नई दिल्ली: भारतीय चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की संस्थापक ममता बनर्जी और पार्टी विधायक ऋतब्रत बनर्जी से यह साबित करने के लिए 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक जवाब और संबंधित दस्तावेज़ मांगे हैं कि दोनों में से किसका गुट ‘असली’ टीएमसी है.
टीएमसी में यह विभाजन इसी साल हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हार के कुछ समय बाद सामने आया.
पूर्व में ऋतब्रत बनर्जी पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद रह चुके हैं. बाद में वह टीएमसी में शामिल हुए और हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए. जून की शुरुआत में उन्होंने विधानसभा में टीएमसी की विधायी पहचान पर दावा पेश किया.
3 जून को ऋतब्रत बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस को एक पत्र सौंपकर खुद को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा. यह कदम पार्टी की उस आधिकारिक घोषणा के विपरीत था, जिसमें ममता बनर्जी के करीबी शोवनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष चुना गया था. ऋतब्रत के पत्र पर टीएमसी के 59 विधायकों के हस्ताक्षर थे, जो विधानसभा में अलग विधायी पहचान के लिए आवश्यक दो-तिहाई संख्या से अधिक हैं.
ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों ने ही अपने-अपने गुट की ओर से टीएमसी की ‘राष्ट्रीय कार्यकारिणी’ के सदस्यों की सूची निर्वाचन आयोग को सौंपी है.
ममता बनर्जी ने खुद को पार्टी की अध्यक्ष बताया है, जबकि ऋतब्रत गुट ने इस पद के लिए अरूप रॉय का नाम प्रस्तावित किया है. ऋतब्रत गुट की सूची में न तो ममता बनर्जी का नाम है और न ही उनके भतीजे तथा पार्टी के दूसरे सबसे बड़े ओहदे के नेता सांसद अभिषेक बनर्जी का.
दोनों गुट पार्टी के चुनाव चिह्न और वित्तीय संसाधनों पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं. इस बीच टीएमसी का बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है.
2 जुलाई को ऋतब्रत बनर्जी ने नौ विधायकों और एक पूर्व मंत्री के साथ चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की.
बांग्ला दैनिक आनंदबाजार पत्रिका के अनुसार, बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, ‘किसी तरह के विवाद का सवाल ही नहीं है. पार्टी के दो-तिहाई विधायक हमारे साथ हैं. पूर्व मंत्री हमारे साथ हैं. पार्षद हमारे साथ हैं और जिला परिषदों के सदस्य भी हमारे साथ हैं.’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ऋतब्रत गुट से मुलाकात के बाद दोनों पक्षों को यह नोटिस जारी किया. अंतिम फैसला चुनाव आयोग को ही लेना है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि निर्णय कब तक आएगा.
माना जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी के गुट को पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार का समर्थन प्राप्त है.
