नई दिल्ली: भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने उस कथित ‘मर्डर-फॉर-हायर’ साजिश में लगे तीनों आरोपों को स्वीकार कर लिया है, जिसमें गुरपतवंत सिंह पन्नू की न्यूयार्क में हत्या की योजना बनाने का आरोप है. अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, गुप्ता को भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के एक पूर्व अधिकारी के निर्देश पर यह काम सौंपा गया था.
54 वर्षीय गुप्ता, जिन्हें जून 2024 में प्राग से प्रत्यर्पण के बाद अमेरिका की हिरासत में रखा गया है, 12 फरवरी को मैनहैटन की संघीय अदालत में मजिस्ट्रेट न्यायाधीश सारा नेटबर्न के सामने पेश हुए. वहां उन्होंने हत्या की साज़िश, हत्या की सुपारी और मनी लॉन्ड्रिंग की साज़िश – इन तीनों अपराधों में दोष स्वीकार किया. इन तीनों मामलों में कुल मिलाकर अधिकतम सज़ा 40 वर्ष की कैद हो सकती है.
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, जज नेटबर्न ने जिला जज विक्टर मारेरो से इस स्वीकारोक्ति को मंज़ूरी देने की सिफ़ारिश की, गुप्ता की हिरासत जारी रखने का आदेश दिया और सज़ा से पहले की जांच रिपोर्ट (presentence investigation report) तैयार करने को कहा. मामले की अगली तारीख़ 15 मार्च तय की गई है.
अमेरिकी न्याय विभाग की विज्ञप्ति में कहा गया है कि गुप्ता ने भारत सरकार के एक कर्मचारी के निर्देश पर अमेरिका में रहने वाले एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या की साज़िश रची.
अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया कि यह भारतीय सरकार के एक मुखर आलोचक को चुप कराने की कोशिश थी.
बताया गया है कि अभियोग में गुप्ता के कथित सहयोगी पूर्व रॉ अधिकारी विकास यादव का भी ज़िक्र है – जो उस समय एक भारतीय सरकारी कर्मचारी थे. आरोप के अनुसार, 2023 के आसपास गुप्ता ने भारत और अन्य स्थानों पर कुछ लोगों के साथ मिलकर अमेरिका में एक वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या की योजना बनाई. पीड़ित भारतीय मूल का अमेरिकी नागरिक है और वह पंजाब के अलगाव की वकालत करने वाले एक संगठन का नेतृत्व करता है. भारत सरकार ने पीड़ित और उसके संगठन पर भारत में प्रतिबंध लगा रखा है.
अभियोग में यह भी कहा गया है कि यादव भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में कार्यरत थे, जिसके अंतर्गत रॉ आती है.
तीनों आरोपों पर कुल मिलाकर अधिकतम सज़ा 40 साल की कैद है. सज़ा सुनाए जाने की तारीख़ 29 मई 2026 तय की गई है.
ज्ञात हो कि जून 2023 में गुप्ता को प्राग के वात्स्लाव हावेल हवाई अड्डा पर अमेरिकी अनुरोध के आधार पर गिरफ़्तार किया गया था और बाद में न्यूयॉर्क मुक़दमे के लिए प्रत्यर्पित किया गया. बाद में अदालत ने उनके वकील बदलने की अर्जी मंज़ूर करते हुए डेविड टॉगर को नियुक्त किया.
अभियोग के अनुसार, गुप्ता ने एक शूटर ढूंढने के लिए संपर्क किया, यह जाने बिना कि बीच का बिचौलिया और कथित हमलावर दोनों ही अमेरिकी एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे थे. कथित तौर पर 15,000 अमेरिकी डॉलर अग्रिम के रूप में दिए गए थे, जबकि कुल रकम 1,00,000 अमेरिकी डॉलर तय थी. पहले के दस्तावेज़ों में हथियारों की आपूर्ति और भारत से हथियार ले जाने की व्यवस्था से जुड़ी बातचीत का भी ज़िक्र है.
ज्ञात हो कि गुरपतवंत सिंह पन्नू प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के संस्थापक हैं. एनआईए ने उनके ख़िलाफ़ अब तक कुल सात एफआईआर दर्ज की है. गृह मंत्रालय ने 10 जुलाई 2019 को एसएफजे पर प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद 1 जुलाई 2020 को पन्नू को ‘आतंकवादी’ घोषित किया गया था.
