यूपी-बिहार कर रहे हैं बाल आश्रय गृहों के सोशल ऑडिट करने का विरोध: बाल संरक्षण आयोग

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सभी राज्यों के बाल आश्रय गृहों के सोशल ऑडिट का आदेश दिया था. बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और दिल्ली भी सोशल ऑडिट का विरोध कर रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ​आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सभी राज्यों के बाल आश्रय गृहों के सोशल ऑडिट का आदेश दिया था. बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और दिल्ली भी सोशल ऑडिट का विरोध कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो: पीटीआई)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकार राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा उनके 316 बाल गृहों में सोशल ऑडिट का विरोध कर रही हैं.

इन संस्थानों में कुल सात हजार से अधिक बच्चे रहते हैं. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है.

एनसीपीसीआर के एक अधिकारी ने बताया कि बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और दिल्ली भी अपने बाल गृहों के सोशल ऑडिट का विरोध कर रहे हैं.

ये जानकारियां ऐसे समय पर सामने आई है जब बिहार और उत्तर प्रदेश में बाल गृहों में लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न के दो भयानक मामले सामने आए हैं.

लड़कियों के यौन उत्पीड़न का मुद्दा सबसे पहले अप्रैल में सुर्खियों में आया था जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने राज्य सामाजिक कल्याण विभाग को बिहार के आश्रय गृहों पर अपनी आडिट रिपोर्ट सौंपी थी.

इसमें मुज़फ़्फ़रपुर के एक आश्रय गृह में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार का मामला सामने आया था. बाद में मेडिकल जांच में बालिका गृह में रह रहीं 42 नाबालिगों में से 34 के साथ बलात्कार होने की पुष्टि हो गई थी.

बलात्कार की शिकार हुई नाबालिगों में से कुछ 7 से 13 साल के बीच की हैं. इस मामले में ब्रजेश ठाकुर नाम के शख्स को बतौर मुख्य आरोपी गिरफ्तार किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस आश्रय गृह का संचालन करने वाले मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति को वित्तीय सहायता देने के लिए बिहार सरकार को आड़े हाथों लिया.

वहीं, दूसरा मामला इसी हफ्ते उत्तर प्रदेश के देवरिया से सामने आया जहां एक बाल गृह से 24 लड़कियों को बचाया गया था. आरोप है कि यहां भी लड़कियों का यौन उत्पीड़न हुआ है. बालिका गृह में 42 लड़कियों का पंजीयन कराया गया है इनमें से 18 लड़कियों के गायब होने की भी सूचना है.

पुलिस ने इस संबंध में तीन लोगों बालिका गृह की अधीक्षिका कंचनलता, संचालिका गिरिजा त्रिपाठी तथा उसके पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ़्तार किया है.

अधिकारी ने कहा कि एनसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट को राज्यों द्वारा सोशल ऑडिट का विरोध करने के बारे में जानकारी दे दी है जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई को कहा था कि ऐसा लगता है कि बाल अधिकार संगठन द्वारा सोशल ऑडिट का विरोध करने वाले राज्य कुछ छिपा रहे हैं.

इन आठ राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश में स्थित 2211 बाल गृहों में करीब 43,437 बच्चे रह रहे हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश में 316 बाल गृहों में 7,399 बच्चे रह रहे हैं.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल पांच मई को सभी राज्यों के बाल गृहों के सोशल ऑडिट का आदेश दिया था.

इससे पहले मुज़फ़्फ़रपुर मामले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान को भी लेकर काफी आलोचना हुई थी. नीतीश ने मीडिया को नसीहत देते हुए कहा था, ‘जरा पॉजीटिव फीड पर भी आप लोग कृपा करके देख लें. एकाध निगेटिव चीज हो गया उसी को लेकर चल रहे हैं. जो गड़बड़ करेगा वो अंदर जाएगा. उसको बचाने वाला भी नहीं बचेगा. वो भी अंदर जाएगा.’

हालांकि, मुज़फ़्फ़रपुर मामले को भारी विरोध के चलते बिहार समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है. मुज़फ़्फ़रपुर और देवरिया बालिका गृह बलात्कार मामले में दोनों राज्य सरकारों ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है.

मुज़फ़्फ़रपुर के बालिका गृह में रह लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के सामने जो आपबीती सुनाई है, वह रोंगटे खड़े कर देती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)