कश्मीर: जेकेपीसी नेता सज्जाद लोन घर में नज़रबंद, पिता की क़ब्र पर जाने से रोका गया

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने कहा है कि उसके प्रमुख सज्जाद लोन को घर में नज़रबंद कर दिया गया है; अन्य वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं और उन्हें पार्टी के संस्थापक अब्दुल गनी लोन की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए श्रीनगर स्थित शहीद मज़ार जाने की अनुमति नहीं दी गई.

सजाद लोन के आवास के बाहर पुलिस की मौजूदगी. (फोटो: X@JKPCOfficial

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (जेकेपीसी) ने गुरुवार (21 मई) को कहा कि उसके अध्यक्ष और हंदावाड़ा के विधायक सज्जाद लोन को उनके पिता और पार्टी के संस्थापक अब्दुल गनी लोन की पुण्यतिथि पर नज़रबंद कर दिया गया है.

पार्टी ने कहा कि अन्य वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. आरोप लगाया गया कि उनमें से कई को पार्टी संस्थापक की 24वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए डाउनटाउन श्रीनगर स्थित शहीदों के कब्रिस्तान जाने की अनुमति नहीं दी गई.

पार्टी द्वारा अपने एक्स हैंडल पर साझा की गई कुछ तस्वीरों में श्रीनगर के चर्च लेन स्थित ‘वीआईपी 4’ कॉटेज के मुख्य द्वार पर कंटीले तारों की घेराबंदी दिखाई गई है. यह सरकारी आवास है, जहां जेकेपीसी अध्यक्ष अपने परिवार के साथ रहते हैं.

तस्वीरों में जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक गाड़ी भी दिखाई दे रही है, जो कॉटेज तक जाने वाले रास्ते को रोके हुए है. गाड़ी के अंदर वर्दी पहने कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद हैं.

पार्टी ने नज़रबंदी की निंदा करते हुए अपने बयान में कहा, ‘एक ऐसे नेता को श्रद्धांजलि देने से हमें रोकना, जिन्हें उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता और बलिदान के लिए याद किया जाता है, दुर्भाग्यपूर्ण, अलोकतांत्रिक और बेहद असंवेदनशील है. ऐसे कदम जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर करते हैं.’

अब्दुल गनी लोन की 21 मई, 2002 को आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी. यह घटना हुर्रियत कॉन्फ्रेंस द्वारा आयोजित एक रैली के दौरान हुई थी, जिसका मकसद कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज़ उमर फारूक के पिता मीरवाइज़ मौलवी मोहम्मद फारूक को श्रद्धांजलि देना था. मीरवाइज़ मौलवी मोहम्मद फारूक की भी ठीक इसी तरह 12 साल पहले इसी दिन गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

लोन के परिवार में उनके दो बेटे और एक बेटी हैं. उन्हें श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में स्थित ईदगाह के ‘शहीद मज़ार’ में दफनाया गया है.

यह पहली बार है जब लोन, जिन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘बड़ा भाई’ कहा था, को उनके पिता की कब्र पर जाने से रोका गया है. वह जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं में से एक थे, जिन्हें 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद एहतियाती हिरासत में रखा गया था.

2015 में लोन को दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सरकार में भाजपा कोटे से मंत्री बनाया गया था.

उसी वर्ष उन्हें इंडिया फाउंडेशन द्वारा ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया. यह संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा एक थिंक टैंक मानी जाती है. एक बयान में आयोजकों ने कहा था कि लोन ‘दिवंगत डॉ. मुखर्जी द्वारा अपनाए गए मूल्यों का प्रतीक हैं.’

इस वर्ष की शुरुआत में सज्जाद लोन केंद्र शासित प्रदेश के पहले मुख्यधारा के राजनेता बने, जिन्होंने खुलकर कश्मीर घाटी को जम्मू क्षेत्र से अलग करने की वकालत की. यह मांग कुछ जम्मू-कश्मीर और भाजपा नेताओं द्वारा पहले भी उठाई गई थी, लेकिन पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इसे खारिज कर दिया था.

जनवरी में दिए गए अपने बयान में उन्होंने कहा था, ‘शायद अब सौहार्दपूर्ण अलगाव का समय आ गया है. यह केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं है. जम्मू अब कश्मीरियों को निशाना बनाने का प्रतीकात्मक हथियार बन गया है. मेरा मानना है कि कश्मीर के लोग भी अब इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते.’