नई दिल्ली: दुनिया में आज लोकतंत्र के मुकाबले तानाशाही वाले देशों की संख्या अधिक है. वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 2025 के अंत तक 92 तानाशाही वाले (Autocracy) देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले ‘चुनावी तानाशाह’ देशों में शामिल है.
यह डेमोक्रेसी रिपोर्ट दुनिया भर में सबसे अधिक उद्धृत रिपोर्टों में से एक है और इसे स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय के वी-डेम इंस्टिट्यूट द्वारा प्रकाशित किया जाता है. 2026 की रिपोर्ट का शीर्षक- ‘डेमोक्रेसी रिपोर्ट 2026: अनरैवेलिंग द डेमोक्रेटिक एरा’ है.
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के औसत आम नागरिक के लिए लोकतंत्र का स्तर 1978 के स्तर पर वापस पहुंच गया है. 1974 में पुर्तगाल से शुरू हुई ‘लोकतंत्रीकरण की तीसरी लहर’ से जो प्रगति हुई थी, वह लगभग समाप्त हो चुकी है.
पिछले 50 वर्षों में पहली बार अमेरिका अब ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ (उदार लोकतंत्र) नहीं रहा. रिपोर्ट के अनुसार, अब दुनिया की 74% आबादी तानाशाह शासन के अधीन रहती है.
2025 के अंत तक दुनिया के पांच सबसे अधिक आबादी वाले देशों में से चार तानाशाह वाले देश – भारत, चीन, इंडोनेशिया और पाकिस्तान हैं. रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका भी तेजी से तानाशाही की ओर बढ़ रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ‘चुनावी तानाशाह’ सबसे अधिक आबादी वाला शासन प्रकार बन गया है, जिसके अंतर्गत दुनिया की लगभग आधी आबादी – 46% (3.8 अरब लोग) – आती है. भारत, पाकिस्तान और हाल ही में इंडोनेशिया – दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले चुनावी तानाशाह देशों में शामिल हैं.
भारत अभी भी ‘चुनावी तानाशाह’ बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.
इलेक्टोरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 106वें स्थान पर है, लिबरल कंपोनेंट इंडेक्स में 99वें स्थान पर और इगेलिटेरियन कंपोनेंट इंडेक्स में 138वें स्थान पर है. पार्टिसिपेटरी कंपोनेंट इंडेक्स में भारत 83वें और डिलिबरेटिव कंपोनेंट इंडेक्स में 100वें स्थान पर है.
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण और मध्य एशिया में रुझान अलग-अलग हैं, लेकिन औसत स्तर पर इस क्षेत्र में लोकतंत्र दुनिया के अधिकांश हिस्सों से काफी नीचे है और अपेक्षाकृत स्थिर है. हालांकि, औसत नागरिक यहां सबसे अधिक तानाशाही का सामना कर रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंक 1976 के स्तर पर वापस आ गए हैं. दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के कारण भारत इस गिरावट में बड़ी भूमिका निभा रहा है.
हालांकि, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में तानाशाही की ओर झुकाव भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. यह रिपोर्ट बांग्लादेश में हुए चुनावों से पहले प्रकाशित की गई थी, जिसमें इस वर्ष तारिक रहमान प्रधानमंत्री चुने गए.
रिपोर्ट कहती है कि दक्षिण और मध्य एशिया में केवल 2% लोग (चुनावी) लोकतंत्र का लाभ उठा रहे हैं, और ये सभी नेपाल और श्रीलंका में हैं. ‘ग्रे ज़ोन’ लोकतंत्र – भूटान, मंगोलिया और मालदीव – में रहने वाली आबादी बहुत ही कम है. बड़ी आबादी – 85% – भारत, कजाखस्तान और पाकिस्तान जैसे चुनावी तानाशाह वाले देशों में रहती है.
वहीं, अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे पूरी तरह से तानाशाही देशों में 13% आबादी रहती है, जिसमें 2025 में बांग्लादेश भी इस श्रेणी में शामिल हो गया.
इस क्षेत्र में श्रीलंका ही एकमात्र देश (क्षेत्र का 7% आबादी है) है जो लोकतंत्रीकरण की ओर बढ़ रहा है. भारत उन चार देशों (क्षेत्र का 29% आबादी है) में शामिल है जो तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं, अन्य देश हैं – अफगानिस्तान, किर्गिस्तान और पाकिस्तान.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का तानाशाही की ओर बढ़ना (‘2009 से’) लोकतांत्रिक संस्थाओं को धीरे-धीरे, लेकिन सुनियोजित तरीके से खत्म करना है.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सत्तारूढ़ बहुलतावाद-विरोधी, हिंदू-राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकतंत्र को कमजोर करने के उदाहरणों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की स्वतंत्रता में गिरावट, सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों का उत्पीड़न, तथा नागरिक समाज और विपक्ष पर हमले शामिल हैं.’
रिपोर्ट के उस हिस्से में भी भारत का उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि 22 देशों में प्रिंट और ब्रॉडकास्ट मीडिया के अलग-अलग नज़रिए खत्म होते जा रहे हैं, और 21 देशों में सरकार के निर्णयों और कार्यों की आलोचनात्मक समीक्षा खत्म होती जा रही है. अमेरिका भी इन देशों में शामिल है.
रिपोर्ट के अनुसार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबसे अधिक प्रभावित हुई है- 2025 में 44 देशों में इसमें गिरावट दर्ज की गई. मीडिया सेंसरशिप निरंकुशता की ओर बढ़ रही सरकारों का सबसे आम हथियार बना हुआ है, जिसमें 32 देश (73%) इसका उपयोग कर रहे हैं.
भारत उन देशों में भी शामिल है, जहां संसद द्वारा सरकार के अवैध कार्यों की जांच की प्रभावशीलता कमजोर हो रही है.
अमेरिका और भारत उन देशों में भी शामिल हैं, जहां सक्रिय नागरिक समाज का स्तर घट रहा है और महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले परामर्श की प्रक्रिया सीमित हो रही है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में औसत नागरिकों के लिए लोकतंत्र का स्तर भी पिछले 50 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका में चल रही तानाशाही की प्रवृत्ति है.
रिपोर्ट में 2025 में 10 नए ऐसे देशों की पहचान की गई है जो तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं और इनमें यूनाइटेड किंगडम भी शामिल है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नागरिक समाज पर होने वाला दमन तेज़ी से बढ़ा है, और अब इसका असर तानाशाही की ओर बढ़ रहे 30 देशों पर पड़ रहा है.
