बैंक अधिकारियों के संघ की मांग, पीएनबी घोटाले में आरबीआई की भूमिका की जांच हो

ऑल इंडिया बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन ने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक के बोर्ड में आरबीआई और सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल थे, फिर कैसे उच्चतम स्तर पर सब चलता रहा और आरबीआई मूकदर्शक बना रहा.

(फोटो: रॉयटर्स)

ऑल इंडिया बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन ने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक के बोर्ड  में आरबीआई और सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल थे, फिर कैसे उच्चतम स्तर पर सब चलता रहा और आरबीआई मूकदर्शक बना रहा.

(फोटो: रॉयटर्स)
(फोटो: रॉयटर्स)

 

मुंबई: ऑल इंडिया बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि पीएनबी धोखाधड़ी मामले में इस बैंक के बोर्ड व केंद्रीय बैंक आरबीआई की भूमिकाओं की भी जांच होनी चाहिए.

एसोसिएशन ने एक बयान में कहा है कि पीएनबी मामले में घपला इतने साल तक निर्बाध कैसे चलता रहा यह पता लगाने के लिए पीएनबी के बोर्ड व आरबीआई के स्तर पर संभावित चूकों की जांच भी होनी चाहिए.

उल्लेखनीय है कि पीएनबी इस समय 11,400 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले के कारण चर्चा में है. अनेक एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों ने पंजाब नेशनल बैंक में हुए घोटाले को पकड़ पाने में असफल रहने के लिए विदेशी विनिमय के ऑडिट में निगरानी की कमी के लिए बैंकों के राष्ट्रीय नियामक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को दोष दिया है.

मंगलवार को जारी एक बयान में ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) ने कहा कि विदेशी विनिमय व्यापार करने वाली अधिकृत शाखाओं के विदेशी विनिमय का समय-समय पर ऋणदाता द्वारा और आरबीआई द्वारा ऑडिट होता है.

संघ ने कहा कि एक राष्ट्रीय बैंक की शाखा में सामान्यत: सात ऑडिट होते हैं, आंतरिक ऑडिट, समवर्ती ऑडिट (कॉनकरंट ऑडिट), स्नैप ऑडिट, वसूली (रिकवरी) ऑडिट, सांविधिक ऑडिट (स्टेच्युटरी ऑडिट), बाह्य ऑडिट और स्टॉक ऑडिट.

बयान में कहा गया, ‘अगर पीएनबी ने अपनी केंद्रीय बैंकिंग व्यवस्था (सीबीएस) से स्विफ्ट सिस्टम नहीं जोड़ा, तो इसके लिए पूरे बैंकिंग व्यवस्था को दोष देना बिल्कुल गलत और अन्यायपूर्ण है.’

संघ ने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक के बोर्ड  में बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट के तहत आरबीआई और सरकार के प्रतिनिधि भी थे. जवाहरात और आभूषणों के साथ-साथ विदेशी विनिमय की जोखिम सीमा समय-समय पर इस बोर्ड को रिपोर्ट की जाती है. फिर कैसे उच्चतम स्तर पर सब चलता रहा और आरबीआई मूकदर्शक बना रहा. यह जांच का विषय है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)