नई दिल्ली: 1 मार्च को अमेरिका और इज़रायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर व्यापक सैन्य हमला किया. इन हमलों में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर भारी बम गिराए गए और कई युद्धपोतों को नष्ट किए जाने का दावा किया गया. यह सैन्य कार्रवाई ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुई.
ईरानी नेतृत्व के अनुसार, हमलों की शुरुआत से अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लगातार जारी बमबारी के बीच यह आशंका गहराती जा रही है कि संघर्ष ईरान की सीमाओं से आगे बढ़कर पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है.
क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ती टकराहट
लेबनान के उग्रवादी संगठन हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल पर हमले का दावा किया है, जिसके जवाब में इज़रायल ने भी कार्रवाई की. खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों और कम से कम पांच नागरिकों की मौत के बाद वे भी ईरान के खिलाफ कदम उठा सकते हैं. वहीं, यूरोपीय देशों ने ईरान को अन्य देशों पर हमले से रोकने के लिए अमेरिका की मदद करने की पेशकश की है.
इज़रायल का कहना है कि ईरानी हमलों में यरुशलम और बेइत शेमेश स्थित एक सिनेगॉग को निशाना बनाया गया, जहां नौ लोगों की मौत हो गई और 28 घायल हुए. इसके साथ ही इज़रायल में कुल मृतकों की संख्या 11 तक पहुंच गई है.
हवाई सेवाएं और शिक्षा प्रभावित
तनाव के चलते हवाई यातायात पर भी बड़ा असर पड़ा है. 1 मार्च को ही भारतीय एयरलाइंस की लगभग 350 उड़ानें रद्द कर दी गईं. एयर इंडिया ने लंदन, ज्यूरिख, मिलान, फ्रैंकफर्ट और कोपेनहेगन समेत यूरोप के कई शहरों के लिए 20 अतिरिक्त लंबी दूरी की उड़ानें भी अस्थायी रूप से स्थगित कर दी हैं.
पश्चिम एशिया के सात देशों में पढ़ने वाले पांच लाख से अधिक भारतीय छात्रों, जिनमें बड़ी संख्या स्कूली बच्चों की है, की सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड परीक्षाएं फिलहाल रोक दी गई हैं. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि परीक्षाएं कब और किस तरह दोबारा आयोजित की जाएंगी.
भारत में सतर्कता बढ़ी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को संभावित हिंसा और छिटपुट विरोध प्रदर्शनों को लेकर सतर्क किया है. राज्यों से कहा गया है कि वे ईरान, अमेरिका और इज़रायल के दूतावासों व वाणिज्य दूतावासों के बाहर होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर नजर रखें. साथ ही भड़काऊ भाषण देने वाले कट्टरपंथी तत्वों की पहचान करने और सोशल मीडिया पर सक्रिय उग्रपंथी समूहों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं.
अमेरिकी सैनिकों की मौत, ट्रंप का सख्त रुख
इस संघर्ष में तीन अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के नौ युद्धपोत डुबो दिए गए हैं और उसकी नौसेना का मुख्यालय काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है.
हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि वह ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के लिए तैयार हैं. दूसरी ओर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी ने कहा है कि तेहरान ने अमेरिका से बातचीत दोबारा शुरू करने की कोई पहल नहीं की है और फिलहाल वार्ता की संभावना नहीं है.
खाड़ी देशों और इराक तक फैला संघर्ष
ईरान के जवाबी हमलों ने खाड़ी क्षेत्र के कई शहरों को भी प्रभावित किया है. संयुक्त अरब अमीरात में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कुवैत और बहरीन में एक-एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है. हालांकि इन देशों का कहना है कि अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया गया.
इराक की शिया मिलिशिया ‘सराया औलिया अल-दम’ ने बगदाद स्थित हवाई अड्डे पर अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला करने का दावा किया है. यह हमला खामेनेई की हत्या के बाद जारी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा बताया जा रहा है.
लेबनान में हिज़्बुल्लाह द्वारा इज़रायल पर मिसाइलें दागे जाने के बाद इज़रायल ने बेरूत पर हमले किए. एक वर्ष से अधिक समय बाद हिज़्बुल्लाह ने खुलकर इज़रायल पर हमला करने का दावा किया है. संगठन ने कहा है कि उसकी कार्रवाई खामेनेई की हत्या और इज़रायल की बार-बार की सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में की गई है.
ईरान में भारी जनहानि
अमेरिका–इज़रायल के हमलों का सबसे गंभीर असर ईरान पर पड़ा है. दक्षिणी ईरान में लड़कियों के एक स्कूल पर किए गए हमले में कम से कम 165 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए हैं. हालांकि इज़रायली सेना ने इस क्षेत्र में किसी हमले की जानकारी से इनकार किया है. अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह इन खबरों की जांच कर रही है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पूर्व रिकॉर्ड किए गए संदेश में बताया कि नया नेतृत्व परिषद कामकाज संभाल चुका है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि एक या दो दिनों में नए सर्वोच्च नेता का चयन कर लिया जाएगा.
