ट्रंप ने यू-टर्न लेते हुए कई देशों के लिए पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 10% किया; चीन पर बढ़ाया

ट्रंप ने कहा है कि इस महीने की शुरुआत में लगभग 90 देशों के लिए घोषित किए गए पारस्परिक टैरिफ को 90 दिनों की अवधि के लिए 10% के टैरिफ से बदल दिया जाएगा. वहीं, चीन के ऊपर इसे बढ़ाकर 125 % कर दिया गया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आयात होने वाली ब्रांडेड और पेटेंट वाली फार्मास्युटिकल उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की है. (फोटो: FB/Donald J. Trump)

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (9 अप्रैल) को भारत सहित विभिन्न देशों के खिलाफ़ बुधवार से ही लागू पारस्परिक (reciprocal) टैरिफ को अगले 90 दिनों के लिए ‘रोक’ दिया है.

हालांकि चीन को अपवाद बनाते हुए उसके खिलाफ़ पारस्परिक टैरिफ को और बढ़ा दी है. 

ट्रंप ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में लगभग 90 देशों के लिए घोषित किए गए पारस्परिक टैरिफ को 90 दिनों की अवधि के लिए 10% के टैरिफ से बदल दिया जाएगा, जो घोषित टैरिफ से कम है. 

उन्होंने कहा कि रोक लगाने का फैसला इसलिए किया गया क्योंकि ‘75 से अधिक देशों’ ने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को बातचीत के लिए संपर्क किया. और उन देशों ने किसी भी प्रकार से अमेरिका के इस फैसले के खिलाफ जवाबी कार्रवाई नहीं की. 

उन्होंने अपने सोशल प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ पर एक पोस्ट में कहा, ‘मैंने 90 दिनों के लिए रोक लगाई है, और इस अवधि के दौरान 10% की बहुत कम पारस्परिक टैरिफ ली जाएगी जो तुरंत रूप से प्रभावी है.’ 

वहीं चीन ने बुधवार को घोषणा की कि वह गुरुवार (8 अप्रैल) से अमेरिकी आयात पर जवाबी टैरिफ को 34% से बढ़ाकर 84% कर देगा. दोनों पक्षों के बीच आपसी तनाव बढ़ने के बाद ट्रंप ने चीनी आयात पर 104% टैरिफ लगा दिया.

लेकिन चीन के इस घोषणा के बाद ट्रंप ने उसके ऊपर टैरिफ को बढ़ाकर 125% कर दिया. ट्रंप ने बुधवार देर रात ट्रुथ सोशल पर इस कदम की घोषणा करते हुए बीजिंग पर विश्व बाजारों के प्रति ‘सम्मान की कमी’ का आरोप लगाया.

उन्होंने आगे कहा, ‘उम्मीद है कि निकट भविष्य में चीन को एहसास होगा कि अमेरिका और अन्य देशों को लूटने के दिन अब स्वीकार्य नहीं है.’

वाशिंगटन द्वारा सभी देशों के खिलाफ 10% का ‘बेसलाइन’ शुल्क लगाने के एक सप्ताह बाद बुधवार को दर्जनों देशों के खिलाफ ट्रंप द्वारा घोषित आयात पर पारस्परिक टैरिफ लागू हो गए हैं. ट्रंप प्रशासन ने इन दरों को ‘पारस्परिक’ कहा है, लेकिन अर्थशास्त्रियों ने बताया है कि इस्तेमाल किए गए फॉर्मूले का वास्तव में अमेरिका पर अन्य देशों द्वारा लगाए गए शुल्कों से कोई लेना-देना नहीं है.

ह्वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा कि टैरिफ स्तर को 10% तक लाया जाएगा.

वहीं, भारत पर 27% पारस्परिक टैरिफ लगाया जाना तय था, क्योंकि ट्रंप ने पदभार संभालने के बाद कई बार अमेरिकी वस्तुओं पर नई दिल्ली द्वारा उच्च आयात शुल्क लिए जाने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी.

27% शुल्क की घोषणा के बाद मोदी सरकार ने कहा था कि वह इस कदम के प्रभावों की सावधानीपूर्वक जांच कर रही है, और वह द्विपक्षीय व्यापार सौदे के लिए बातचीत के संबंध में लगातार अमेरिका के संपर्क में है.

सरकार ने यह भी कहा कि फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के बाद से ही यह बातचीत चल रही है.