सैटेलाइट तस्वीरों ने अरुणाचल के नेताओं के चीनी घुसपैठ के दावों की पुष्टि की

इस साल जुलाई में भाजपा की अरुणाचल प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद तापिर गाओ और नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गिशो कबाक ने दावा किया था कि चीनी सैनिकों ने पिछले महीने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की थी और पुल बनाया था. हालांकि, भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश के बिशिंग गांव में चीनी सेना द्वारा दो किमी लंबी सड़क बनाने के दावे को खारिज कर दिया था.

Indian army soldiers march near an army base on India's Tezpur-Tawang highway in Arunachal Pradesh May 29, 2012. REUTERS/Frank Jack Daniel/Files

इस साल जुलाई में भाजपा की अरुणाचल प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद तापिर गाओ और नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गिशो कबाक ने दावा किया था कि चीनी सैनिकों ने पिछले महीने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की थी और पुल बनाया था. हालांकि, भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश के बिशिंग गांव में चीनी सेना द्वारा दो किमी लंबी सड़क बनाने के दावे को खारिज कर दिया था.

Indian army soldiers march near an army base on India's Tezpur-Tawang highway in Arunachal Pradesh May 29, 2012. REUTERS/Frank Jack Daniel/Files
अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवान. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश के नेताओं द्वारा चीन के भारत में घुसपैठ करने और अन्जॉ जिले के बिशिंग गांव में दो किलोमीटर लंबा पूल बनाने के दावे के दो महीने बाद ओपन सोर्स इंटेलिजेंस हैंडल्स से मिली सैटेलाइट तस्वीरें उनके दावों की पुष्टि कर रही हैं.

इस साल जुलाई में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सांसद तापिर गाओ और नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के राज्य अध्यक्ष गिशो कबाक ने स्थानीय मीडिया को बताया कि चीन द्वारा ऊपरी सियांग जिले के टुटिंग उप-मंडल स्थित बिशिंग गांव में सड़क का निर्माण किया गया था.

एनपीपी द्वारा 6 जुलाई को जारी एक बयान में कहा गया था, ‘यह गंभीर चिंता का विषय है कि राज्य या केंद्र सरकार के किसी अधिकारी ने आज तक इस घटना का आकलन करने के लिए बिशिंग गांव का दौरा नहीं किया. ठीक समय पर की गई उनकी यात्रा अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब रहने वाले ग्रामीणों का मनोबल बढ़ाती.’

4 सितंबर को गाओ ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप भी साझा किया था, जिसमें पानी की धारा के ऊप एक नवनिर्मित लकड़ी के पुल को चित्रित किया गया था, जिसकी पहचान जिले के दूरस्थ चगलम क्षेत्र में कियोमू नाले के रूप में की गई थी. गाओ ने दावा किया कि इसे चीनी सेना ने भारत के अंदर लगभग 25 किलोमीटर अंदर घुसने के बाद बनाया था और कुछ स्थानीय युवाओं ने 3 सितंबर को इस पर ध्यान दिया.

गाओ ने दावा किया कि भारतीय सेना के एक गश्ती दल ने पिछले साल अक्टूबर में इलाके में चीनी सैनिकों को देखा था.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘राज्य के प्रतिनिधि के तौर पर मैंने केंद्र सरकार से अरुणाचल प्रदेश में चीन-भारत सीमा पर उसी तरह बुनियादी संरचना के निर्माण के लिए अनुरोध किया है जिस तरह अन्जॉ के जिला मुख्यालय हायुलियांग से चगलागम तक और उससे आगे सड़क बनाई गयी है.’

गाओ ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकना जरूरी है.’ उन्होंने कहा कि हायुलियांग और चगलागम के बीच सड़क की हालत बहुत खराब है और इससे आगे एक तरह से कोई सड़क नहीं है.

हालांकि, टीवी चैनलों और अन्य मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर सेना ने स्पष्ट रूप से इसका खंडन किया.

