नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य के मुंद्रा में अडानी पोर्ट्स को आवंटित 108 हेक्टेयर गौचर (चरागाह) भूमि को वापस लेने का निर्देश दिया गया था.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की पीठ ने कहा कि चरागाह भूमि को वापस लेने का निर्णय और उस पर आधारित हाईकोर्ट के निर्देश, प्रभावित आवंटी को सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित किए गए थे, जिससे पूरी प्रक्रिया टिकाऊ नहीं रह जाती.
अदालत ने कहा, ‘इस दृष्टि से हम हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने के इच्छुक हैं.’ और यह भी नोट किया कि हाईकोर्ट के निर्देश सीधे तौर पर राज्य सरकार के 4 जुलाई 2024 के पुनः-अधिग्रहण (रिज़म्पशन) आदेश से जुड़े थे, जो गांव की चरागाह भूमि से संबंधित था. कोर्ट ने अधिकारियों को इस मामले में नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि अडानी पोर्ट्स ने कोई आपत्ति दाखिल की है तो राज्य प्राधिकरण उसे दो सप्ताह के भीतर विचार करें. साथ ही यह अनिवार्य किया कि नया फैसला लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए.
कोर्ट ने आगे आदेश दिया कि 10 जुलाई 2024 को पहले दिए गए निर्देश के अनुसार यथास्थिति (स्टेटस-क्वो) तब तक बनी रहेगी, जब तक राज्य सरकार पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेती.
अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य प्राधिकरणों द्वारा नया आदेश पारित किए जाने के बाद गुजरात हाईकोर्ट इस आवंटन से जुड़ी लंबित जनहित याचिका पर स्वतंत्र रूप से आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा.
यह विवाद वर्ष 2005 से जुड़ा है, जब नवीनल गांव में गौचर (चरागाह) के रूप में वर्गीकृत लगभग 231 हेक्टेयर भूमि मुंद्रा पोर्ट्स को आवंटित की गई थी, जिसे बाद में अडानी ने अधिग्रहित कर लिया. 2010–11 में जब उस भूमि पर बाड़ लगाने का काम शुरू हुआ, तो नवीनल गांव के निवासियों ने गुजरात हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की और कहा कि गांव की चरागाह भूमि का आवंटन पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों के हितों को नुकसान पहुंचाता है.
सितंबर 2014 में हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा यह कहते हुए कर दिया था कि राज्य सरकार चराई के लिए वैकल्पिक सरकारी भूमि उपलब्ध कराएगी. लेकिन जब वैकल्पिक चरागाह भूमि का प्रस्तावित आवंटन का काम पूरा नहीं हुआ, तो राज्य सरकार ने 2015 में पुनर्विचार (रिकॉल) आवेदन दाखिल किया और कहा कि माप-जोख के बाद वह वादा की गई गौचर भूमि देने में असमर्थ है. इसके बाद जनहित याचिका फिर से बहाल कर दी गई.
19 अप्रैल 2024 को गुजरात हाईकोर्ट ने वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों को चरागाह भूमि की कमी की इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान खोजने का निर्देश दिया. इसके बाद राज्य प्राधिकरणों ने अडानी पोर्ट्स को पहले दी गई 108 हेक्टेयर (लगभग 266 एकड़) चरागाह भूमि वापस लेने का फैसला किया गया.
इस संबंध में 4 जुलाई 2024 को पुनः-अधिग्रहण का आदेश जारी किया गया और 5 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट ने इस निर्णय का संज्ञान लेते हुए चरागाह भूमि की वापसी के लिए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए.
अडानी पोर्ट्स ने इन निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और दलील दी कि चरागाह भूमि की वापसी और हाईकोर्ट के आदेश उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना जारी किए गए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी. गुरुवार को अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को राज्य सरकार द्वारा नए सिरे से तय करने का निर्देश दिया.
