नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले नई दिल्ली ने दोहराया था कि भारत की ऊर्जा खरीद ‘राष्ट्रीय हित’ के आधार पर ही लिए जाएंगे.
फरवरी की शुरुआत में नई दिल्ली के साथ व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूस से कच्चा तेल न खरीदने पर सहमत हो गया है. आदेश में कहा गया है कि भारत ने रूसी तेल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात को रोकने पर सहमति जताई है और इसके अनुपालन की निगरानी के लिए अमेरिका एक व्यवस्था बनाएगा.
हालांकि भारत ने ट्रंप के इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. इसके बाद से अमेरिका कई बार यह दावा करता रहा है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, शनिवार (14 फरवरी) को म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध और मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए रुबियो ने कहा, ‘भारत के साथ हमारी बातचीत में हमें उनकी ओर से अतिरिक्त रूसी तेल न खरीदने की प्रतिबद्धता मिली है.’
समझौते की घोषणा के बाद ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए, अगस्त में रूस से कच्चा तेल खरीदने के चलते भारत पर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को वापस ले लिया था, और इसे 18% कर दिया था.
कार्यकारी आदेश में यह भी कहा गया था कि कई अमेरिकी आयात पर भारत टैरिफ या तो कम या जीरो करेगा.
इससे पहले भारत ने कहा था कि वह कच्चे तेल की खरीद कई स्रोतों से करता रखेगा और आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उनका विविधीकरण करेगा. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस सप्ताह कहा था कि ऊर्जा खरीद में राष्ट्रीय हित ही ‘मार्गदर्शक कारक’ बने रहेंगे.