भारतीय सेना ने एक विज्ञप्ति में कहा कि जिस इलाके की बात हो रही है, उसे ‘फिश टेल’ कहा जाता है और दोनों पक्षों की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं.

इसमें कहा गया कि यह घना निर्जन इलाका है और यहां नालों तथा जलधाराओं के पास सारी आवाजाही पैदल ही संभव है. मॉनसून के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के गश्तीदल ने आवाजाही के लिए अस्थाई पुलों का निर्माण किया था.

सेना ने यह बात दोहराई कि क्षेत्र में चीनी जवानों या नागरिकों की कोई स्थाई मौजूदगी नहीं है और हमारे जवान निगरानी रखते हैं.

7 सितंबर को द प्रिंट में एक लेख में सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ अभिजीत अय्यर-मित्रा ने स्वतंत्र रूप से प्राप्त उपग्रह चित्रों की मदद से गाओ और कबाक के दावों का समर्थन किया.

हालांकि, अय्यर-मित्रा ने कहा कि उन्हें राज्य के चगलगाम क्षेत्र में घुसपैठ का कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला लेकिन विभिन्न ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस या ओएसआईएनटी से मदद के आधार पर जो पता चला है वह अब तक गंभीर है. चगलगाम से लगभग 175 किलोमीटर दूर बिशिंग के उत्तरी क्षेत्र में न केवल चीनियों ने घुसपैठ की है, बल्कि उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगभग 1 किलोमीटर गहरी सड़क भी बनाई है.

द वायर ने कोहिमा में पूर्वी क्षेत्र के रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) के कार्यालय से इस संबंध में कुछ सवाल पूछे हैं. उनका जवाब आने पर उसे खबर में जोड़ दिया जाएगा.

इस बीच, गाओ ने द वायर को बताया कि उन्हें जो कहा है कि वह तथ्य है.

उन्होंने कहा, ‘मेरा सवाल यह है कि अगर चीन ने उस लकड़ी के पुल का निर्माण चगलगाम में नहीं किया, तो किसने किया? वहां कोई अरुणाचल का कोई ग्रामीण नहीं हैं. यदि बिशिंग में सड़क का निर्माण उसने नहीं किया तो किसने किया? यहां सबसे बड़ा सवाल जो मैं उठा रहा हूं वह यह है कि इसे हल्के में मत लीजिए. हमने 1962 और हाल ही में डोकलाम को भी देखा है. अरुणाचल में कोई डोकलाम नहीं होना चाहिए.’

इस बीच भारतीय सेना की विज्ञप्ति में कहा गया कि भारत और चीन के पास सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी मुद्दों पर ध्यान देने के लिए भलीभांति स्थापित कूटनीतिक और सैन्य प्रणालियां हैं.

इसमें कहा गया कि दोनों पक्ष इस बात को मानते हैं कि संपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के सुगम विकास के लिए भारत-चीन सीमा के सभी क्षेत्रों में अमन चैन बनाये रखना जरूरी है.

विज्ञप्ति के अनुसार दोनों देशों ने राजनीतिक मानकों तथा दिशानिर्देशक सिद्धांतों पर 2005 के समझौते के आधार पर सीमा के सवाल पर निष्पक्ष, तर्कसंगत और परस्पर स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करने पर भी सहमति जताई है.

भारत और चीन करीब 4000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं जिसका स्पष्ट निर्धारण नहीं है. इस वजह से क्षेत्र में घुसपैठ के मामले सामने आते हैं.

बता दें कि जून 2017 में सिक्किम के डोकलाम में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच भारत-चीन-भूटान के बीच त्रिकोणीय जंक्शन पर चीन द्वारा सड़क निर्माण को लेकर गतिरोध पैदा हो गया था. गतिरोध के कारण एक महीने तक दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया. इसके बाद अगस्त में दोनों सरकारों ने घोषणा की कि वे अपनी सेना को साइट से हटा लेंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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