हजारीबाग में हाथियों का हमला: छह की मौत, दस दिनों में आंकड़ा 11 पहुंचा

झारखंड के हजारीबाग में हाथियों के झुंड के हमले में छह लोगों की मौत हो गई. पिछले दस दिनों में इसी झुंड से जुड़ी मौतों का आंकड़ा 11 पहुंच गया है. वन विभाग की टीमें मौके पर तैनात हैं और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है.

ताजा घटना के साथ ही पिछले दस दिनों में बोकारो और हजारीबाग जिलों में इसी झुंड से जुड़ी मौतों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है. (चित्र कैनवा एआई की सहायता से तैयार किया गया है.)

नई दिल्ली: झारखंड के हजारीबाग जिले के चर्चू प्रखंड स्थित गोंडवार गांव में गुरुवार (13 फरवरी) देर रात हाथियों के एक झुंड के घुस आने से छह लोगों की मौत हो गई. यह घटना अंगो थाना क्षेत्र में रामगढ़-हजारीबाग सीमा के पास हुई. रात करीब 12 से 1 बजे के बीच पांच हाथियों का झुंड गांव में दाखिल हुआ और अफरातफरी मच गई.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पूर्वी वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) विकास कुमार उज्ज्वल ने बताया कि यह वही झुंड हो सकता है, जो हाल के दिनों में बोकारो जिले में हुई घटनाओं में शामिल था. शुरुआती जानकारी के अनुसार हाथी तेजी से एक जिले से दूसरे जिले की ओर बढ़ रहे थे और उनका व्यवहार असामान्य व आक्रामक दिखाई दे रहा था.

प्रत्यक्षदर्शियों और वन विभाग के मुताबिक, हाथी गांव में घुसकर एक घर में रखे धान पर टूट पड़े. शोर सुनकर जब ग्रामीण बाहर निकले तो उनका सामना सीधे झुंड से हो गया. इस घटना में सुमन कुमारी (26), धनश्वर राम (52), सूरज राम (50), सविता देवी (25), अनुराग राम (1) और संजना कुमारी (3) की जान चली गई.

ताजा घटना के साथ ही पिछले दस दिनों में बोकारो और हजारीबाग जिलों में इसी झुंड से जुड़ी मौतों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है. 5 फरवरी को बोकारो के बड़कीपुनू गांव में एक ही परिवार के तीन बुजुर्गों को कुचल दिया गया था. इसके दो दिन बाद 7 फरवरी को गंगपुर गांव में एक अन्य परिवार के दो लोगों की मौत हुई थी.

वन विभाग की टीमें इलाके में तैनात हैं और माइकिंग के जरिए लोगों से रात में घरों से बाहर न निकलने की अपील की जा रही है. झुंड को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिशें जारी हैं. बांकुड़ा से आई एक विशेष टीम रामगढ़ में तैनात है और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है. जरूरत पड़ने पर वंतारा की टीम की मदद भी ली जा सकती है.

डीएफओ ने बताया कि हाथियों के आक्रामक व्यवहार के कारणों पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. संभव है कि वे ‘मस्‍त’ की अवस्था में हों, जो एक से दो महीने तक रह सकती है और इस दौरान उनका व्यवहार अधिक आक्रामक हो जाता है. इसकी पुष्टि के लिए निगरानी टीम गठित की जा रही है और अलग से जांच भी होगी.

मानव जीवन की सुरक्षा के मद्देनज़र जिला प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में एहतियाती कदम उठाने को कहा गया है. मृतकों के परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए प्रारंभिक सहायता दे दी गई है और नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे हाथियों के पास न जाएं, उन्हें भगाने की कोशिश न करें और जब तक झुंड आसपास है, घरों के भीतर ही रहें.