भारत

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के ख़िलाफ़ कोल इंडिया और दूसरे खदानों के श्रम संगठन हड़ताल पर

कोयला खनन से जुड़े श्रम संगठन कोयला निकासी क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की केंद्र सरकार की नीति का विरोध कर रहे हैं. अखिल भारतीय कोयला श्रमिक महासंघ ने बताया कि हड़ताल में पूरे भारत से तक़रीबन पांच लाख कर्मचारी शामिल हुए.

देश भर में हुई हड़ताल में तक़रीबन पांच लाख कर्मचारी शामिल हुए.

देश भर में हुई हड़ताल में तक़रीबन पांच लाख कर्मचारी शामिल हुए.

कोलकाता: कोयला क्षेत्र के श्रम संघों ने मंगलवार को दावा किया कि उनकी एक दिन की हड़ताल से कोल इंडिया लिमिटेड, तेलंगाना स्थित सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड और राज्य के सभी कोयला खदानों में काम पूरी तरह से ठप रहा.

उनका कहना है कि इन खदानों में कोयले का उत्पादन और लदान बिल्कुल बंद है. श्रम संगठन कोयला निकासी क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को अपने पूर्ण स्वामित्व में कारोबार की अनुमति देने की नीति का विरोध कर रहे हैं.

उनकी मांग है कि सरकार यह फैसला वापस ले. हड़ताल का आयोजन सरकारी क्षेत्र की इन दोनों कोयला कंपनियों में सक्रिय श्रम संघों के पांच महासंघों ने किया है. कुल पांच लाख से अधिक कोयला श्रमिक इनके सदस्य हैं.

यूनियन के नेताओं ने कहा कि पिछले महीने केंद्र सरकार ने वैश्विक खनिकों को निवेश के लिए आकर्षित करने के लिए कोयला खनन के क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दे दी थी. श्रम संगठन के लोग सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे हैं.

अखिल भारतीय कोयला श्रमिक महासंघ (एआईसीडब्ल्यूएफ) के महासचिव डीडी रामनंदन ने बताया, ‘हड़ताल से सभी कोयला खदानों में उत्पादन पूरी तरह बंद है और वहां से कोयले की लदाई और निकासी भी बंद है.’

रामनंदन ने बताया कि तकरीबन 2.7 लाख स्थायी और 2.25 लाख अस्थायी कर्मचारियों ने इस हड़ताल में भाग लिया.

देश के कोयला उत्पादन में कोल इंडिया का 80 प्रतिशत योगदान है. हड़ताल के कारण इस कंपनी को एक दिन में 15 लाख टन कोयला उत्पादन का नुकसान होने का अुनमान है. कंपनी के अधिकारी हड़ताल के बारे में कोई टिप्पणी करने को उपलब्ध नहीं थे.

इस हड़ताल का आह्वान इंडियन नेशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन (इंटक), हिंद खदान मजदूर फेडरेशन (एमएमएस), इंडियन माइनवर्कर्स फेडरेशन (एटक), आल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन (सीटू) और आल इंडिया सेंट्रल कौंसिल आफ ट्रेड यूनियन्स (एआईसीसीटीयू) ने मिल कर किया है.

इस हड़ताल के समर्थन में मंगलवार को ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू) ने नई दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया.

द वायर से बातचीत में इंडियन नेशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव एसक्यू ज़मा ने कहा, ‘हालांकि इसे एफडीआई का नाम दिया जा रहा है, लेकिन वे सीधे तौर पर या कुछ भारतीय कंपनियों के जरिये बहुत कम पैसा लगाएंगे. बड़ी खनन कंपनियों का उन्हें पट्टा दे दिया जाएगा, जबकि बुनियादी सुविधाएं, भारी मशीनरी, जमीन और पर्यावरण संबंधी मंजूरी आदि हमारे होंगे. एफडीआई के नाम पर वे मुनाफा अपने देश में वापस ले जाएंगे.’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बद्ध श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएसएस) ने इस हड़ताल से अलग खुद को अलग रखा. वह इसी मुद्दे पर सोमवार से 27 सितंबर तक पांच दिन तक कोयला क्षेत्र काम बंद हड़ताल पर है.

बिजनेस वर्ल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार हड़ताल पर रहे कर्मचारियों से बातचीत कर रही है.

मंगलवार को नई दिल्ली में संवाददाताओं से जोशी ने कहा, ‘सरकार बातचीत के लिए तैयार है.’

रिपोर्ट के अनुसार, सात महीनों के दौरान 31 अगस्त तक कोल इंडिया के उत्पादन में 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. मंगलवार का कंपनी का शेयर 2.2 प्रतिशत घटकर 198.15 रुपये रहा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)