इस्तीफ़े की मांग के बीच पहली बार बोले धर्मेंद्र प्रधान, कांग्रेस पर साधा निशाना; पद छोड़ने के संकेत नहीं

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उनके इस्तीफ़े की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच कई सप्ताह बाद पहली बार प्रतिक्रिया दी है. हालांकि, उन्होंने अपना पद छोड़ने के कोई संकेत नहीं दिए. इसके बजाय उन्होंने कांग्रेस पर ‘छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल’ करने का आरोप लगाया है.

21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान. (फोटो: पीटीआई/शहबाज़ खान)

नई दिल्ली: दिल्ली में वर्षों के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार उनके इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है.

हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे के कोई संकेत नहीं दिए. इसके बजाय उन्होंने कांग्रेस पर ‘छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल’ करने का आरोप लगाया.

मंगलवार (21 जुलाई) रात एक्स पर जारी एक बयान में प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए धरने की आलोचना की. उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन से ‘आम जनता को असुविधा हुई और स्थापित सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी की गई.’


प्रधान ने लिखा कि राहुल गांधी और कांग्रेस ‘संसद सत्र के दौरान छात्रों का बेशर्मी से राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल कर अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.’ राहुल गांधी ने कहा था कि उनका धरना सोमवार को मध्य दिल्ली में युवा प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस हिंसा के विरोध में था, लेकिन फिर यह प्रदर्शन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया था.

प्रधान ने सरकार के उस रुख को भी दोहराया कि कांग्रेस ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने के सरकार के आश्वासन को ठुकराकर धरना देने का रास्ता चुना. उन्होंने एक्स पर लिखे अपने पोस्ट में कहा कि कांग्रेस ने ‘लोकतांत्रिक बहस के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन को चुना’ और वह ‘छात्रों के समाधान’ के बजाय ‘सुर्खियां बटोरने’ और ‘टकराव’ की राजनीति कर रही है.

उन्होंने कहा कि देश के छात्र जवाबदेही के हकदार हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या वह इस्तीफा देंगे.

ज्ञात हो कि बीते मई में नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के बाद से उनके इस्तीफे की मांग लगातार तेज होती गई है. पिछले तीन वर्षों में यह दूसरी बार था जब परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई, जिसके बाद करीब 20 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी.

अपने बयान में प्रधान ने कहा, ‘छात्र अराजकता नहीं, बल्कि निश्चितता के हकदार हैं. वे नारों नहीं, समाधान के हकदार हैं और अव्यवस्था नहीं, बल्कि जवाबदेही के हकदार हैं. हमारे छात्रों का अधिकार केवल आक्रोश नहीं, बल्कि जवाब, सुधार और जवाबदेही है. हमारी सरकार इन्हीं चीजों को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.’

धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान उनके इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन पर अब तक की सबसे विस्तृत प्रतिक्रिया है. इस आंदोलन ने तब नया जोर पकड़ा, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन में आमरण अनशन शुरू किया.

सोमवार को सीजेपी और वांगचुक की अपील पर हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने निकले थे. इस दौरान दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे, जिसकी व्यापक आलोचना हो रही है.

वांगचुक के अनशन शुरू करने से पहले धर्मेंद्र प्रधान ने सीजेपी को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ बताया था. व्यंग्य के तौर पर शुरू हुए इस संगठन ने मई में गठन के कुछ दिनों बाद ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी थी.

इस बीच, राहुल गांधी ने न केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है, बल्कि सोमवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस की हिंसक कार्रवाई का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी इस्तीफा देने की मांग की है.


मंगलवार को मोदी सरकार ने राहुल गांधी पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने संसद में चर्चा के साथ-साथ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जोड़कर अपने वादे से पीछे हटने का काम किया है. इसके जवाब में कांग्रेस ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और छात्र क्या मांग करेंगे, यह तय करने का अधिकार किसी और को नहीं है.