नई दिल्ली: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा गठित जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में हुई कथित अवैध प्रक्रियाओं को चुनौती देते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने विशेष रूप से राज्य में महिला मतदाताओं को कथित तौर पर आचार संहिता लागू होने के दौरान 10,000 रुपये के सीधे ट्रांसफर को चुनौती दी है.
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ शुक्रवार (6 फरवरी) को करेगी.
अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान राज्य में महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये की राशि भेजी गई, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन है.
जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत बिहार चुनावों में 25-35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे 10,000 रुपये ट्रांसफर करने के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है.
याचिका में कहा गया है कि 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे पैसे दिया जाना चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करता है. इसके अलावा दोनों चरणों के मतदान के दौरान स्वयं सहायता समूह जीविका से जुड़ी लगभग 1.8 लाख महिला लाभार्थियों की मतदान केंद्रों पर तैनाती को भी अवैध और अनुचित बताया गया है.
दोबारा चुनाव की मांग
याचिकाकर्ता ने कथित भ्रष्टाचार के मद्देनजर बिहार में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने का अनुरोध करते हुए चुनाव आयोग को एस सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) 9 एससीसी 659 मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने और मुफ्त योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाओं आदि पर व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश देने की भी मांग की है.
याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी राजनीतिक दलों द्वारा निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों पर प्रभाव डालने वाली योजनाओं, जैसे कि मुफ्त सहायता, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाएं, कल्याणकारी योजनाएं आदि को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले लागू करने के लिए कम से कम छह महीने का समय निर्धारित करे.
गौरतलब है कि बिहार में 1.21 करोड़ महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना के तहत दस-दस हज़ार रुपये बांटे गए थे. ये राशि चुनाव से ठीक पहले वितरित की गई थी. इस पूरे प्रकरण पर चुनाव आयोग की निष्क्रियता को लेकर कई तरह के सवाल भी खड़े हुए. लेकिन नीतीश सरकार की इस योजना ने एनडीए को चुनाव में भारी बढ़त दिलाई. चुनावी नतीजों ने भी बताया कि नीतीश कुमार की ताक़त मानी जाने वाली महिला वोटरों को इस योजना ने और मजबूती के साथ उनकी तरफ़ किया.
शुरुआत में यह योजना आजीविका से जुड़े काम करने वाली महिलाओं के लिए शुरू की गई थी, बाद में इसे अन्य महिलाओं पर भी लागू किया गया.
