा निवासी आशिक हुसैन गोजरी है.
वीडियो में देखा जा सकता है कि इस पूरी वारदात के दौरान आरोपी स्मार्टफोन से फेसबुक लाइव कर रहा है, जबकि रमज़ान नाराज़ होकर उससे बचने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं और बार-बार जाने देने की गुहार लगा रहे हैं. लेकिन आरोपी बाज़ार की ओर उनका पीछा करता है.
इसके बाद रमज़ान आरोपी से तनाव में सख्ती से यह कहते हुए दिखते हैं कि ‘हम गरीब लोग हैं. तुम हमें क्यों परेशान कर रहे हो? क्या तुम्हारे बच्चे नहीं हैं? क्या हम भारतीय नहीं हैं? हम भाईचारे में विश्वास करते हैं. तुम भले ही बड़े भारतीय हो, लेकिन हम भी भारतीय हैं.’
हालांकि, आरोपी उनकी बातों को बीच में काटते हुए रमज़ान पर कश्मीर में सेना को धमकाने और कश्मीरी पंडितों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाता है. वह रमज़ान से शॉलों से भरी बोरी खोलने की भी मांग करता है.
One more incident of hate crime against Kashmiri Shwal sellers. Now from Kangra district of Himachal Pradesh.
There are many such incidents of Kashmiri Shwal sellers being targeted in Himachal Pradesh @SukhuSukhvinder, Will the CM ensure that these hate mongers get harshest… pic.twitter.com/oYJoGC7joF— Mohammed Zubair (@zoo_bear) February 2, 2026
वीडियो में आरोपी व्यक्ति को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘जब पंडित कश्मीर छोड़कर चले गए थे, तब तुम्हारा भाईचारा कहां था?’ वह आदमी धमकी भरे लहजे में रमज़ान से शॉल का कारोबार करने का ‘अनुमति पत्र’ दिखाने को कहता है.
आरोपी रमज़ान से यह भी कहता है, ‘तुम यहीं रुक जाओ और मेरी बात सुनो. मैं तुम्हें यहां ऐसे घूमने नहीं दूंगा.’ रमज़ान जवाब देते हैं, ‘सेना को कोई धमकी नहीं दे सकता. वे हमारे रक्षक और हमारे भाई हैं. तुम हमें रोज़ क्यों परेशान कर रहे हो? क्या तुमने कभी सुना है कि कश्मीर में पर्यटकों को परेशान किया जाता है? हम एक ही देश के हैं. वीडियो बनाना बंद करो.’
अज्ञात व्यक्ति बेपरवाह होकर रमज़ान का पीछा करते हुए कहता है, ‘अरे! तुम्हारे बोरे में क्या है? कहीं एके-47 राइफल तो नहीं है? पहले जांच करवा लो. यह लाइव वीडियो है, मतलब पूरा देश देख रहा है.’
इसी बीच, गोजरी, जो अपनी पीठ पर शॉल का बोरा लिए हुए है, कैमरे के फ्रेम में आते हैं. अज्ञात व्यक्ति गोजरी की ओर मुड़कर कहता है, ‘देखो, एक और आ गया! कहां जा रहे हो? हम तुम्हें यहां घूमने नहीं देंगे.’
रमज़ान ने धमकी पर आपत्ति जताते हुए कहा, ‘क्यों? हमें धंधा क्यों नहीं करने दे रहे? हमारे पास अनुमति है. पूरा देश देख रहा है. क्या हम चोर हैं? हम भी इसी देश के हैं. आप हमें परेशान कर रहे हैं. सुबह-सुबह हमारी रोजी-रोटी क्यों छीननी है?’
वह आगे कहते हैं, ‘हम सब भाई हैं. मैं पुलिस को बुलाने जा रहा हूं.’ गोजरी कुपवाड़ा पुलिस द्वारा जारी किया गया ‘चरित्र प्रमाण पत्र’ दिखाते हैं, इस पर वह व्यक्ति उकसाते हुए कहता है, ‘अगर हम सब भाई हैं, तो मुझे अल्लाह और भगवान (हिंदू देवता) में अंतर बताओ.’
