नई दिल्ली: न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट की अदालत में 13 फरवरी 2026 को निखिल गुप्ता ने अपने खिलाफ लगे आरोपों में दोष स्वीकार कर लिया. मुख्य मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न ने उनकी गिल्टी प्ली मंजूर कर ली. सुनवाई शुक्रवार को न्यूयॉर्क समयानुसार सुबह 10:20 बजे शुरू हुई. अदालत में उनकी सहायता के लिए हिंदी दुभाषिए उमेश सी. पासी और मधु मिश्रा मौजूद थे. सुनवाई का पूरा प्रतिलेख अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज है.
दोष स्वीकार करने के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष से पूछा कि यदि मामला ट्रायल तक जाता तो वह कौन-कौन से साक्ष्य पेश करता. इस पर सहायक अमेरिकी अटॉर्नी कैमिल एल. फ्लेचर ने संभावित साक्ष्यों का ब्यौरा दिया.
अभियोजन के अनुसार, सरकार उस गोपनीय सूत्र की गवाही पेश करती, जिसके सामने गुप्ता ने कथित तौर पर न्यूयॉर्क में एक व्यक्ति की हत्या कराने की बात कही थी. इसके अलावा, एक अंडरकवर अधिकारी की गवाही भी पेश की जाती, जिसने ‘भाड़े के हत्यारे’ की भूमिका निभाई थी और जिसके साथ मैनहैटन में कथित तौर पर भुगतान की व्यवस्था की गई थी.
सरकार यह भी अदालत को बताती कि गिरफ्तारी के बाद गुप्ता ने अपने बयान में ‘मर्डर-फॉर-हायर’ की साजिश में शामिल होने की बात स्वीकार की थी. साक्ष्यों में रिकॉर्ड किए गए व्हाट्सऐप संदेश, वॉइस नोट्स, ऑडियो और वीडियो कॉल शामिल होते, जिनमें कथित तौर पर हत्या की योजना पर बातचीत हुई थी.
इसके अलावा, मोबाइल फोन से बरामद संदेशों में गुप्ता और एक सह-साजिशकर्ता के बीच हत्या की योजना और आपसी सहमति के संकेत मिलने का दावा किया गया. अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि टेक्स्ट संदेशों से पता चलता है कि न्यूयॉर्क में कथित हत्यारे को दी गई रकम भारत से भेजी गई थी. अंडरकवर एजेंट को 15,000 अमेरिकी डॉलर की शुरुआती नकद राशि दिए जाने का वीडियो भी सबूत के तौर पर पेश किया जाता.
दोष स्वीकार करने के साथ ही गुप्ता ने मुकदमे का अधिकार छोड़ दिया है. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उनका यह फैसला जांच एजेंसियों के साथ किसी संभावित सहयोग का संकेत है या फिर एक ऐसे सार्वजनिक ट्रायल से बचने की रणनीति, जिसमें एफबीआई और ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन के बीच और संवेदनशील सूचनाएं सामने आ सकती थीं.
