नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में 1.67 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों को विभिन्न देशों से निर्वासित कर भारत भेजा गया है.
यात्रा एजेंटों द्वारा ठगे गए भारतीय युवाओं को लेकर शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल के सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि सबसे अधिक निर्वासन (1.21 लाख) सऊदी अरब से हुए हैं.
सऊदी अरब के बाद संयुक्त अरब अमीरात (22,209), मलेशिया (6,743), कतर (5,319), अमेरिका (4,375) और म्यांमार (2,180) का स्थान है.
पिछले साल अमेरिका से भारतीय नागरिकों को जंजीरों में बांधकर निर्वासित किए जाने की घटना चर्चा में आई थीं और उसकी व्यापक आलोचना भी हुई थी.
बादल द्वारा पूछे गए सवालों थे:
(क) क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि खासकर पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों से बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को बेईमान ट्रैवल और इमिग्रेशन एजेंटों द्वारा अवैध ‘डंकी रूट’ या फर्जी वीज़ा के जरिए विदेश भेजकर ठगा जा रहा है, जिसके चलते उन्हें विदेशी अधिकारियों द्वारा हिरासत में लेकर निर्वासित किया जा रहा है;
(ख) यदि हां, तो ऐसे कितने युवाओं को इन फर्जी तरीकों और मार्गों से भेजा गया;
(ग) पिछले पांच वर्षों में देशवार और वर्षवार कितने भारतीय नागरिकों को विदेशी देशों से निर्वासित किया गया;
(घ) क्या ऐसे अवैध एजेंटों के शिकार लोगों का कोई आकलन किया गया है और यदि हां, तो उसका विवरण दें;
(ङ) पिछले तीन वर्षों में पंजाब और अन्य राज्यों में अवैध ट्रैवल/इमिग्रेशन एजेंटों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और शुरू की गई कानूनी कार्यवाहियों की संख्या, जिनमें मानव तस्करी विरोधी कानूनों के तहत दर्ज मामले भी शामिल हों; और
(च) ब्लैकलिस्ट या अनधिकृत एजेंटों की सूची को सार्वजनिक करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए या प्रस्तावित कदम क्या हैं.
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों की जानकारी मिली है, जिनमें फर्जी भर्ती और नौकरी के प्रस्ताव देने वाली संदिग्ध संस्थाओं ने पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों सहित देश के विभिन्न हिस्सों से भारतीय नागरिकों को, मुख्य रूप से सोशल मीडिया चैनलों के जरिए, विदेशों में रोजगार का लालच दिया.
सवाल (क), (ख) और (ग) के संदर्भ में दिए गए लिखित जवाब में कहा गया, ‘देश में अवैध/बेईमान भर्ती एजेंटों की ऐसी धोखाधड़ी गतिविधियां तब सामने आती हैं, जब पीड़ित प्रवासी या उनके रिश्तेदार, दोस्त या परिवार के सदस्य शिकायत दर्ज कराते हैं, क्योंकि ये भारतीय नागरिक अपनी मर्जी से फर्जी/बेईमान भर्ती एजेंटों और अवैध माध्यमों के जरिए विदेश जाते हैं.’
सरकार ने कहा, ‘अनियमित प्रवासन का प्रयास करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या से संबंधित विशिष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.’
लिखित उत्तर में यह भी कहा गया कि अधिकांश विदेशी सरकारें अपने यहां विदेशियों के अवैध रूप से रहने की जानकारी साझा नहीं करतीं, सिवाय उन मामलों के जब निर्वासन के आदेश जारी होते हैं और यात्रा दस्तावेज या राष्ट्रीयता की पुष्टि की आवश्यकता होती है.
सरकार ने दावा किया कि मंत्रालय ई-माइग्रेट पोर्टल, सोशल मीडिया हैंडल्स और प्रचार के अन्य माध्यमों के जरिए फर्जी नौकरी रैकेटों के खतरों और उनसे बचाव के तरीकों को लेकर समय-समय पर परामर्श जारी करती है.
जवाब में कहा गया, ‘जनवरी 2026 तक, जिन 3,505 अपंजीकृत एजेंटों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उनकी सूची संभावित प्रवासियों को सतर्क करने के लिए ई-माइग्रेट पोर्टल पर प्रकाशित की गई है,’ यह भी कहा गया कि सरकार जागरूकता अभियानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी संचालन करती है.
