लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने सार्वजनिक रूप से कभी भी डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कोई खराब टिप्पणी नहीं की है. लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप उनकी इस नीति का जवाब उसी तरह से नहीं दे रहे हैं. ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों में शामिल होने को लेकर हिचक दिखाने पर स्टार्मर की आलोचना की है.
इस विवाद ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है. स्टार्मर ने इन संबंधों को मजबूत करने के लिए काफी कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेन-देन के नजरिए से देखने के कारण पहले से ही रिश्तों में खिंचाव रहा है.
ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ‘यह सबसे मजबूत रिश्तों में से एक था. अब हमारे यूरोप के कई दूसरे देशों के साथ बहुत मजबूत संबंध हैं.’
उन्होंने कहा, ‘फ्रांस बहुत अच्छा रहा है. सभी देश अच्छे रहे हैं, लेकिन ब्रिटेन बाकी देशों से काफी अलग रहा है.’
ट्रंप ने कहा, ‘यह देखकर दुख होता है कि यह रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा.’
ईरान पर शनिवार (28 फ़रवरी) से शुरू हुए अमेरिकी हमलों के लिए स्टार्मर ने शुरुआत में अमेरिकी विमानों को ब्रिटिश सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी. बाद में उन्होंने अमेरिका को इंग्लैंड और हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया के अड्डों का उपयोग कर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और उनके भंडारण स्थलों पर हमला करने की अनुमति दी, लेकिन अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाने की मंजूरी नहीं दी.
सप्ताह के अंत में साइप्रस के अक्रोतिरी स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ईरान निर्मित ड्रोन से हमला होने के बाद भी स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन ‘आक्रामक सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा.’
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी करते हुए कहा कि ब्रिटेन की सरकार ‘आसमान से शासन परिवर्तन’ की नीति में विश्वास नहीं करती.
स्टार्मर ने सोमवार (2 मार्च) को हाउस ऑफ कॉमन्स में सांसदों से कहा, ‘ब्रिटेन की किसी भी कार्रवाई के लिए कानूनी आधार और स्पष्ट व व्यावहारिक योजना का होना जरूरी है.’
उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने शुरुआती हमलों में शामिल न होने के हमारे फैसले से असहमति जताई है, लेकिन ब्रिटेन के राष्ट्रीय हित में क्या है, इसका निर्णय करना मेरी जिम्मेदारी है.’
फाइनेंशियल टाइम्स ने इस स्थिति को स्टार्मर का ‘लव, एक्चुअली मोमेंट’ बताया है. यह 2003 की एक फिल्म के उस दृश्य का संदर्भ है जिसमें ह्यू ग्रांट द्वारा निभाया गया ब्रिटिश प्रधानमंत्री का किरदार एक दबाव बनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति का सामना करता है.
दोनों नेताओं के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों से बढ़ रहा था. इस साल की शुरुआत में ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी की स्टार्मर और अन्य यूरोपीय नेताओं ने आलोचना की थी. हाल ही में ट्रंप ने ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप समूह, जहां डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा स्थित है, को मॉरीशस को सौंपने के समझौते की भी आलोचना की, जबकि पहले उनकी सरकार ने इस समझौते का समर्थन किया था.
ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्रालय प्रमुख पीटर रिकेट्स ने ऑब्जर्वर अखबार से कहा कि ट्रंप के नेतृत्व में ‘अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून के साथ निरंतरता बनाए रखने की कोशिश लगभग छोड़ दी है.’
यह बात स्टार्मर के लिए एक अहम मुद्दा है. वह पेशे से बैरिस्टर हैं और इंग्लैंड तथा वेल्स के पूर्व मुख्य अभियोजक भी रह चुके हैं.
यह विवाद 2025 में ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से उनके साथ संबंध बेहतर बनाने की स्टार्मर की कोशिशों के लिए एक झटका माना जा रहा है. ब्रिटिश सरकार ने ट्रंप के राजकीय दौरे के दौरान उनका भव्य स्वागत किया था, जहां वह किंग चार्ल्स तृतीय के अतिथि थे. स्टार्मर ने रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के ट्रंप के प्रयासों की भी लगातार सराहना की थी, हालांकि अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है.
ईरान के साथ युद्ध को लेकर यूरोपीय देशों के बीच भी मतभेद दिखाई दे रहे हैं. कुछ देशों ने इसकी आलोचना की है, जबकि कुछ ने समर्थन किया है.
नाटो महासचिव मार्क रुटे ने ईरान पर हमले और उसके सर्वोच्च नेता की हत्या के ट्रंप के फैसले का खुलकर समर्थन किया और इसे यूरोप की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया.
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त बयान में कहा कि वे हमलों में शामिल नहीं थे, लेकिन वे ‘जरूरी और अनुपातिक रक्षात्मक कार्रवाई’ का समर्थन करने के लिए तैयार हैं, जिससे ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को उनके स्रोत पर ही नष्ट किया जा सके.
वहीं स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इन हमलों को ‘अनुचित’ और ‘खतरनाक’ बताया.
सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि ब्रिटेन में कई लोग युद्ध के लिए अमेरिका के तर्कों को लेकर संदेह में हैं. हालांकि अन्य पार्टी के कई नेताओं ने हमलों में शामिल न होने के स्टार्मर के फैसले की आलोचना की है. कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनॉक ने कहा कि उनकी पार्टी ‘राज्य प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की इस जरूरी कार्रवाई के साथ खड़ी है.’
हालांकि, विदेश मंत्रालय के मंत्री स्टीफन डौटी ने अमेरिका-ब्रिटेन के ‘विशेष संबंध’ कमजोर होने के आरोपों को खारिज किया है.
उन्होंने मंगलवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हमारा रिश्ता मजबूत है. यह पहले भी कायम रहा है, अब भी कायम है और भविष्य में आर्थिक और सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में कायम रहेगा.’
(साभार- एसोसिएटेड प्रेस)
