यूपी: टेस्टिंग के दूसरे दिन ही लीक होने लगी जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी

मामला महोबा के जैतपुर ब्लॉक के नगारा डांग गांव का है, जहां 13 फरवरी को टेस्टिंग के दौरान टंकी में पूरी तरह पानी भरते ही दरारें आ गईं और अगले ही दिन पानी लीक होने लगा. ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है. वहीं, विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि भ्रष्टाचार की पाइपलाइन महोबा से लखनऊ तक जलापूर्ति की जगह धनापूर्ति कर रही है.

(फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के महोबा ज़िले में जल जीवन मिशन के तहत बनी एक पानी की टंकी में पानी भरते ही दरारें आ गईं और दूसरे दिन ही पानी लीक होने लगा. इस मामले ने एक बार फिर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

दैनिक भास्कर के मुताबिक, मामला महोबा के जैतपुर ब्लॉक के नगारा डांग गांव का है, जहां 13 फरवरी को टेस्टिंग के दौरान टंकी में पूरी तरह पानी भरते ही दरारें आ गईं और अगले ही दिन यानी 14 फरवरी को पानी लीक होने लगा. ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है.

इस संबंध में ग्राम प्रधान गायत्री ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत भेजी है. शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ठेकेदार ने निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप टंकी की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं.

बताया जा रहा है कि यह पानी टंकी 65 लाख रुपये खर्च कर बनाई गई थी. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अधिकारी लीपापोती कर रहे हैं.

इस मामले को लेकर एडीएम (नमामि गंगे) मोइनुल इस्लाम ने बताया कि जल्द ही खामी को दुरुस्त कर समस्या का समाधान करा लिया जाएगा.

वहीं, जल निगम ग्रामिण के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संदेश सिंह तोमर ने एक बयान जारी कर कहा है कि ये स्थिति पानी टंकी में क्षति के चलते नहीं बल्कि ओवर फ्लो की वजह से हुई है, जिसमें देखा जा सकता है कि पानी टंकी से बह रहा है.

बताया गया है कि ज़िले में करीब 900 करोड़ की लागत से जल जीवन मिशन योजना का काम कराया जा रहा है. पहले योजना 2024 में पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया है. कई गांवों में पानी के पाइप तो डाल दिए गए, लेकिन पानी नहीं पहुंचा. कई गांवों में पाइपलाइन डालते समय खोदी गई सड़कों की मरम्मत भी नहीं हुई है. हालांकि अधिकारी सब ठीक होने का दावा कर रहे हैं.

मालूम हो कि यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब हाल ही में चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का रास्ता रोक कर इस मिशन में बरती जा रही लापरवाही की शिकायत की थी. नगारा डांग गांव की इस घटना ने विधायक के आरोपों को बल दिया है.

इस घटना के बाद बृजभूषण राजपूत ने कहा, ‘जल जीवन मिशन की बदहाली को लेकर ही मैं लड़ाई लड़ रहा हूं. भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ ही मेरा संघर्ष है. धरातल पर बेहतर काम हो और हर घर नल योजना के तहत सभी घरों में पानी पहुंचे यही मैं चाहता हूं. टंकी दरकने वाला वीडियो मैंने भी देखा है. इसमें जो भी दोषी हों उन पर कार्रवाई होनी जानी चाहिए.’

विपक्ष ने बताया ‘भ्रष्टाचार मिशन’

वहीं, इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष भी योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार पर हमलावर है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है.

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि महोबा में भाजपा के भ्रष्टाचार का बोझ पानी की टंकी नहीं उठा पाई. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यहां बुलडोजर नहीं चलेगा क्योंकि भ्रष्टाचार की पाइपलाइन महोबा से लखनऊ तक जलापूर्ति की जगह धनापूर्ति कर रही है.

उन्होंने आगे लिखा कि यह जल मिशन नहीं बल्कि कमीशन मिशन है. उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सरकार पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

इस संबंध में आम आदमी पार्टी के नेता सुनील कुमार ने भी भाजपा सरकार को घेरते हुए एक्स पर लिखा, ‘जल जीवन मिशन नहीं ये है भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार मिशन. भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार से बनकर तैयार हुई टंकी टेस्टिंग के एक दिन बाद ही झरने की तरह बहने लगी. इस टंकी को बनवाने में ₹65 लाख से ज़्यादा का खर्च आया लेकिन टंकी एक दिन भी नहीं चली. 

वहीं, कांग्रेस की यूथ विंग की ओर से भी इस पर कटाक्ष करते हुए कहा गया, ‘यूपी के महोबा में 65 लाख रुपये की लागत से तैयार हुई ‘झरने वाली’ वॉटर टैंक!’

इसमें आगे लिखा गया कि जर्मन तकनीक के प्रयोग से बनी यह टंकी अब स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है. जल जीवन मिशन के तहत विकास की यह गति रुकने वाली नहीं है. तकनीक और जन-सुविधाओं का बेहतरीन उदाहरण पेश करती योगी सरकार!