प्रधानमंत्री के जवाब के बिना लोकसभा से धन्यवाद प्रस्ताव पारित, स्पीकर बोले- पीएम मेरे आग्रह पर नहीं आए

राष्ट्रपति की ओर से संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के बाद उस पर परिचर्चा और प्रधानमंत्री के जबाव देने की परंपरा है. हालांकि इस बार प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है. इस बीच स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि बुधवार को लोकसभा में अप्रत्याशित घटना हो सकती थी, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए.

बजट पेश होने के दौरान संसद में पीएम मोदी. (फोटो: संसद टीवी स्क्रीनग्रैब वाया पीटीआई)

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान गुरुवार (5 फरवरी) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर बिना प्रधानमंत्री के जवाब के ही धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है कि लोकसभा ने राष्ट्रपति के संबोधन पर प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही मंजूरी दे दी.

मालूम हो कि राष्ट्रपति की ओर से संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के बाद उस पर परिचर्चा होती है और इसके बाद प्रधानमंत्री के जबाव देने की परंपरा है.

बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपेक्षित था. हालांकि, सदन में हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया.

उल्लेखनीय है कि लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध गुरुवार को भी बरकरार रहा और कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद इसे दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को सदन में कई विपक्षी सदस्यों के सत्तापक्ष की दीर्घा की तरफ पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की घटना पर नाराज़गी जताई.

उन्होंने कहा, ‘सदन में जो कल घटना हुई, जिस तरीके से प्रतिपक्ष के सदस्य सत्तापक्ष की वेल तक पहुंचे. ये सदन की मर्यादा के अनकूल नहीं है.’ इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित किया गया, हालांकि इस दौरान भी विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी जारी रही.

इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई.

मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें सदन में नहीं आना चाहिए: स्पीकर

दो बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा को बताया कि कल हंगामे के दौरान अप्रत्याशित घटना हो सकती थी, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए.

ओम बिरला के अनुसार, जब प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जवाब देने वाले थे, तब उन्हें ठोस जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सदस्य कोई अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं.

स्पीकर ने कहा, ‘मेरे पास ऐसी पुख़्ता जानकारी आई कि कांग्रेस पार्टी के कई सदस्य प्रधानमंत्री के आसन पर पहुंचकर कोई भी अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. अगर यह घटना हो जाती तो यह अत्यंत अप्रिय होता, जो देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार कर देता.’

ओम बिरला ने कहा कि इसको टालने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें सदन में नहीं आना चाहिए. सदन के नेता ने सदन में उपस्थित न होकर, मेरे आग्रह को मानकर सदन को अप्रिय दृश्य से बचाया. मैं प्रधानमंत्री का इसके लिए आभार व्यक्त करता हूं.

सरासर झूठ, प्रधानमंत्री स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं- प्रियंका गांधी

स्पीकर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संसद के बाहर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि ये बात सरासर झूठ है. प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने या ऐसी किसी भी बात का सवाल ही नहीं उठता. ऐसी कोई योजना थी ही नहीं.

उन्होंने आगे कहा कि यदि सत्तापक्ष अपने सदस्यों को मनमानी करने, किताबें कोट करने और अनर्गल बातें कहने की छूट देगा, तो विपक्ष विरोध करेगा.

प्रियंका गांधी ने तीखे अंदाज में कहा, ‘मुझे माफ करें, प्रधानमंत्री स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं. वे स्पीकर से यह सब कहलवा रहे हैं क्योंकि कल उनमें सदन में आने की हिम्मत नहीं थी. सिर्फ इसलिए कि तीन महिलाएं उनकी बेंच के सामने खड़ी थीं… यह क्या बकवास है?’

उल्लेखनीय है कि विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोकने और संसद में जनरल एमएम नरवणे के 2020 के चीन गतिरोध पर लिखे अप्रकाशित संस्मरण पर बोलने से रोकने के आरोप में विरोध प्रदर्शन कर रहा है.

ज्ञात हो कि मंगलवार को भी लोकसभा में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया जब आठ कांग्रेस सदस्यों को बजट सत्र के शेष समय के लिए अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप में निलंबित कर दिया गया.

बुधवार को पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की आत्मकथा (संस्मरण) का सदन में हवाला देने से रोके जाने के बाद सदन के बाहर राहुल गांधी ने इस किताब की प्रति प्रदर्शित की.

इससे पहले सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में आपत्ति जताई थी और कहा था कि किसी अप्रकाशित किताब का सदन में हवाला नहीं दिया जा सकता. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम 349 का हवाला देते हुए गांधी को कारवां के उस लेख से उद्धरण देने से रोक दिया, जिसमें किताब के अंश छपे हैं.

मंगलवार को राहुल गांधी ने सदन में कहा था कि वह लेख प्रामाणिक है.

2004 में भी पीएम के जवाब के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया था

गौरतलब है कि 2004 में भाजपा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोक दिया था. इस संबंध में कांग्रेस के संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने 10 मार्च, 2005 का सिंह के अभिभाषण का एक वीडियो साझा किया है.

इस वीडियो क्लिप में पूर्व प्रधानमंत्री ने 10 जून, 2004 की उस घटना का जिक्र किया है, जब उन्हें धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने की अनुमति नहीं दी गई थी.