नई दिल्ली: हरियाणा की रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख बलात्कार के दोषी गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 21 दिन की फरलो पर जेल से रिहा कर दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस ने एक सूत्र के हवाले से बताया है कि गुरमीत राम रहीम को मंगलवार (25 अगस्त) सुबह 6:05 बजे जेल से रिहा किया गया और उनके इस फरलो की अवधि के दौरान सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहने की संभावना है.
उल्लेखनीय है कि बलात्कार के मामले में अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से राम रहीम को अब तक पैरोल या फरलो पर 16 बार जेल से रिहा किया जा चुका है. मौजूदा रिहाई के साथ यह उनकी 17वीं अस्थायी रिहाई है.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राम रहीम की यह लगातार तीसरी अस्थायी रिहाई है, जिसके दौरान उन्हें सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहने की अनुमति दी गई है. अन्य अवसरों पर वह उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित अपने आश्रम में रहे हैं.
मालूम हो कि मंगलवार को ताज़ा 21 दिनों की फरलो के साथ ही डेरा प्रमुख ने इस साल की अपनी फरलो की पूरी अवधि का इस्तेमाल कर लिया है. वह इससे पहले अपनी 10 सप्ताह की पैरोल की पूरी अवधि का इस्तेमाल भी कर चुके हैं.
बता दें कि जेल नियमावली के अनुसार, एक दोषी एक कैलेंडर वर्ष में 70 दिन की पैरोल और 21 दिन की फरलो का हकदार होता है. ये विशेषाधिकार कई कारकों की जांच करने के बाद राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करते हैं.
मालूम हो कि फरवरी 2024 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से कहा था कि राम रहीम को अदालत की अनुमति के बिना पैरोल नहीं दी जा सकती. यह आदेश उनके 50 दिनों की रिहाई दिए जाने के एक महीने बाद आया था. तब यह पिछले 24 महीनों में उनकी सातवीं पैरोल और चार वर्षों में नौवीं अस्थायी रिहाई थी.
इसके बाद अगस्त 2024 में हाईकोर्ट ने कहा था कि राम रहीम की अस्थायी रिहाई की अर्जी पर 2022 के कानून के प्रावधानों के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा बिना किसी ‘पक्षपात या मनमानेपन’ के फैसला किया जाएगा. पीठ ने उनकी फरलो की अर्जी पर फैसला लेने का अधिकार हरियाणा जेल विभाग पर छोड़ दिया था.
मई में राम रहीम को 30 दिनों की पैरोल दी गई थी और वह 26 जून को सुनारिया जेल लौट आए. जनवरी में भी उन्हें 40 दिनों की पैरोल पर रिहा किया गया था.
साल 2025 में उन्हें अगस्त में अपना जन्मदिन मनाने के लिए 40 दिनों की पैरोल मिली थी. इससे पहले अप्रैल 2025 में उसे 21 दिनों की फरलो और जनवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले 30 दिनों की पैरोल दी गई थी.
बता दें कि फरलो आमतौर पर कैदी के जेल में निर्धारित अवधि पूरी करने के बाद बिना किसी विशेष कारण के दी जा सकती है, जबकि पैरोल किसी जरूरी मांग या विशेष आवश्यकता के आधार पर दी जाती है.
गौरतलब है कि 2017 में पंचकुला की एक अदालत ने गुरमीत राम रहीम को अपनी दो शिष्याओं से बलात्कार के लिए 20 साल की सजा सुनाई थी. वह 2017 से हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं. जज ने उन्हें प्रत्येक पीड़िता को 15 लाख रुपये का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया था.
डेरा प्रमुख को पूर्व मैनेजर रंजीत सिंह और पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामलों में भी भी 2019 में दोषी ठहराया गया था, लेकिन इन दोनों ही मामलों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है.
मालूम हो कि रामचंद्र छत्रपति सिरसा के सांध्य दैनिक ‘पूरा सच’ के संपादक थे. एक साध्वी के साथ हुए रेप की खबर प्रकाशित करने के कुछ महीने बाद ही छत्रपति को अक्तूबर 2002 में गोली मार दी गई थी.
छत्रपति के परिवार ने 2003 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख़ कर यह मामला सीबीआई को सौंपने की मांग की थी. इसकी जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई. जांच एजेंसी ने जुलाई, 2007 में आरोपपत्र दाखिल किया था और 2019 में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था, जिसे इस साल मार्च में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आंशिक संशोधन करते हत्या मामले में राम रहीम को बरी कर दिया.
हाईकोर्ट के फैसले को राम चंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने ‘बड़ा झटका’ बताते हुए कहा था कि वे इसके ख़िलाफ़ सर्वोच्च न्यायालय का रुख़ करेंगे.
