ऑस्ट्रेलिया में अडाणी की कोयला परियोजना को झटका, फिंच पक्षी के संरक्षण से संबंधित योजना ख़ारिज

कोयला खदान परियोजना के लिए अडाणी समूह से विलुप्तप्राय फिंच पक्षी के संरक्षण और भूजल संरक्षण योजना मांगी गई थी. ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड प्रांत की सरकार ने फिंच पक्षी के संरक्षण संबंधी योजना ख़ारिज कर दी है और भूमिगत जल योजना की समीक्षा कर रही है.

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कोयला खदान परियोजना के लिए अडाणी समूह से विलुप्तप्राय फिंच पक्षी के संरक्षण और भूजल संरक्षण योजना मांगी गई थी. ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड प्रांत की सरकार ने फिंच पक्षी के संरक्षण संबंधी योजना ख़ारिज कर दी है और भूमिगत जल योजना की समीक्षा कर रही है.

गौतम अडानी (फोटो: रॉयटर्स)
गौतम अडानी (फोटो: रॉयटर्स)

मेलबर्नः ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड प्रांत की सरकार ने विलुप्तप्राय प्रजाति के फिंच पक्षी के संरक्षण से संबंधित अडाणी की प्रबंधन योजना को ख़ारिज कर दिया है.

प्रशासन का कहना है कि अरबों डॉलर की प्रस्तावित खदान परियोजना मंजूरी के लिए आवश्यक शर्तों पर खरा नहीं उतरता. इसके साथ ही कंपनी की विवादित कारमाइकल कोयला खदान परियोजना अनिश्चितकाल के लिए टल सकती है. शुक्रवार को स्थानीय मीडिया की खबरों में इसकी जानकारी मिली.

इस खदान परियोजना पर काम शुरू करने के लिए फिंच पक्षी के संरक्षण और भूजल योजना अडाणी कंपनी के समक्ष दो प्रमुख बाधाएं हैं. भूमिगत जल योजना की राज्य सरकार अभी समीक्षा कर रही है.

अडाणी को राज्य सरकार से खनन और पर्यावरणीय लाइसेंस पहले ही मिल चुके हैं. अडाणी को खनन परियोजना शुरू करने के लिए विलुप्तप्राय फिंच पक्षी के संरक्षण और भूजल की प्रबंध योजनाओं के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मिलना आवश्यक है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, क्वींसलैंड पर्यावरणीय अधिकारियों ने बीते दो मई को अडाणी समूह के अधिकारियों से मुलाकात करते हुए कहा कि फिंच प्रबंधन योजना को इसके मौजूदा प्रारूप में मंजूरी नहीं दी जा सकती क्योंकि यह आवश्यक शर्तों के अनुरूप नहीं है.

एक पर्यावरणीय प्रवक्ता का कहना है कि परियोजना स्थल पर फिंच पक्षियों की आबादी विलुप्तप्राय प्रजातियों में से सर्वाधिक है.

अब कंपनी को इस विलुप्तप्राय प्रजाति के पक्षियों के संरक्षण के लिए अपनी प्रबंधन योजना की समीक्षा करनी होगी और इस प्रबंधन योजना के खाके को दोबारा प्रशासन के समक्ष पेश करना होगा.

अडाणी की ऑस्ट्रेलियाई इकाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लुकास डाउ ने कहा, ‘हम नई योजना पर काम कर रहे हैं. हालांकि हमारा मानना है कि फिंच प्रबंधन योजना अपने मौजूदा स्वरूप में भी आवश्यक शर्तों पर खरा उतरती है, लेकिन हम इसकी समीक्षा करेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘इस परियोजना पर काम कर रहे विभागीय अधिकारी 18 महीने से इन योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं और अब अंतिम घड़ी में कुछ अतिरिक्त शर्तें बता दी गईं, उन्हें लगता है कि यह जरूरी है.’

डाउ ने कहा कि इस बिंदू पर आकर क्वींसलैंड सरकार ने अपने पैर पीछे खींच लिए हैं.

गौतम अडाणी के नेतृत्व वाले अडाणी समूह ने 2010 में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के गालीले बेसिन में ग्रीनफील्ड कारमाइकल कोयला खदान खरीदी थी.

इस परियोजना के तहत कंपनी को 2.3 अरब टन के कम गुणवत्ता के कोयले का उत्पादन करना है. अडाणी परियोजना को हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार से मंजूरी मिली थी.

बता दें कि सामाजिक संगठन और पर्यावरणविद इस परियोजना के ख़िलाफ़ हैं और अक्सर अडाणी की इस परियोजना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते रहते हैं.

बता दें कि अडाणी ग्रुप की यह कोयला खनन परियोजना मशहूर ‘द ग्रेट बैरियर रीफ’ के नज़दीक है. यह ऑस्ट्रेलिया का बेहद ख़ूबसूरत पर्यटन स्थल है, जहां 600 से अधिक कोरल पाए जाते हैं. यहां रंग-बिरंगी मछलियां, शार्क, डॉल्फिन और स्टारफिश पाए जाते हैं. इस प्रोजेक्ट की वजह से इन सब जीवों पर बुरा असर पड़ेगा.

पर्यावरणविदों के अनुसार, खदान से कोयला लादने वाले जहाज़ ‘द ग्रेट बैरियर रीफ’ से होकर गुज़रेंगे जिस कारण समुद्री जीवों का जीवन बुरी तरह प्रभावित होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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