नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल का संयुक्त हमला अब पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संयुक्त फैसले से ईरान पर लगातार हमले जारी हैं और हालात थमने के बजाय और जटिल होते दिख रहे हैं.
ट्रंप ने संकेत दिया है कि हमला रुकने के बाद ईरान की सत्ता किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपी जानी चाहिए जो मौजूदा शासन तंत्र के भीतर से आता हो. उनके अनुसार, बाहरी विकल्पों की तुलना में व्यवस्था के भीतर का कोई चेहरा अधिक उपयुक्त हो सकता है. हालांकि संभावित नेताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ‘जिन लोगों के बारे में हम सोच रहे थे, वे अब मारे जा चुके हैं.’ उन्होंने यह आशंका भी जताई कि सत्ता परिवर्तन के बाद यदि पहले जैसा ही कठोर नेतृत्व उभर आया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘हम ऐसा नहीं चाहते.’
इन हमलों में अब तक 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश ईरान के नागरिक बताए जा रहे हैं. देश के कई शीर्ष नेताओं के मारे जाने की भी खबर है, जिनमें सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई का नाम भी शामिल है.
तेहरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं, हालांकि हाल के दिनों में ईरानी हमलों की तीव्रता कुछ कम होती दिख रही है. दूसरी ओर, इज़राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत को भी निशाना बनाया है और दक्षिणी लेबनान में सैनिक तैनात कर दिए हैं. इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है.
इस युद्ध के दूरगामी परिणामों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ रही है. भारत के लिए भी यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं. समुद्री व्यापार मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर को लेकर नई दिल्ली ने ‘गहरी चिंता’ व्यक्त की है.
इसी बीच दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान (ASEAN) ने भी मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष पर गंभीर चिंता जताई है. अपने बयान में आसियान ने कहा कि 28 फरवरी 2026 को इज़रायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों तथा उसके बाद ईरान द्वारा बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों के खिलाफ की गई जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्रीय तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है. संगठन ने कहा कि यह स्थिति न केवल नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व स्थिरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है.
आसियान ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने की अपील की है. बयान में विशेष रूप से यह अफसोस जताया गया कि यह सैन्य टकराव उस समय तेज हुआ जब कूटनीतिक प्रयास जारी थे और ओमान की अगुवाई में मध्यस्थता की पहल के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही थी.
उधर एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ईरान में असंतोष को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुर्द बलों को हथियार उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरानी विपक्षी समूहों और इराक के कुर्द नेताओं के साथ संभावित सैन्य सहयोग पर बातचीत कर रहा है.
इन सभी घटनाक्रमों के बीच स्पष्ट है कि यह संघर्ष केवल दो या तीन देशों तक सीमित नहीं रह गया है. इसके प्रभाव मध्य पूर्व से लेकर दक्षिण एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक महसूस किए जा रहे हैं. आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य कार्रवाइयों की दिशा ही तय करेगी कि यह संकट किस रूप में आगे बढ़ता है.
