ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमले का 12वां दिन: हज़ारों नागरिक ठिकाने तबाह, खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का दायरा बढ़ा

अमेरिका और इज़रायल के हमलों के 12 दिन होने के बाद भी ईरान में बमबारी जारी है. ईरान के अनुसार, अब तक 10,000 नागरिक ठिकाने निशाना बने और 1,300 से अधिक लोगों की मौत हुई है. संघर्ष का असर खाड़ी क्षेत्र, तेल आपूर्ति और भारत में एलपीजी संकट की आशंका तक पहुंच गया है.

लेबनान के बेरूत में बुधवार को इज़रायली हवाई हमलों में कई रिहायशी अपार्टमेंट्स को निशाना बनाया गया. (फोटो: एपी वाया पीटीआई)

नई दिल्ली: अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों को बुधवार (11 मार्च) को 12 दिन पूरे हो गए. इस दौरान ईरान में लगातार बमबारी जारी है और संघर्ष का दायरा खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों तक फैलता दिखाई दे रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी के अनुसार अब तक अमेरिकी-इज़रायली हमलों में देश के लगभग 10,000 नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है. इनमें करीब 8,000 आवासीय मकान शामिल हैं. इन हमलों में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

ईरान में लगातार हमले, लेबनान भी निशाने पर

ख़बरों के अनुसार बुधवार (11 मार्च) को इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के केंद्रीय उपनगरों में भी नए हवाई हमले किए. एक बहुमंजिला इमारत में आग लग गई, जबकि दक्षिणी लेबनान के नबातियेह, टायर और बिंत ज्बील जिलों में हुए हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत की खबर है.

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक इस संघर्ष में देश में लगभग 500 लोगों की मौत हो चुकी है. एक रेड क्रॉस कर्मी की भी उस हमले में लगी चोटों के कारण मौत हो गई, जब वह पहले के हमले में घायल लोगों को बचाने गया था.

तेल उद्योग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर असर

संघर्ष का असर खाड़ी क्षेत्र के तेल ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास एक कंटेनर जहाज पर प्रक्षेप्य से हमला किया, जिससे जहाज में आग लग गई. ब्रिटेन के समुद्री व्यापार निगरानी केंद्र ने इस घटना की पुष्टि की है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंकाएं बढ़ गई हैं.

ईरान ने खाड़ी के कुछ तेल प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया है. कुवैत ने कहा कि उसने अपने ऊपर आए आठ ईरानी ड्रोन मार गिराए, जबकि सऊदी अरब ने शायबा तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ड्रोन और मिसाइलों को रोके जाने की बात कही है.

संयुक्त अरब अमीरात ने भी बताया कि ईरानी हमलों में छह लोगों की मौत और 122 लोग घायल हुए हैं.

भारत-ईरान के बीच बातचीत

युद्ध के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क जारी है. मंगलवार (10 मार्च) को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास से फोन पर बातचीत की.

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों के बीच मौजूदा संघर्ष की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई और संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी.

भारत में एलपीजी संकट की आशंका

युद्ध का असर भारत में भी महसूस किया जा रहा है. व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कमी की वजह से तमिलनाडु, खासकर चेन्नई में होटल और रेस्तरां के एक वर्ग ने बुधवार को बंद रखने की घोषणा की.

रिपोर्टों के अनुसार हैदराबाद, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में भी व्यावसायिक गैस की कमी के कारण होटल और रेस्तरां उद्योग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने तीन सदस्यों की एक समिति गठित की है, जिसका उद्देश्य शिकायतों की समीक्षा करना और घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देना है.

ऑस्ट्रेलिया में ईरानी महिला फुटबॉल टीम का मामला

इसी बीच ऑस्ट्रेलिया में एशियन कप फुटबॉल टूर्नामेंट खेल रही ईरान की महिला फुटबॉल टीम भी चर्चा में रही. टीम के अधिकांश खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया से अपने देश लौट गए, जबकि सात खिलाड़ियों ने मानवीय वीजा स्वीकार कर ऑस्ट्रेलिया में रहने का फैसला किया.

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने सिडनी हवाई अड्डे पर खिलाड़ियों को अलग-अलग बुलाकर बताया कि वे चाहें तो ईरान वापस न जाकर शरण ले सकती हैं. हालांकि अंतिम समय तक चली बातचीत के बाद अधिकांश खिलाड़ी टीम के साथ लौट गईं. बाद में ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने बताया कि जिन सात खिलाड़ियों ने वीजा लिया था, उनमें से एक ने बाद में अपना फैसला बदलकर ईरान लौटने का निर्णय किया.

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि देश अपनी नागरिकों का स्वागत करता है और उनकी सुरक्षा की गारंटी देता है. उन्होंने बाहरी दखलंदाजी की आलोचना भी की.

खाड़ी क्षेत्र से विदेशी नागरिकों की वापसी

युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र से विदेशी नागरिकों का पलायन भी बढ़ गया है. ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के अनुसार 45,000 से अधिक ब्रिटिश नागरिक इस क्षेत्र से निकल चुके हैं, जबकि लगभग 40,000 अमेरिकी नागरिक भी वापस लौटे हैं.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाड़ी सहयोग परिषद द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव पर भी विचार हो रहा है. इस प्रस्ताव में ईरान से पड़ोसी देशों – बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन – पर हमले रोकने की मांग की गई है और सभी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत समाप्त करने की अपील की गई है.

कुल मिलाकर, अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया का संघर्ष अब व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप लेता दिख रहा है. लगातार हो रही बमबारी, तेल ढांचे पर हमले और समुद्री मार्गों पर तनाव के कारण न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.