नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने बुधवार (2 सितंबर) सुबह नेहरू पार्क में मॉर्निंग वॉक के दौरान वरिष्ठ सेवानिवृत्त नौकरशाह आशीष जोशी को अपने साथ ले जाकर करीब 10 घंटे तक पूछताछ की. द वायर इसकी पुष्टि कर सकता है.
आखिरकार शाम को उन्हें घर जाने दिया गया और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन्हें घर छोड़ने गई.
जोशी इंडियन पोस्ट एंड टेलीकम्युनिकेशन अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विस के 1992 बैच के अधिकारी हैं. वह 31 मार्च 2026 को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे. सोशल मीडिया पर वह नरेंद्र मोदी सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं.
जोशी के एक दोस्त ने, जो पुलिस द्वारा उन्हें अपने साथ ले जाए जाने का प्रत्यक्षदर्शी भी थे, द वायर को बताया कि शायद गृहमंत्री अमित शाह के ‘खिलाफ’ उनकी किसी पोस्ट के कारण उनसे पूछताछ की गई.
तुरंत यह पता नहीं चल पाया कि पुलिस किस ट्वीट के बारे में उनसे पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन 13 अगस्त, 2026 को उनकी एक पोस्ट से सरकार इतनी नाराज हुई थी कि उसने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) को भारत में उस पोस्ट को रोकने का आदेश दिया था.

जोशी के दोस्त ने द वायर को बताया, ‘हम करीब 8:40 बजे नेहरू पार्क में लेनिन की प्रतिमा के नीचे बैठे थे. मैं पानी पीने के लिए कुछ देर के लिए वहां से चला गया. कुछ मिनट बाद जब वापस लौटा तो मैंने देखा कि दो युवक जोशी की ओर आ रहे थे और फिर उनसे बात करने लगे.’
उन्होंने बताया कि दोनों ने अपना परिचय न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों के रूप में दिया. उनके हाथ में एक फोल्डर भी था.
दोस्त के मुताबिक, अधिकारियों ने जोशी से कहा, ‘आपने गृहमंत्री के खिलाफ ट्वीट किया है और हमें डीसीपी चंद्रा और एसीपी कुशवाहा ने आपको पूछताछ के लिए साथ लाने का आदेश दिया है.’
इस दोस्त, जिसने इस खबर के लिए अपना नाम न छापने का अनुरोध किया- ने आगे बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों में से एक से पूछा कि वे जो भी सवाल पूछना चाहते हैं, उन्हें पार्क में ही क्यों नहीं पूछ सकते, तो अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने जोशी की लोकेशन पार्क में ट्रेस की थी, क्योंकि पूछताछ के लिए उन्हें स्पेशल सेल ले जाना जरूरी है.
दोस्त ने बताया कि उन्होंने पुलिस से कम-से-कम जोशी को पहले घर जाने देने का अनुरोध किया, ताकि वह अपने ‘कपड़े’ यानी शॉर्ट्स बदल सकें. हालांकि, जोशी ने खुद कहा कि उन्हें इस हालत में जाने में कोई आपत्ति नहीं है.
इसके बाद जोशी और एक पुलिस अधिकारी उनकी कार में बैठकर वहां से चले गए, जबकि दूसरा अधिकारी जापानी दूतावास के पास खड़ी पुलिस की गाड़ी में बैठ गया. दोनों वाहन वहां से रवाना हो गए.
इस पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी दोस्त ने बताया कि बाद में वह अपनी कार से न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने जोशी के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार कर दिया.
जोशी के एक दोस्त के मुताबिक, इस दौरान उनका फोन लगातार बंद रहा और शाम 5:23 बजे ही दोबारा ऑनलाइन हुआ. इसके करीब दो घंटे बाद जोशी ने ट्वीट कर बताया कि वह घर लौट आए हैं.
परिवार को सूचना नहीं देने का आरोप
3 सितंबर को रात 1:31 बजे जोशी ने पोस्ट किया कि उनकी पूछताछ के बारे में उनके परिवार को सूचित नहीं किया गया था.
उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए लिखा: ‘पूछताछ या हिरासत के दौरान किसी व्यक्ति के परिवार को सूचित करना कानूनी अनिवार्यता है, कोई वैकल्पिक शिष्टाचार नहीं.’
उन्होंने कहा, ‘कल, मुझे मॉर्निंग वॉक के बाद यह आश्वासन देकर पूछताछ के लिए ले जाया गया कि इसमें बहुत कम समय लगेगा. हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता गया, मैंने अपनी पत्नी को अपनी स्थिति के बारे में सूचित करने के लिए बार-बार अनुरोध किया, लेकिन संबंधित पुलिस अधिकारियों ने बस इतना कहा कि वे ‘निर्देशों का पालन कर रहे हैं.’
‘मुझे शाम 6:38 बजे ही फोन करने की अनुमति मिली, जिससे मेरा परिवार और दोस्त पूरे दिन घबराहट में रहे.’
उन्होंने कहा, ‘मेरा अनुरोध है कि आप सभी इकाइयों को स्पष्ट निर्देश जारी करें कि वे अधिकारियों को पूछताछ के लिए ले जाए गए किसी भी व्यक्ति के परिवार को तुरंत सूचित करने के कानूनी कर्तव्य का सख्ती से पालन करने का निर्देश दें, ताकि किसी भी नागरिक के परिवार को उस परेशानी का सामना न करना पड़े जो मेरे परिवार ने झेली.’
जोशी ने इसके साथ फैज़ अहमद फ़ैज़ की मशहूर नज़्म ‘हम देखेंगे’ की पंक्तियां भी पोस्ट कीं.
इस खबर के प्रकाशन के समय तक दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स यूनिट को भेजे गए सवाल का भी कोई जवाब नहीं मिला है.
