‘सिर फोड़ दिया, फिर भी जेल नहीं गया’: स्वतंत्र भारद्वाज के दावे के बाद सीजेपी पहुंची थाने, 72 घंटे में गिरफ़्तारी का आश्वासन

हिंदुत्ववादी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट में छात्र प्रदर्शनकारी निशु आज़ाद के पिता का सिर फोड़ने और जेल न जाने के दावे के बाद विवाद बढ़ गया है. सीजेपी ने उनकी गिरफ़्तारी की मांग की है. दिल्ली पुलिस ने चोट को साधारण बताया था, हालांकि शुक्रवार को पुलिस ने 72 घंटे में गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया है.

बाएं से- हिंदुत्ववादी स्वतंत्र भारद्वाज | थाने में सीजेपी के नेता.

नई दिल्ली: हिंदुत्ववादी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली में छात्र प्रदर्शन से जुड़ा पुराना विवाद फिर सुर्खियों में है.

वीडियो में भारद्वाज ने दावा किया कि उसने छात्र प्रदर्शनकारी निशु आजाद के पिता संजय कुमार का सिर फोड़ दिया था और इसके बावजूद उसे जेल नहीं जाना पड़ा, इसके लिए उसने अपने राजनीति संबंधों को कारण बताया.

भारद्वाज ने सत्ताधारी दल भाजपा के कई बड़े नेताओं को ‘बड़ा भाई’ कहकर संबोधित किया.

वीडियो सामने आने के बाद कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की. शुक्रवार, 4 सितंबर को सीजेपी के नेता और समर्थक दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे. उनके साथ यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और बिहार के पूर्णिया में पप्पू यादव भी पहुंचे.

पुलिस ने इससे एक दिन पहले कुमार के सिर की हड्डी टूटने या गंभीर चोट लगने के दावे को गलत बताया था.

पुलिस के मुताबिक, 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में कुमार के सिर पर कड़ा (धातु के) लगने से चोट आई थी. मेडिकल जांच में चोट को ‘साधारण’ बताया गया था.

ध्यान रहे पॉडकास्ट में भारद्वाज अपना कड़ा दिखाते हुए, उससे लोगों पर हमला करने की बात खुद स्वीकार कर रहा है.

पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने क्या कहा?

द कैज़ुअल टॉक नामक यूड्यूब चैनल पर जारी किया गया भारद्वाज का पॉडकास्ट अब वायरल हो चुका है. पॉडकास्ट के एक क्लिप में भारद्वाज संजय कुमार पर हमले की बात करते हुए कहता है, ‘मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया.’ उसने यह भी दावा किया कि कुमार को 7 टांके लगे थे और उनकी हालत गंभीर थी.

भारद्वाज ने कहा कि इस तरह के अपराध का ‘हाफ मर्डर’ माना जाता है, जिसमें पहले आईपीसी की धारा 307 लगती है और इसके बावजूद उसे जेल नहीं जाना पड़ा. उसने कहा, ‘दुनिया को यह पता होना चाहिए. मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा.’

पॉडकास्ट में उससे पूछा गया कि उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. इसके जवाब में उसने अपने राजनीतिक संबंधों का जिक्र किया. उसने दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को अपना ‘बड़ा भाई’ बताया. उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपना ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा कि उसे सभी का समर्थन हासिल है.

भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि कपिल मिश्रा के फोन करने के बाद उसे पुलिस थाने से छोड़ दिया गया. इसी आधार पर सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया.

तस्वीरों का यह कोलाज पत्रकार और फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट किया है.

पॉडकास्ट में भारद्वाज से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में उसके हाथ में दिख रहे डंडे के बारे में भी सवाल किया गया. इस पर उसने दावा किया कि उसके पास दिल्ली पुलिस का जूता है, डंडा है, वह ‘दिल्ली पुलिस की तरह’ ही घूमता है.

वह अपने अन्य कई वीडियो में भी सीजेपी के प्रदर्शनकारियों पर हमले की बात स्वीकार कर चुका है.

पुलिस ने क्या कहा?

पॉडकास्ट के बाद दिल्ली पुलिस ने संजय कुमार के सिर की हड्डी टूटने के दावे को खारिज किया. नई दिल्ली के डीसीपी ने कहा कि 23 जून को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान झड़प हुई थी. इस दौरान गाजियाबाद निवासी 38 वर्षीय कुमार के सिर में चोट लगी.

पुलिस के मुताबिक, चोट एक व्यक्ति के हाथ में पहने कड़े से लगी थी. कुमार को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण हुआ. पुलिस ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में उनकी चोटों को ‘साधारण प्रकृति’ का बताया गया है.

