नई दिल्ली: केंद्र सरकार सत्ता के उच्च पदों पर रहे वरिष्ठ अधिकारियों, जिसमें सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं, के लिए सेवानिवृत्ति के बाद किताब लिखने पर 20 वर्ष की ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि लागू करने पर विचार कर रही है. इस संबंध में औपचारिक आदेश जल्द जारी किया जा सकता है.
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, यह प्रस्ताव हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान सामान्य चर्चा में सामने आया.
यह पहल पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर उठे विवाद की पृष्ठभूमि में सामने आई है. पूर्वी लद्दाख में अगस्त 2020 के भारत-चीन सैन्य गतिरोध के एक संवेदनशील चरण से जुड़ी उनकी टिप्पणियों ने पिछले दो हफ्तों से संसद में तीखी बहस को जन्म दिया है.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और कई मंत्रियों का मत था कि सत्ता के अहम पदों पर रहे व्यक्तियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद किताब लिखने से पहले एक लंबी कूलिंग-ऑफ अवधि तय की जानी चाहिए. हालांकि यह विषय मंत्रिमंडल के आधिकारिक 27 सूत्रीय एजेंडे का हिस्सा नहीं था, लेकिन सामान्य विमर्श के दौरान उठा.
संसद में नरवणे की किताब पर विवाद
जनरल नरवणे की पांडुलिपि पर विवाद 2 फरवरी को तब भड़का, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में उस पुस्तक में वर्णित घटनाओं का उल्लेख करने की कोशिश की. सरकार ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है. बाद में गांधी पुस्तक की एक प्रति सदन में लेकर पहुंचे और इसके अस्तित्व का दावा किया. इसके कुछ ही समय बाद पुस्तक का पीडीएफ सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा.

प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि पुस्तक की किसी भी रूप में (प्रिंट, डिजिटल या पीडीएफ) अवैध रूप से प्रसारित की जा रही प्रतियां कॉपीराइट का उल्लंघन हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसी के कुछ घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने कथित अवैध प्रसार के संबंध में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
मंगलवार (10 फरवरी) को नरवणे ने इस विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी और प्रकाशक के बयान को ही दोहराया है.
विवाद का केंद्र अगस्त 2020 में पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी हिस्से, कैलाश रेंज पर हुई घटनाओं से जुड़ा उनका विवरण है, जिसमें कथित तौर पर चीनी उकसावे के जवाब में भारतीय सेना को तत्काल राजनीतिक निर्देश न मिलने का उल्लेख किया गया है.
दरअसल, यह पुस्तक जनवरी 2024 में प्रकाशित होने वाली थी और दिसंबर 2023 में समाचार एजेंसी पीटीआई ने इसका एक अंश जारी किया था. उसी दौरान नरवणे ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनकी पुस्तक ‘अब उपलब्ध है’ और अमेज़न पर प्री-ऑर्डर लिंक साझा किया था.
हालांकि ‘अग्निवीर’ योजना से जुड़े अंश पर विवाद के बाद रक्षा मंत्रालय ने पुस्तक को प्रकाशन से पहले सेना से मंजूरी के लिए भेजने को कहा. सेना ने पुस्तक की विस्तार से समीक्षा कर अपनी टिप्पणियां रक्षा मंत्रालय को भेज दीं, लेकिन अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है.
नरवणे की पुस्तक को मंजूरी नहीं
रक्षा मंत्रालय द्वारा सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों को दी जाने वाली स्वीकृति के रिकॉर्ड में ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ एक अपवाद है. 2020 से 2024 के बीच मंत्रालय के पास आई पुस्तकों में यह इकलौती पांडुलिपि है, जिसे अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है, जबकि इसी अवधि में दर्जनों अन्य किताबें स्वीकृत हो चुकी हैं.
जनवरी 2024 में इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में 17 सितंबर 2024 को रक्षा मंत्रालय की आर्मी इकाई ने बताया था कि वर्ष 2020 से अब तक 35 पुस्तक शीर्षक स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए गए. इनमें से केवल तीन को मंजूरी नहीं मिली थी, जिनमें जनरल नरवणे की पुस्तक भी शामिल है.
