कश्मीरी बच्चों और महिलाओं के लिए चिंतित हूं, इन्हें सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका: मलाला यूसुफजई

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मलाला यूसुफजई ने अपील की है कि दक्षिण एशियाई देश, अंतरराष्ट्रीय समुदाय अपने मतभेद भुलाकर कश्मीर मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालें.

Davos : Nobel laureate Malala Yousafzai attends the annual meeting of the World Economic Forum in Davos, Switzerland, Thursday, Jan. 25, 2018. AP/PTI(AP1_25_2018_000165B)
मलाला यूसुफजई. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मलाला यूसुफजई ने अपील की है कि दक्षिण एशियाई देश, अंतरराष्ट्रीय समुदाय अपने मतभेद भुलाकर कश्मीर मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालें.

Davos : Nobel laureate Malala Yousafzai attends the annual meeting of the World Economic Forum in Davos, Switzerland, Thursday, Jan. 25, 2018. AP/PTI(AP1_25_2018_000165B)
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित एवं पाकिस्तानी शिक्षा अधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई. (फोटो: पीटीआई)

लंदन: नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित एवं पाकिस्तानी शिक्षा अधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने बृहस्पतिवार को कश्मीर मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकाले जाने की अपील की.

मलाला ने कहा कि हम सभी शांति के साथ रह सकते हैं और एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने की कोई आवश्यकता नहीं है.

भारत ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को निरस्त कर दिया है और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया है.

इसके जवाब में, पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय उच्चायुक्त को निष्कासित कर दिया था और भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कमतर करने का फैसला किया. पाक ने भारत के कदम को एकतरफा और अवैध बताया है.

मलाला ने ट्वीट किया, ‘जब मैं बच्ची थी, जब मेरी मां और मेरे पिता बच्चे थे, जब मेरे दादा-दादी, नाना-नानी युवा थे, कश्मीर के लोग तभी से संघर्ष की स्थिति में जी रहे हैं.’

सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाली मलाला (22) ने कहा कि वह कश्मीर की फिक्र करती हैं क्योंकि दक्षिण एशिया उनका घर है, एक ऐसा घर जिसे वे कश्मीरियों समेत 1.8 अरब लोगों के साथ साझा करती हैं.

मलाला ने कहा कि यह क्षेत्र विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, भाषाओं, व्यंजनों और परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि हम सभी शांति के साथ रह सकते हैं.

मलाला ने कहा, ‘इस बात की कोई आवश्यकता नहीं है कि हम पीड़ा सहें और एक दूसरे को नुकसान पहुंचाएं.’

उन्होंने कहा कि उन्हें कश्मीर में मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों की चिंता है क्योंकि उन्हें हिंसा का आसानी से शिकार बनाया जा सकता है और इस संघर्ष में उन्हें ही सर्वाधिक नुकसान होने की आशंका है.

उन्होंने सभी दक्षिण एशियाई देशों, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और प्राधिकारियों से उनकी पीड़ा पर प्रतिक्रिया देने की अपील की.

मलाला ने कहा, ‘हमारे बीच कोई भी मतभेद क्यों न हो. हमें कश्मीर में सात दशक पुराने संघर्ष को शांतिपूर्वक सुलझाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.’

गौरतलब है कि संसद ने बीते मंगलवार को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने संबंधी अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को समाप्त करने के प्रस्ताव वाले संकल्प और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी.

उधर, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने वाले प्रस्ताव को बुधवार को स्वीकृति प्रदान की.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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