शीर्ष नेतृत्व को लेकर स्पष्टता की कमी से कांग्रेस को हो रहा नुकसान: शशि थरूर

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के दो महीने बाद भी कांग्रेस कार्य समिति ने अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया है.

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New Delhi: Congress MP Shashi Tharoor arrives to attend the Monsoon Session of Parliament, in New Delhi on Thursday, July 19, 2018. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI7_19_2018_000037B)
New Delhi: Congress MP Shashi Tharoor arrives to attend the Monsoon Session of Parliament, in New Delhi on Thursday, July 19, 2018. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI7_19_2018_000037B)

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के दो महीने बाद भी कांग्रेस कार्य समिति ने अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया है.

New Delhi: Congress MP Shashi Tharoor arrives to attend the Monsoon Session of Parliament, in New Delhi on Thursday, July 19, 2018. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI7_19_2018_000037B)
कांग्रेस सांसद शशि थरूर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने रविवार को कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद नेतृत्व को लेकर ‘स्पष्टता की कमी’ पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है.

बता दें कि, कि राहुल गांधी ने 25 मई को कांग्रेस अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे की घोषणा की थी. हालांकि, सीडब्ल्यूसी ने अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सुधार का रास्ता यही हो सकता है कि कार्यसमिति सहित पार्टी में सभी महत्वपूर्ण पदों के लिए चुनाव हों, जिससे इनमें चुने जाने वाले नेताओं को स्वीकार्यता हासिल करने में मदद मिलेगी.

थरूर ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के इस आकलन का भी समर्थन किया कि इस समय कांग्रेस की कमान किसी युवा नेता को सौंपी जानी चाहिए.

थरूर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव होने पर महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इसमें अपनी किस्मत आजमाने को लेकर फैसला करेंगी. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि यह गांधी परिवार का फैसला होगा कि प्रियंका इस पद के लिए चुनाव लड़ेंगी या नहीं.

थरूर ने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर असंतोष जताया और कहा कि कांग्रेस जिन हालात से गुजर रही है, उसका अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है.

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तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘यह बिल्कुल सही बात है कि पार्टी के शीर्ष पद पर स्पष्टता की कमी संभवत: कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को नुकसान पहुंचा रही है. इनमें से ज्यादातर पार्टी नेता की कमी महसूस करते हैं जो अहम फैसलों को देखे, कमान संभाले और यहां तक कि पार्टी में नई जान फूंके और उसे आगे ले जाए.’

थरूर ने उम्मीद जताई कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) मौजूदा स्थिति को ‘बहुत गंभीरता’ से ले रही है और वह बिना किसी देरी के समाधान खोजने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस में सुधार का एक रास्ता यह हो सकता है कि सीडब्ल्यूसी पार्टी के लिए एक अंतरिम कार्यकारी अध्यक्ष का नाम बताए और फिर स्वयं को भंग कर दे. इसके बाद सीडब्ल्यूसी समेत पार्टी के भीतर प्रमुख नेतृत्व पदों के लिए ताजा चुनाव हो.’

थरूर ने आगे कहा, ‘‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों (पीसीसी) से लिए गए नेताओं को यह तय करने का अधिकार दिया जाए कि इन अहम पदों में से कौन पार्टी का नेतृत्व करेगा. इससे आने वाले नेताओं को स्वीकार्यता मिल सकेगी और उन्हें पार्टी का नेतृत्व करने का विश्वसनीय जनादेश मिलेगा.’

थरूर ने पार्टी अध्यक्ष पद पर चुनाव कराने के लिए ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी की शैली अपनाने का सुझाव दिया जिससे पार्टी में राष्ट्रीय दिलचस्पी बढ़ सकती है तथा वह एक बार फिर और ज्यादा मतदाताओं को अपनी ओर प्रेरित कर सकती है.

यह पूछने पर कि क्या उन्हें लगता है कि प्रियंका गांधी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त हैं, इस पर थरूर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगी.

उन्होंने कहा कि उनके पास ‘स्वाभाविक करिश्मा’ है जो निश्चित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं तथा मतदाताओं को प्रेरित और एकजुट कर सकता है. उनकी इसी खूबी के कारण कई लोग उनकी तुलना उनकी दादी और पूर्व पार्टी अध्यक्ष दिवंगत इंदिरा गांधी से करते हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले चुनावों में उत्तर प्रदेश में काम करते हुए वह प्रभावशाली छाप छोड़ने के साथ ही संगठन में अनुभवी नेता के तौर पर उभरी हैं.

उन्होंने कहा, ‘लेकिन साथ ही राहुल गांधी का यह बयान कि गांधी परिवार के किसी सदस्य को उनका स्थान नहीं लेना चाहिए, उनके इस विकल्प को खारिज करता दिखाई देता है. यह गांधी परिवार पर निर्भर करता है कि वह फैसला करे कि वे इस मुद्दे पर कहां सामूहिक रूप से खड़े होते हैं.’

पार्टी अध्यक्ष पद के लिए खड़े होने में रुचि के बारे में पूछने पर 63 वर्षीय थरूर ने कहा, ‘मैं ईमानदारी से कहूंगा कि मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे पर अटकलें लगाने की दूर-दूर तक भी कोई संभावना है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)