नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुए आर्थिक दबावों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर में संसाधनों की बचत की बार-बार अपील किए जाने के बावजूद, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा संचालित इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) कई शहरों में तय कार्यक्रम के अनुसार जारी है.
हाल ही में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया को एक औपचारिक पत्र भेजकर आईपीएल के बाकी मैचों के कार्यक्रम में बदलाव की मांग की. सीटीआई ने सुझाव दिया कि सीमित संख्या में मैदानों पर बिना दर्शकों के मैच कराए जाएं, ताकि प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप देशभर में होने वाली यात्रा और संसाधनों की खपत को कम किया जा सके.
इन मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल ने कहा कि बीसीसीआई भारत सरकार की निगरानी में काम करता है और वह अपने संचालन में बदलाव तभी करेगा जब सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक निर्देश जारी किया जाएगा. उनके इस बयान का अप्रत्यक्ष अर्थ यह है कि बीसीसीआई प्रधानमंत्री की स्वैच्छिक अपील या किसी स्वतंत्र व्यापारिक संस्था की सिफारिशों के आधार पर अपने कार्यक्रम में बदलाव नहीं करेगा.
पीएम मोदी की सादगी अपनाने की अपील नागरिकों, सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं से स्वैच्छिक सहयोग की उम्मीद पर आधारित है, ताकि ईंधन और अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके. चूंकि यह कोई कानूनी रूप से बाध्यकारी आदेश नहीं है, बल्कि महज एक अपील है, इसलिए बीसीसीआई जैसी निजी खेल संस्थाएं, हालांकि जिनमें भाजपा नेताओं का प्रभाव काफी अधिक है, यह कह सकती हैं कि वे कानूनी रूप से टूर्नामेंट रोकने के लिए बाध्य नहीं हैं. जैसा कि धूमल ने कहा, बोर्ड सरकार के प्रति जवाबदेह है और वह तभी बदलाव करेगा जब युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय या केंद्रीय गृह मंत्रालय कोई बाध्यकारी प्रशासनिक आदेश जारी करेगा.
सीटीआई द्वारा उठाई गई बहस ने मौजूदा बहु-शहरी टूर्नामेंट प्रारूप से जुड़े संसाधनों और लॉजिस्टिक खर्चों पर सवाल खड़े किए हैं. आईपीएल का आयोजन भारत के 11 अलग-अलग मैदानों पर हो रहा है, जहां बड़ी मात्रा में ऊर्जा, ईंधन और संसाधनों की खपत हो रही है.
आईपीएल के दौरान दस टीमें देशभर में लगातार यात्रा करती हैं. सीटीआई की याचिका में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, टीमें यात्रा के लिए अक्सर बोइंग 737 या एयरबस A320 जैसे चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल करती हैं. पूरे टूर्नामेंट के दौरान दसों टीमों द्वारा औसतन दस-दस प्रमुख हवाई यात्राएं करने पर केवल टीमों की आवाजाही में ही अनुमानित 5 लाख से 7 लाख लीटर एविएशन फ्यूल खर्च होता है.
दिन-रात वाले मैचों के कारण स्टेडियमों में भारी मात्रा में रोशनी की जरूरत होती है. आधुनिक क्रिकेट स्टेडियम हाई-डेफिनिशन प्रसारण मानकों को पूरा करने के लिए हाई-इंटेंसिटी फ्लडलाइट सिस्टम का उपयोग करते हैं. 74 मैचों के पूरे टूर्नामेंट में फ्लडलाइट्स पर बिजली की खपत लगभग 3,70,000 से 10,65,600 किलोवॉट-घंटे तक पहुंचती है. इसमें स्टेडियम के अन्य संचालन, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स में एयर कंडीशनिंग और ब्रॉडकास्टिंग प्रोडक्शन ट्रकों की ऊर्जा खपत शामिल नहीं है, जो कुल मांग को लगभग दोगुना कर देती है.
दर्शकों की आवाजाही और स्टेडियम संचालन को शामिल करने पर यह लॉजिस्टिक बोझ और बढ़ जाता है. हर मैच में औसतन 30,000 से 65,000 दर्शक स्टेडियम पहुंचते हैं. 74 मैचों के दौरान हजारों दर्शकों द्वारा निजी वाहनों, सार्वजनिक परिवहन और कैब सेवाओं के इस्तेमाल से स्थानीय स्तर पर ईंधन की खपत में काफी बढ़ोतरी होती है.
सीटीआई का कहना है कि आईपीएल को पूरी तरह रद्द किए बिना भी इन पर्यावरणीय और संसाधन संबंधी दबावों को कम किया जा सकता है. कोविड-19 महामारी के दौरान बीसीसीआई ने सफलतापूर्वक मैचों को बिना दर्शकों के आयोजित किया था और टूर्नामेंट को एक सीमित भौगोलिक क्षेत्र- जैसे मुंबई-पुणे क्लस्टर या संयुक्त अरब अमीरात तक सीमित रखकर हवाई यात्रा को लगभग खत्म कर दिया था.
बाकी बचे मैचों को कई स्टेडियम वाले किसी एक महानगरीय केंद्र में आयोजित करने से देशभर में चार्टर्ड उड़ानों की आवश्यकता खत्म हो जाएगी और एविएशन फ्यूल की खपत लगभग शून्य के करीब पहुंच सकती है. इसके अलावा, बिना दर्शकों के मैच कराने से नगर प्रशासन पर दबाव, सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत और दर्शकों की यात्रा से होने वाले प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी.
हालांकि इन बदलावों का असर टिकट बिक्री और स्थानीय स्टेडियम अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, लेकिन लॉजिस्टिक रूप से यह संभव है. साथ ही, यह पश्चिम एशिया संकट को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा की गई सादगी की अपील के अनुरूप भी होगा. लेकिन फिलहाल आईपीएल का मौजूदा बहु-शहरी कार्यक्रम तय योजना के अनुसार जारी रहने की संभावना है.
