नई दिल्ली:अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) अधिकारियों ने शनिवार (15 मार्च) को भीड़ द्वारा हिंसा के 14 आरोपियों में से छह के ‘अवैध रूप से निर्मित’ घरों को ध्वस्त कर दिया है.
स्थानीय पुलिस के अनुसार, इनमें एक नाबालिग भी शामिल है. इन सभी को राहगीरों पर हमला करने और दंगा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें तीन लोग घायल हो गए और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए.
समाचार एजेंसी पीटीआई को पुलिस अधिकारी ने बताया कि अमराईवाड़ी और खोखर इलाकों में एएमसी ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में तोड़फोड़ की. इस दौरान 700-800 पुलिसकर्मी तैनात थे. आरोपियों के परिवार के सदस्यों द्वारा इस प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयास विफल हो गए, क्योंकि पुलिस ने उन्हें काबू में कर लिया.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जिस हिंसा का इन लोगों पर आरोप है, वह गुरुवार रात को भड़की जब लाठी, तलवार और चाकुओं से लैस 20 लोगों की भीड़ ने वस्त्राल इलाके में वाहनों में तोड़फोड़ की और लोगों की पिटाई की.
पुलिस ने अलाप सोनी नामक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की, जिसने बताया कि कैसे उसके परिवार की सैर ‘असामाजिक तत्वों’ द्वारा हमला के बाद एक बेहद ख़राब अनुभव में बदल गई.
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें हत्या का प्रयास, गैरकानूनी रूप से एकत्र होना, दंगा करना और गलत तरीके से रोकना शामिल है.
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस द्वारा कुछ आरोपियों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने के कथित वीडियो भी सामने आए हैं, लेकिन पुलिस उपायुक्त बलदेव देसाई ने दावा किया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गुजरात के पुलिस महानिदेशक विकास सहाय ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में शीर्ष पुलिस अधिकारियों को अगले 100 घंटों के भीतर ‘असामाजिक तत्वों’ की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया. जबरन वसूली, धमकी, चोरी और शराबबंदी और जुआ सहित अवैध कारोबार जैसे अपराधों में शामिल बार-बार अपराध करने वालों पर ध्यान केंद्रित किया गया. इसके अलावा, अधिकारियों को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण सहित संपत्ति से जुड़े अपराधों पर नकेल कसने के लिए कहा गया है.
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे पहचाने गए व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करें, खास तौर पर उनकी अवैध गतिविधियों जैसे कि अनाधिकृत निर्माण, भूमि अतिक्रमण और अवैध बिजली कनेक्शनों को लक्षित करें. इसके अलावा, डीजीपी ने निर्देश दिया कि अगर इनमें से कोई भी व्यक्ति जमानत पर बाहर रहते हुए अवैध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो उसकी जमानत रद्द कर दी जानी चाहिए.
उल्लेखनीय है कि पिछले साल 13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि किसी व्यक्ति के घर को कानूनी प्रक्रिया के बिना सिर्फ इसलिए ध्वस्त करना ‘पूरी तरह से असंवैधानिक’ है क्योंकि वह किसी आपराधिक मामले में आरोपी या दोषी है.
