वाराणसी नगर निगम का निर्णय- शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मांस, मछली की दुकानें

वाराणसी नगर निगम ने शहर के भीतर संचालित मीट-मांस और मछली की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का फ़ैसला लिया है. नगर आयुक्त का कहना है कि इससे निवासियों को होने वाली असुविधा कम होगी, हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि इस फ़ैसले से व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों को ही काफ़ी परेशानी होगी.

वाराणसी का गंगा घाट. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: वाराणसी नगर निगम ने शहर के भीतर संचालित मीट-मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का फैसला लिया है.

द टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, अधिकारियों ने रविवार (7 जून) को बताया कि वाराणसी नगर निगम ने ‘शहर के प्रबंधन और स्वच्छता को बेहतर बनाने की कोशिशों’ के तहत शहर की सीमा के अंदर चल रही सभी मीट और मछली की दुकानों को शहर के बाहरी इलाकों में तय जगहों पर स्थानांतरित करने का फ़ैसला किया है.

इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार को मैदागिन स्थित टाउन हॉल बिल्डिंग में मेयर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में नगर निगम की गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई, जिसमें इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई.

श्रीवास्तव ने बताया कि इस बैठक में शहर के विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें सदस्यों ने मीट और मछली बाज़ारों को व्यवस्थित ढंग से शहर के बाहरी इलाकों में स्थानांतरित करने की योजना का समर्थन किया.

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सदन को सूचित किया कि परियोजना के पहले चरण में पांच स्थानों की पहचान की गई है. उन्होंने कहा कि निवासियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए ये साइटें शहर की बाहरी सीमाओं के पास बनाई गई हैं.

अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत, अभी शहर के अंदर चल रही मांस और मछली की दुकानों को आने वाले दिनों में रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर में स्थानांतरित किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद साफ़-सफ़ाई को बेहतर बनाना और ऐसे बाज़ारों के कामकाज को सुव्यवस्थित करना है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों की इन बाज़ारों तक पहुंच बनी रहे.

श्रीवास्तव ने बताया कि अभी शहर की सीमा के भीतर लगभग 350 से 400 मीट और मछली की दुकानें चल रही हैं.

बैठक के दौरान, पार्षद गुलशन अली ने कहा कि मीट और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लगभग एक साल पहले लाया गया था, लेकिन इसे अभी तक प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है.

व्यापारियों की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए अली ने कहा कि श्रावण महीने में मीट की दुकानों के सालाना बंद रहने से मीट के कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ता है.

इस पर नगर आयुक्त ने भरोसा दिलाया कि स्थानों का चयन हो चुका है और जल्द ही योजना को धरातल पर उतारा जाएगा.

वहीं, महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि अगले छह महीनों के भीतर शहर के अंदर संचालित मीट-मांस और मछली की दुकानों को बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

निगम के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नाथूपुर में मीट की दुकान चलाने वाले अशरफ़ ने कहा कि मांस और मछली की दुकानों को शहर के बाहर ले जाने से व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों को ही काफ़ी परेशानी होगी.

उन्होंने कहा कि लोगों को रोज़मर्रा की खरीदारी के लिए शहर से बाहर जाना पड़ेगा, जिससे समय और पैसे, दोनों का ही अतिरिक्त खर्च होगा.

उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि प्रशासन व्यापारियों और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कोई व्यावहारिक समाधान निकाले.’