नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार (18 मई) को नागरिकता नियम, 2009 में प्रस्तावित बदलावों का मसौदा अधिसूचित किया. नए नियमों के अनुसार, आवेदकों को यह घोषित करना होगा कि उनके पास पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश द्वारा जारी पासपोर्ट है या नहीं, और ऐसे पासपोर्ट उन्हें जमा भी करने होंगे.
गृह मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 में 2009 के नियमों की अनुसूची-आईसी में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है. इसके तहत आवेदकों को यह बताना अनिवार्य होगा कि उनके पास इन तीन देशों में से किसी का वैध या समाप्त हो चुका पासपोर्ट है या नहीं.
जिन आवेदकों के पास ऐसे पासपोर्ट हैं, उन्हें पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख और जगह, और समाप्त होने की तारीख सहित पूरी जानकारी देनी होगी. उन्हें भारतीय नागरिकता मंज़ूर होने के 15 दिनों के भीतर संबंधित डाक के वरिष्ठ अधीक्षक या डाक अधीक्षक को अपना पासपोर्ट सरेंडर भी करना होगा.
अधिसूचना में कहा गया है कि ये नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू होंगे.
मालूम हो कि सीएए 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश करने वाले तीन देशों के छह गैर-मुस्लिम समुदायों को नागरिकता की सुविधा देता है.
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस संशोधन का उद्देश्य नागरिकता से जुड़े मामलों में सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करना और रिकॉर्ड बनाए रखना है. गृह मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक ओवरसीज़ सिटिजन ऑफ इंडिया (ई-ओसीआई) कार्ड, ऑनलाइन आवेदन प्रणाली और नाबालिगों के दोहरे पासपोर्ट संबंधी नियमों को भी अधिक सख्त बनाया है.
यह ध्यान देने योग्य है कि यह राजपत्र अधिसूचना पश्चिम बंगाल में चुनाव समाप्त होने के बाद जारी की गई है, जहां मतुआ समुदाय – बांग्लादेश से दशकों पहले आए दलित हिंदुओं का एक बड़ा समूह – के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं. मतुआ समुदाय को भाजपा का एक प्रमुख समर्थक वर्ग माना जाता है.
द वायर ने पहले भी रिपोर्ट किया है कि उत्तर 24 परगना और नदिया जैसे जिलों में भाजपा द्वारा संचालित सीएए सहायता शिविर लगाए गए थे, जहां कार्यकर्ता आवेदकों को सीएए फॉर्म भरने, अपलोड करने और सहायक दस्तावेज एकत्र करने में मदद कर रहे थे.
इस रिपोर्ट में मतुआ समुदाय के कुछ सदस्यों द्वारा जताई गई उन चिंताओं का भी ज़िक्र किया गया था, जिनमें उन्हें अपनी बांग्लादेशी मूल की पहचान ज़ाहिर करने और आवेदन प्रक्रिया में सहायता के लिए शुल्क चुकाने को कहा जा रहा था.
