श्रीनगर: जम्मू की एक अदालत ने गुरुवार (6 मार्च) को जम्मू-कश्मीर पुलिस को कठुआ के एक आदिवासी व्यक्ति को हिरासत में प्रताड़ित करने के मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने पिछले महीने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी.
कठुआ के उप-न्यायाधीश की अदालत ने बिलावर के थाना प्रभारी को कठुआ जिले के भटोडी गांव के निवासी 25 वर्षीय मखान दीन, जिन्हें कथित तौर पर पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया था और बाद में 5 फरवरी को उन्होंने आत्महत्या कर ली थी, के पिता और पत्नी द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया,.
बुधवार (5 मार्च) को अदालत ने फैसले में कहा, ‘बिलावर के स्टेशन हाउस ऑफिसर को निर्देश दिया जाता है कि वे कानून के अनुसार मामले की गहन जांच शुरू करें.’
मालूम हो कि मखान दीन ने करीब एक महीने पहले कथित तौर पर पुलिस की यातना से बचने के लिए मस्जिद में आत्महत्या कर ली थी.
मृतक के परिवार ने अपनी शिकायत में हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों के अलावा यह भी कहा है कि दीन ने मरते समय पीने का पानी मांगा था, लेकिन बिलावर थाने अधिकारियों ने उसके परिवार के सदस्यों को उसकी इच्छा पूरी करने से रोक दिया.
परिवार द्वारा अदालत में दायर की गई शिकायत में कहा गया है, ‘मखान दीन पानी के लिए रो रहा था और उसकी बहन जट्टी और उसके पति राशिद अहमद ने एक बोतल पानी का प्रबंध किया, लेकिन पुलिस अधिकारी ने मखान दीन को पानी नहीं पीने दिया, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई.’
इस घटना में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग करने वाले दो वकीलों में से एक वकील शेख शकील अहमद ने कहा कि यह आदेश दीन और उसके शोकाकुल परिवार के लिए न्याय की दिशा में पहला कदम है.
अहमद ने द वायर से कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि इस मामले में न्याय होगा.’
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दीन के परिवार द्वारा बिलावर पुलिस स्टेशन के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए अत्याचार के आरोप ‘गंभीर’ प्रकृति के हैं, जबकि अभियोजन अधिकारी की इस दलील को खारिज कर दिया कि मामले में एफआईआर दर्ज करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175 (4) के तहत एक वरिष्ठ अधिकारी से रिपोर्ट की आवश्यकता होती है क्योंकि आरोप सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए हैं.
अदालत ने कहा, ‘यह तर्क अस्पष्ट है क्योंकि कथित कृत्य को किसी भी तरह से आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में किए गए कृत्य के रूप में नहीं समझा जा सकता है. इसके अलावा आत्महत्या से पहले मृतक का कथित वीडियो पर्याप्त चिंताएं पैदा करता है, जिसकी गहन जांच की आवश्यकता है.’
ज्ञात हो कि धारा 175 एक पुलिस अधिकारी की संज्ञेय अपराधों की जांच करने की शक्ति से संबंधित है. उपधारा 4 के तहत अधिकार प्राप्त कोई भी मजिस्ट्रेट धारा 210 के अंतर्गत किसी वरिष्ठ लोक सेवक से घटना के तथ्यों और परिस्थितियों से संबंधित रिपोर्ट प्राप्त करने और संदिग्ध का बयान सुनने के बाद लोक सेवक के खिलाफ जांच का आदेश दे सकता है.
सर्वोच्च न्यायालय और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि न्यायिक, मजिस्ट्रेट या अन्य जांच एफआईआर दर्ज न करने का आधार नहीं बन सकती, जब आरोप प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध के होने का खुलासा करते हैं.
मामले में अहमद और एक अन्य वकील द्वारा दायर एक अलग शिकायत को खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि एक घटना में कई एफआईआर आरोपी के खिलाफ पूर्वाग्रह और जांच में विसंगतियों को जन्म देंगी.
अदालत ने कहा, ‘हालांकि, यह सच है कि कोई भी व्यक्ति शिकायतकर्ता बन सकता है और मौजूदा मामले में बीएनएसएस के तहत अपराध की रिपोर्ट करा सकता है, लेकिन मृतक के पिता और पत्नी ने पहले ही एफआईआर दर्ज करने के लिए रिपोर्ट कर दी है. दोनों अधिवक्ताओं द्वारा दायर आवेदन मृतक के पिता और पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों की पुनरावृत्ति मात्र है और इसमें कोई नया तथ्य या परिस्थिति नहीं है जिसके लिए अलग से एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता हो.’
पुलिस ने अदालत को बताया कि उन्होंने 5 फरवरी को बीएनएसएस की धारा 194 के तहत मामले की जांच शुरू कर दी है, जो किसी व्यक्ति की मौत के कारण का पता लगाने के लिए पूछताछ से संबंधित है.
अपनी ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ में पुलिस ने अदालत को बताया कि जिला मजिस्ट्रेट ने 6 फरवरी को मामले में मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया था, जो अभी तक पूरी नहीं हुई है और प्रारंभिक जांच में ‘ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह पता चले कि मृतक और उसके पिता को पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया गया था.’
पुलिस ने अदालत को बताया, ‘सभी तीन जांच लंबित हैं और निष्पक्ष जांच जारी है.’
उन्होंने दीन के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया कि पुलिस की यातना के कारण उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
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अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं – जैसे कोई दोस्त या परिवार का सदस्य – जो आत्महत्या के जोखिम में है, तो कृपया उनसे संपर्क करें. सुसाइड प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन ने फ़ोन नंबरों की एक सूची बनाई है, जिस पर वे विश्वास के साथ बात कर सकते हैं. टेलीमानस हेल्पलाइन, एक सरकारी हेल्पलाइन है, जो 24×7 काम करती है; इसका नंबर 1-800-891-4416 या 14416 है. आप उन्हें नज़दीकी अस्पताल भी ले जा सकते हैं.