चार मिनट बारह सेकंड का वीडियो समाप्त होने से पहले वह व्यक्ति पूछता है, ‘भाइयों, इन्हें स्थानीय पुलिस से अनुमति मिली है. आपके पास सरपंच की अनुमति नहीं है?’
रमज़ान ने द वायर को बताया कि फेसबुक लाइव समाप्त होने के बाद अज्ञात व्यक्ति उन्हें अकेला छोड़कर चला गया और कहा, ‘मेरा काम हो गया है.’
इस घटना के बाद जान के डर से दोनों कश्मीरी व्यक्ति उस इलाके से भाग निकले.
पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार किया
उल्लेखनीय है कि सोमवार (2 फरवरी) को रमज़ान अन्य शॉल विक्रेताओं के साथ नूरपुर पुलिस जिले के रेहान पुलिस चौकी पहुंचे, जहां प्रभारी सुनील ने कथित तौर पर उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया.
रमज़ान ने कहा कि प्रभारी ने बताया कि घटना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं हुई है और उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की धमकी दी.
रमज़ान के अनुसार, ‘उन्होंने कहा कि आरोपी पागल है. जब मैंने शिकायत दर्ज कराने पर जोर दिया, तो उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी, जिसके बाद हम नूरपुर थाने गए.’ उन्होंने आगे बताया कि नूरपुर पुलिस ने भी उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया.
इस बारे में हिमाचल प्रदेश पुलिस के उप अधीक्षक चंदर पाल ने बताया कि पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है और आरोपियों को तलब किया गया है. इसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
रमजान के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘जिलाधिकारी ने एक ‘आदेश’ जारी किया है कि हिमाचल प्रदेश आने वाले किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्थानीय पुलिस स्टेशन में पंजीकरण कराना होगा. ये शॉल विक्रेता पंजीकृत नहीं थे, इसलिए इनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.’
पाल ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर सेना का पूर्व जवान है, लेकिन उन्होंने जिलाधिकारी के ‘आदेश’ की प्रति साझा नहीं की. द वायर ने नूरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्मचंद वर्मा से संपर्क किया है. जवाब मिलते ही खबर को अपडेट किया जाएगा.
मालूम हो कि कांगड़ा में दो कश्मीरी शॉल विक्रेताओं के साथ हुई बदसलूकी हाल के महीनों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सामने आई छठी ऐसी घटना है. हालांकि, पुलिस ने कुछ मामलों में केस दर्ज किए हैं और गिरफ्तारियां भी की हैं, फिर भी कश्मीरी शॉल विक्रेताओं को उत्पीड़न और हमलों का सामना करना पड़ रहा है.
हाल ही में 28 जनवरी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तराखंड के देहरादून में कुपवाड़ा के एक युवा शॉल विक्रेता पर एक दुकानदार और उसके साथियों ने लोहे की रॉड से बेरहमी से हमला किया, जबकि उनका भाई मामूली चोटों के साथ हमले से बच गया.
गौरतलब है कि दशकों से उत्तर भारत के प्रमुख शहरों और देश के अन्य हिस्सों में हजारों कश्मीरी सर्दियों के दौरान कश्मीरी शॉल और अन्य सामान बेचकर अपनी आजीविका कमाते आ रहे हैं.
हालांकि, केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने के बाद और विशेष रूप से 2019 के पुलवामा आत्मघाती बम हमले, पहलगाम आतंकवादी हमले और लाल किले पर हुए आत्मघाती बम धमाके के बाद, इनमें से कुछ शॉल विक्रेताओं और अन्य कश्मीरियों को देश के कुछ हिस्सों में उत्पीड़न और हमलों का सामना करना पड़ा है.
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