कश्मीर के छात्रों ने केंद्र के अधिकारी का ईद निमंत्रण ठुकराया, कहा- ये जले पर नमक छिड़कना है

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों ने निमंत्रण के जवाब में एक बयान जारी कर जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और राज्य में संचार के माध्यमों पर रोक लगाने को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया.

/
अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (फाइल फोटो: पीटीआई)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों ने निमंत्रण के जवाब में एक बयान जारी कर जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और राज्य में संचार के माध्यमों पर रोक लगाने को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया.

Aligarh Muslim University India Visit Online 1
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय.

नई दिल्ली: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पढ़ने वाले जम्मू कश्मीर के छात्रों ने एक बयान जारी कर विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में ईद-उल-अज़हा के दिन लंच करने के लिए केंद्र के संपर्क अधिकारी संजय पंडिता के निमंत्रण को ठुकरा दिया.

निमंत्रण के जवाब में छात्रों ने एक बयान जारी कर जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और राज्य में संचार के माध्यमों पर रोक लगाने को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया.

मोदी सरकार के इस फैसले को ‘जले पर नमक छिड़कने’ जैसा करार देते हुए छात्रों ने कहा कि इस निमंत्रण के जरिए क्रूर सरकार दुनिया के सामने अपना मानवीय चेहरा दिखाना चाहती है.

Aligarh-lunch-1024x768
एएमयू में जम्मू कश्मीर के छात्रों के लिए निमंत्रण का नोटिस.

छात्रों ने साफ शब्दों में निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया और कहा कि अगर वे इस तरह के निमंत्रण को स्वीकार करते हैं तो ये उनके माता-पिता के साहस का अपमान होगा जो बड़े पैमाने पर सैन्यीकरण और जम्मू कश्मीर में पाबंदियों का सामना कर रहे हैं.

मालूम हो कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने दूसरे राज्यों में जम्मू कश्मीर के छात्रों के लिए ईद के त्योहार को आयोजित करने के लिए नामित संपर्क अधिकारियों को एक लाख रुपये देने की मंजूरी दी थी. हालांकि राज्य के छात्रों ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि ये फैसला राजनीतिक भावना से प्रेरित है.

छात्रों ने कहा कि उनके प्रति राज्यपाल की कोई सहानुभूति नहीं है. उन्होंने कहा कि पैसे और निमंत्रण उनकी सहमति को खरीदने की कोशिश है. छात्रों ने कहा कि कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करना उनके अधिकारों की डकैती है.

छात्रों ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और संचार सेवाओं पर प्रतिबंध के बारे में भी चिंता व्यक्त की है, जिसकी वजह से वहां की मीडिया पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है.