नौकरियां पैदा न कर पाने के लिए नेहरू-गांधी परिवार को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते: शिवसेना

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा कि महज़ शब्दों के खेल या विज्ञापनों से बढ़ती बेरोज़गारी के मुद्दे का समाधान नहीं होने वाला है, सिर्फ विज्ञापन देने से ही नौकरियां नहीं मिल जाएंगी.

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शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फोटो: पीटीआई)

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा कि महज़ शब्दों के खेल या विज्ञापनों से बढ़ती बेरोज़गारी के मुद्दे का समाधान नहीं होने वाला है, सिर्फ विज्ञापन देने से ही नौकरियां नहीं मिल जाएंगी.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फोटो: पीटीआई)
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फोटो: पीटीआई)

मुम्बई: केंद्र में फिर से बनी मोदी सरकार पर बेरोजगारी और आर्थिक मंदी को लेकर सोमवार को पहली बार हमला करते हुए भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने कहा कि महज शब्दों के खेल से किसी समस्या का समाधान नहीं होने वाला है.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि महज शब्दों के खेल या विज्ञापनों से बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे का समाधान नहीं होने वाला है.

बता दें कि मोदी सरकार में शिवसेना भी हिस्सेदार है और उसके सांसद अरविंद सावंत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. शिवसेना ने इस बार 18 सीटों पर जीत दर्ज की है और एनडीए में वह भाजपा के बाद सबसे बड़ी पार्टी है.

उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने कहा कि मोदी के पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल में दस करोड़ नौकरियां सृजित करने के वादे में विफल रहने के लिए कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू या इंदिरा गांधी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

शिवसेना का यह बयान शुक्रवार को आधिकारिक आंकड़े जारी होने के बाद आया है जिसमें भारत की आर्थिक वृद्धि दर जनवरी-मार्च 2018- 19 में पांच वर्षों में सबसे कम 5.8 फीसदी बताई गई.

रिपोर्ट के अनुसार, देश में 2017- 18 में बेरोज़गारी दर कुल उपलब्ध कार्यबल का 6.1 प्रतिशत रही जो 45 साल में सर्वाधिक रही है. आम चुनाव से ठीक पहले बेरोज़गारी से जुड़े आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट लीक हो गई थी और शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में इसकी पुष्टि हो गई.

इसमें बताया गया कि कृषि और विनिर्माण क्षेत्र में खराब प्रदर्शन के कारण ऐसा हुआ. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने यह भी खुलासा किया कि वित्त वर्ष 2018- 19 के दौरान जीडीपी वृद्धि दर 6.8 फीसदी रही जबकि उसके पूर्व वित्त वर्ष में यह 7.2 फीसदी थी.

आज तक के अनुसार सामना में लिखा गया, ‘बेरोजगारी के आंकड़े और जीडीपी में गिरावट मोदी सरकार के लिए चिंता का विषय है. सिर्फ विज्ञापन देने से ही नौकरियां नहीं मिल जाएंगी. इसके अलावा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से किसी को रोज़गार नहीं मिल रहा है’.

इसके अलावा कहा गया है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की भी स्थिति अच्छी नहीं है, इसके रिजल्ट को लगातार रिव्यू किया जाना चाहिए.

इसमें कहा गया है कि चुनाव से पहले ऐसी इमेज बनाई गई कि 300 अमेरिकी कंपनियां चीन छोड़कर भारत में आ जाएंगी, लेकिन अब अमेरिका ही भारत पर दबाव बना रहा है. अगर मोदी है तो मुमकिन है तो फिर नौकरी का खोना रुकना चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)