मंगलुरु: महाराष्ट्र के अमरावती स्थित ज़िला महिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में 24 अगस्त (सोमवार) तड़के आग लगने से तीन नवजात बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई. आग में घायल बताए जा रहे छह अन्य नवजातों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया.
घटना के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. हालांकि, अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने शुरुआती टिप्पणियों में दावा किया है कि एनआईसीयू के अंदर एक वेंटिलेटर में विस्फोट हुआ था और कमरे में रखे ऑक्सीजन सिलेंडरों के कारण आग और अधिक भड़क गई.
घटना के तुरंत बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की जांच की घोषणा की. उन्होंने कहा कि घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है. उन्होंने मृत नवजातों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की.
अमरावती येथील जिल्हा स्त्री रुग्णालयात काल रात्री लागलेल्या आगीत तीन बालकांचा मृत्यू झाल्याची घटना अतिशय दुःखद आणि हृदयद्रावक आहे. त्यांच्या कुटुंबियांच्या दुःखात आम्ही सहभागी आहोत.
या घटनेची उच्चस्तरीय चौकशी करण्याचे आदेश आरोग्य प्रशासनाला देण्यात आले आहेत. या घटनेतील दोषींवर…— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) August 24, 2026
घटना का विवरण देते हुए जिला महिला अस्पताल के डॉ. विनोद पवार ने मीडिया को बताया कि करीब सुबह 3:30 बजे उन्हें फोन आया, जिसके बाद वह तुरंत अस्पताल पहुंचे.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मुझे बताया गया कि एनआईसीयू के आउटबॉर्न सेक्शन में आग लग गई है. जब मैं वहां पहुंचा, तब तक नर्सें छह बच्चों को बाहर निकाल चुकी थीं. तीन और बच्चे अंदर फंसे हुए थे, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि हम अंदर नहीं जा सके.’
अमरावती के जिलाधिकारी आशीष येरेकर के अनुसार, अस्पताल में नियमित रूप से अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराए जाते रहे हैं और इस साल के ऑडिट के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इलेक्ट्रिकल विंग में आवेदन भी किया गया था.
अमरावती में मीडिया से बातचीत में येरेकर ने कहा, ‘नहीं, पिछले साल का फायर ऑडिट कराया गया था… मैंने खुद दस्तावेज देखे हैं, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि फायर ऑडिट नहीं हुआ था. फायर ऑडिट नियमित रूप से कराए जाते रहे हैं.’
मालूम हो कि जिला महिला अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज आते हैं. घटना के समय एनआईसीयू में कम से कम 39 नवजात भर्ती होने की जानकारी है.
महाराष्ट्र में अस्पतालों में आग की घटनाएं होती रही हैं
महाराष्ट्र में किसी अस्पताल में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है. अमरावती की हालिया घटना राज्य में अस्पतालों में आग लगने की बार-बार सामने आती रही घटनाओं की कड़ी का हिस्सा है. राज्य में गंभीर चिकित्सा इकाइयों में शॉर्ट सर्किट, उपकरणों में खराबी और बिजली के अत्यधिक गर्म होने जैसी घटनाएं बार-बार लोगों की जान लेती रही हैं.
जनवरी 2021 में आधी रात के आसपास एक बीमार नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भीषण आग लग गई थी. इसमें गंभीर रूप से झुलसने और धुएं से दम घुटने के कारण 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई थी. अमरावती की घटना की तरह उस वार्ड में भी 17 नवजात भर्ती थे और आग लगने का कारण बिजली शॉर्ट सर्किट बताया गया था.
उसी वर्ष नवंबर में अहिल्यानगर (तत्कालीन अहमदनगर) जिला सिविल अस्पताल के विशेष कोविड-19 गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भीषण आग लग गई थी. इसमें 11 वयस्क मरीजों की मौत हुई थी और कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए थे. आग का मूल कारण एयर कंडीशनिंग सिस्टम या चिकित्सा उपकरणों में हुआ बिजली शॉर्ट सर्किट बताया गया था.
मार्च 2021 में मुंबई के भांडुप में एक अन्य घटना में निजी अस्पताल के भीतर आग लगने से 11 लोगों की मौत हो गई थी. सभी मरीज आईसीयू में भर्ती थे और वेंटिलेटर पर थे, जिसके कारण वे बाहर नहीं निकल सके.
इसी तरह 22 अप्रैल 2021 को ठाणे जिले के मुंब्रा में एक अन्य निजी अस्पताल, प्राइम क्रिटिकेयर अस्पताल, के मीटर रूम में शॉर्ट सर्किट के बाद आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई थी. उसी दिन नासिक के एक कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन टैंक से रिसाव के कारण 22 मरीजों की मौत हो गई थी.
लगातार सामने आई इन आग की घटनाओं के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने राज्यस्तरीय सर्कुलर जारी किया था. इसमें अस्पताल प्रशासन को स्थानीय पीडब्ल्यूडी या अग्निशमन विभाग की जांच के दौरान सामने आने वाली किसी भी खामी को तत्काल दूर करने में विफल रहने पर व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने का प्रावधान किया गया था.
इन ऑडिट के बावजूद अमरावती में आग लगने की घटना से विपक्ष नाराज है.
कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता विजय वडेट्टीवार ने एक्स पर लिखा, ‘अगर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, उपकरणों की नियमित जांच और ऑक्सीजन और बिजली प्रणालियों के रखरखाव में लापरवाही हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? निर्दोष लोगों की जान जाने के बाद जांच का नाटक करने की जरूरत नहीं है; जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.’
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी जांच और राज्य के सभी अस्पतालों का व्यापक ऑडिट कराने की मांग की है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. साथ ही, महाराष्ट्र के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर ऑडिट और मेडिकल उपकरणों का सेफ्टी ऑडिट कराने की भी जरूरत है.’
