नई दिल्ली: संसद मार्च के दौरान सोमवार (20 जुलाई) को हुई पुलिस कार्रवाई के बाद घायल और हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पीटीआई के मुताबिक, दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद मार्च के दौरान 118 पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए. पुलिस ने करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की भी पुष्टि की है.
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया, सरकारी वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है.
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का दावा है कि 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
इस बीच, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को दावा किया कि पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई वह थानों में जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहले उन्हें सूचना मिली थी कि मंदिर मार्ग थाने में 11 युवाओं को रखा गया है, लेकिन वहां पहुंचने पर 17 लोगों के हिरासत में होने की जानकारी मिली। उनके अनुसार, इनमें से छह को संसद मार्ग थाने ले जाया गया, जबकि बाकी की रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि अशोक विहार थाने से 60 प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया है।
अस्पतालों में कितने घायल पहुंचे?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई में घायल हुए कम से कम 38 लोगों को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और करीब 65 लोगों को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि घायलों में फ्रैक्चर, सिर और आंखों में चोट तथा आंसू गैस के कारण सूजन जैसी समस्याएं देखी गईं.
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब नई दिल्ली जिले में इंटरनेट सेवाएं बंद थीं. संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर कई स्थानों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए. जंतर-मंतर, पटेल चौक, इंडिया गेट और कनॉट प्लेस सहित कई इलाकों में घंटों तक कार्रवाई चलती रही. हालांकि दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है.
एनएचआरसी ने बच्ची के घायल होने के आरोपों पर मांगी जांच
इंडिया टुडे के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 12 वर्षीय एक बच्ची के प्रदर्शन के दौरान घायल होने के आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं.
आयोग ने अधिकारियों को बच्ची का पता लगाकर उसका इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. आयोग ने कहा है कि यदि बाल संरक्षण कानूनों का उल्लंघन पाया जाता है तो किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए. साथ ही बच्ची के साथ कथित मारपीट के आरोपों की भी जांच होगी. यदि सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी झूठी पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर भी विचार करने को कहा गया है.
सीजेपी का दावा है कि गीतांजलि नाम की 12 वर्षीय बच्ची के सिर में चोट लगी और 40-50 अन्य प्रदर्शनकारी भी गंभीर रूप से घायल हुए. दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक बताया है.
नड्डा से मुलाकात, लेकिन फैसला नहीं
संसद मार्च के दौरान ही सीजेपी के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रखी.
सीजेपी नेताओं के अनुसार, नड्डा ने उनकी मांगों पर सरकार के भीतर चर्चा करने का आश्वासन दिया है, लेकिन सोमवार देर शाम तक कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला था.
सीजेपी ने नड्डा के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सोनम वांगचुक को अस्पताल से रिहा किया जाना और कथित नीट आत्महत्या मामलों से प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा.
सीजेपी ने संसद मार्च रोका, आंदोलन जारी रहेगा
मंगलवार को भी जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग जुटे और हल्की बारिश के बीच प्रदर्शन जारी है. रॉयटर्स के अनुसार, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन अब दोबारा संसद मार्च नहीं करेगा क्योंकि वह नहीं चाहता कि और युवाओं को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़े. उन्होंने विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित मारपीट के लिए खेद जताते हुए समर्थकों से माफी भी मांगी.
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि जब युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए तो उन्हें लाठियों और हिरासत का जवाब मिला, जबकि पेपर लीक के आरोपी खुले घूम रहे हैं.
उधर, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने मंगलवार को कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और माहौल को खराब नहीं किया जाना चाहिए.
