नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधिमंडल ने हिरासत में रखे गए फारूक, उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक दिन पहले ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधिमंडल को फारूक और उमर अब्दुल्ला से मिलने की मंजूरी दी थी.

फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो: पीटीआई)

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक दिन पहले ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधिमंडल को फारूक और उमर अब्दुल्ला से मिलने की मंजूरी दी थी.

फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो: पीटीआई)
फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की. राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक दिन पहले ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधिमंडल को इन दोनों से मिलने की मंजूरी दी थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू के प्रांतीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रतिनिधिमंडल इस मुलाकात के लिए रविवार सुबह श्रीनगर पहुंचा था.

राणा ने दोनों नेताओं से मुलाकात के बाद कहा, ‘अगर राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करनी  है तो मुख्यधारा के नेताओं को रिहा करना होगा. दोनों (फारूक और उमर) ठीक हैं. यकीनन उन्हें राज्य के घटनाक्रमों से पीड़ा हुई है, विशेष रूप से प्रतिबंधों से.’

मालूम हो कि फारूक अब्दुला श्रीनवगर स्थित अपने आवास में नजरबंद हैं जबकि उनके बेटे उमर को राज्य के गेस्ट हाउस में हिरासत में रखा गया है.

यह पूछने पर कि क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस आगामी ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) चुनाव लड़ेंगी? इस पर राणा ने कहा, ‘अगर राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करनी है तो इन लोगों को रिहा करना होगा. अगर हम बीडीएस चुनाव लड़ते हैं और जनादेश पर लोग हस्ताक्षर भी कर देते हैं तो इस जनादेश पर पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के हस्ताक्षर जरूरी हैं, जो दुर्भाग्य से पीएसए के तहत हिरासत में हैं. उन्हें रिहा कीजिए, उसके बाद पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक होगी, जिसमें रणनीति बनेगी.’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता मदन मंटू ने शनिवार को कहा था कि पार्टी के नेताओं से प्रतिबंध हटाने के बाद बुधवार को जम्मू के जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ लोगों की आपात बैठक के दौरान दोनों नेताओं से मिलने का फैसला लिया गया.

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं और मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के अन्य शीर्ष नेताओं को लगातार हिरासत में लिए जाने से पार्टी खफा है.

गौरतलब है कि पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद हिरासत में रखे गए 500 से अधिक राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं में फारूक और उमर अब्दुल्ला भी हैं.

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने गुरुवार को कहा था कि हिरासत में रखे गए राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को हरेक के विश्लेषण के बाद चरणबद्ध तरीके से रिहा किया जाएगा.

जम्मू कश्मीर राज्यपाल के सलाहकार फारूक खान ने कहा, ‘हां, हरेक के विश्लेषण के बाद उन्हें एक-एक करके छोड़ा जाएगा. उन्हें रिहा किया जाएगा.’

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