यूपी एसआईआर: चौथी बार बढ़ाई गई समयसीमा, 10 अप्रैल को प्रकाशित होगी अंतिम सूची

उत्तर प्रदेश में जारी एसआईआर अभियान की तारीखों को एक बार फिर एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. अब 6 मार्च तक आपत्तियां और दावे दर्ज किए जा सकेंगे और अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा का कहना है कि अभी तक बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा मतदाता सूची से बाहर हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर: एसआईआर के दौरान मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित करते बूथ स्तरीय अधिकारी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार (6 फरवरी) को उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की समयसीमा को चौथी बार बढ़ा दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने राज्य में इस प्रक्रिया को 30 दिन का विस्तार दिया है, जिसके तहत अब 6 मार्च तक आपत्तियां और दावे दर्ज किए जा सकेंगे और अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी.

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का मसौदा, प्रारंभिक समय-सारणी के अनुसार 9 दिसंबर को प्रकाशित किया जाना था, जिसे बाद में बढ़ाकर 16 दिसंबर कर दिया गया.

इसके बाद दूसरी बार समयसीमा बढ़ाई गई और मसौदा सूची 31 दिसंबर को प्रकाशित करने की बात कही गई. हालांकि इस प्रक्रिया के लिए 30 दिसंबर को तीसरी बार फिर समयसीमा बढ़ाई गई, जिसके तहत कहा गया था कि मसौदा सूची 6 जनवरी को प्रकाशित की जाएगी और आपत्तियां और दावे 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दर्ज किए जाएंगे.

ज्ञात हो कि पिछले महीने प्रकाशित मतदाता सूची के मसौदे में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल नहीं थे, जो राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 18.70% है.

इस संबंध में शुक्रवार (6 फरवरी) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि अभी तक बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा मतदाता सूची में शामिल नहीं हुए हैं.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लोगों से अपना नाम सूची में शामिल कराने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा, ‘हमारे पास अब एक महीना और है और हमने उन लोगों के लिए भी व्यवस्था की है जो इंटरनेट या तकनीक के बारे में ज्यादा नहीं जानते. मतदान केंद्रों पर बीएलओ मौजूद रहेंगे, सभी आवश्यक जानकारी वहां उपलब्ध होगी. फॉर्म 6, 7 और 8 भी उपलब्ध होंगे. जिन्हें भी इनकी आवश्यकता हो, वे इन्हें ले सकते हैं… हम सभी महिलाओं, युवाओं और शेष मतदाताओं से आगे आने का अनुरोध करते हैं.’

गौरतलब है कि दिसंबर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने चल रहे एसआईआर में बड़ी संख्या में ‘लापता’ मतदाताओं की ओर इशारा करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा था कि छूटे हुए मतदाताओं में से अधिकांश भाजपा वोटर्स हैं.

इंडियन एक्सप्रेस ने उनके हवाले से कहा था, ‘चार करोड़ मतदाता गायब हैं. ये आपके विरोधी नहीं हैं, बल्कि इनमें से 90% आपके ही मतदाता हैं.’

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश उन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल है जहां वर्तमान में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे चुनाव वाले राज्य भी शामिल हैं.

असम में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लेकिन ये राज्य वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है और वहां केवल गहन संशोधन (एसआर) किया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख मतदाताओं (राज्य के कुल पंजीकृत मतदाताओं का लगभग 7.6%) को पिछली मतदाता सूची से हटा दिया गया है.

इसी तरह, केरल में 24.08 लाख मतदाताओं (राज्य के कुल मतदाताओं का 8%) को संशोधित मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया. जबकि तमिलनाडु में एसआईआर के तहत 97.3 लाख मतदाताओं को हटाया गया है.