पुलिस ने बताया कि कुमार की शिकायत पर संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज किया गया था. प्रदर्शन स्थल से सूरज कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिया गया था. बाद में दोनों को नोटिस देकर पूछताछ की गई.

पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है तथा जल्द ही सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा.

हालांकि, इंडिया टुडे के मुताबिक, पुलिस ने अब यह भी कहा है कि वायरल पॉडकास्ट को जांच में शामिल किया जाएगा और एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट से जुड़ी धाराएं जोड़ी जाएंगी.

भारद्वाज ने बाद में क्या सफाई दी?

विवाद बढ़ने के बाद भारद्वाज ने अपने पॉडकास्ट में किए गए दावे से अलग स्पष्टीकरण दिया. उसने दावा किया कि उसने संजय कुमार पर जानबूझकर हमला नहीं किया था, बल्कि खुद को बचाने के लिए यानी आत्मरक्षा में ऐसा किया.

उसने कहा कि 10-12 लोगों ने उसे घेर लिया था और उसे डर था कि भीड़ पीट-पीटकर मार सकती है. उसके मुताबिक, इसी दौरान उसने आत्मरक्षा में हाथ चलाया और उसका कड़ा कुमार के सिर पर लग गया.

भारद्वाज ने कहा कि उसके पास घटना का वीडियो भी है और पुलिस की मेडिकल रिपोर्ट से भी पता चलता है कि कुमार को गंभीर चोट नहीं आई थी.

उसने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी ‘फर्जी’ बताया. उसका कहना था कि सोशल मीडिया पर उसके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है और कपिल मिश्रा व चिराग पासवान के बारे में कही गई बातें व्यंग्य में कही गई थीं.

हालांकि, एक अन्य इंटरव्यू में भारद्वाज ने कहा कि अगर उसे दोबारा इसी तरह घेरा गया और हमला करने की कोशिश हुई तो वह फिर अपने कड़े से वार करेगा.

थाने पहुंची सीजेपी ने क्या मांग की?

पॉडकास्ट सामने आने के बाद सीजेपी ने भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी. पार्टी का आरोप है कि पुलिस ने शुरू से ही मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की.

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि पुलिस से हत्या के प्रयास की धारा और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ने की मांग की गई थी, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. उनका दावा है कि प्रदर्शनकारियों से कहा गया कि अगर वे सख्त धाराएं चाहते हैं तो अदालत का आदेश लेकर आएं.

शुक्रवार को सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग थाने पहुंचकर भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की. निशु आजाद भी अपने पिता के साथ थाने पहुंचीं.

प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, पुलिस ने भरोसा दिया कि भारद्वाज को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाएगा. सीजेपी ने यह भी मांग की कि संजय कुमार पर हमले के मामले में हत्या के प्रयास और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी जाएं.

इसके अलावा निशु आजाद को कथित तौर पर ऑनलाइन गालियां देने, धमकियां देने और आपत्तिजनक तस्वीरें प्रसारित करने के मामले में अलग एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की गई. पुलिस ने इस पर भी कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

राहुल गांधी ने मोदी और शाह से पूछे सवाल

वायरल वीडियो के बाद निशु आजाद ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मदद की अपील की. इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा.

उन्होंने सवाल किया कि संजय कुमार पर हमला करने का दावा करने वाला व्यक्ति जेल से बाहर क्यों है और क्या उसे राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है.

राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ दिल्ली पुलिस छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जबकि दूसरी तरफ एक व्यक्ति, जिसके बारे में आरोप है कि उसने एक दलित छात्रा के पिता का सिर फोड़ा, खुलेआम घूम रहा है.

उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पूछा कि ऐसे व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण क्यों मिल रहा है और क्या अब उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

यह मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शन से जुड़ा है. प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार अपने फोन से प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग कर रहे थे. एफआईआर के मुताबिक, इसी दौरान एक युवक से उनका विवाद हुआ. इसके बाद दो-तीन अन्य लोग वहां पहुंचे और कथित तौर पर कुमार के साथ मारपीट की.

कुमार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनके सिर पर कई बार मुक्का मारा गया और किसी कठोर वस्तु से भी हमला किया गया. पुलिस के पहुंचने पर सूरज कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज को पकड़ा गया, जबकि अन्य लोग वहां से चले गए.

एफआईआर में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था.

अब वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज के अपने दावे और उसके बाद दिए गए आत्मरक्षा वाले स्पष्टीकरण ने इस मामले को फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में ला दिया है. एक ओर सीजेपी उसकी गिरफ्तारी और कड़ी धाराएं लगाने की मांग कर रही है, वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि कुमार को गंभीर चोट नहीं आई थी और मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है.