पाकिस्तान ने आतंकवाद को समर्थन देने को ग़लती माना, रक्षा मंत्री ने कहा- हम जंग नहीं चाहते

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्वीकारा कि उनके देश ने पश्चिमी देशों के लिए तीन दशकों तक आतंकवादी संगठनों को समर्थन, ट्रेनिंग और फंडिंग दी. इसे गलती बताते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इसकी भारी क़ीमत चुकाई है. पहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करते हुए आसिफ ने कहा- हम नहीं चाहते कि यह युद्ध भड़के.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (फोटो: फेसबुक/ख्वाजा आसिफ)

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत सरकार की विभिन्न कार्रवाइयों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया है कि उनके देश ने पश्चिमी देशों के लिए आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने, उन्हें प्रशिक्षण देने और उनकी फंडिंग करने जैसा ‘गंदा काम’ किया है. उन्होंने कहा कि यह एक गलती थी, जिसकी सजा पाकिस्तान ने खुद भुगती है.

स्काई न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में पत्रकार याल्दा हकीम ने ख्वाजा आसिफ से इस हफ्ते की शुरुआत में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए, के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और आतंकवाद को लेकर उसके रुख पर सवाल किया.

याल्दा हकीम ने पूछा, ‘आप ये मानते हैं कि पाकिस्तान का आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने, प्रशिक्षण देने और फंडिंग करने का एक लंबा इतिहास रहा है?’

इस पर आसिफ ने जवाब दिया, ‘हां, हमने लगभग तीन दशकों तक अमेरिका और पश्चिमी देशों, जिनमें ब्रिटेन भी शामिल है, के लिए यह गंदा काम किया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह एक गलती थी, और हमने इसकी कीमत चुकाई. और यही वजह है कि आप मुझसे ये सवाल पूछ रही हैं. अगर हमने सोवियत संघ के खिलाफ युद्ध और फिर 9/11 के बाद की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया होता, तो पाकिस्तान का रिकॉर्ड बेदाग होता.’

आसिफ ने आगे कहा, ‘बड़ी ताकतों के लिए यह बहुत आसान होता है कि वे इस क्षेत्र में हो रही हर चीज़ के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहरा दें. जब हम 80 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ उनकी तरफ से युद्ध लड़ रहे थे, तब आज के ये सभी आतंकवादी वाशिंगटन में दावतें उड़ा रहे थे. …फिर 9/11 के हमले हुए. और वही स्थिति दोबारा बनी. मुझे लगता है कि उस समय हमारी सरकारों ने गलती की’

उन्होंने यह भी जोड़ा कि उस वक्त पाकिस्तान को ‘प्रॉक्सी’ के रूप में इस्तेमाल किया गया.

मंत्री से यह भी पूछा गया कि मंगलवार को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया जा रहा है, इस हमले की ज़िम्मेदारी लेने वाला संगठन द रेज़िस्टेंस फ्रंट प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा का ही एक शाखा है.

इस पर आसिफ ने कहा, ‘लश्कर-ए-तैयबा अब पाकिस्तान में मौजूद नहीं है. यह संगठन अब खत्म हो चुका है… अगर मूल संगठन का अस्तित्व ही नहीं है, तो उसकी शाखा कैसे पैदा हो सकती है?’

जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान को पहलगाम आतंकी हमले के बाद हालात बिगड़ने का डर है, तो मंत्री ने कहा कि उनका देश ‘जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार’ है.

उन्होंने कहा, ‘भारत जो भी शुरू करेगा, उसके अनुसार हम अपनी प्रतिक्रिया देंगे. हमारी प्रतिक्रिया नपी-तुली होगी. लेकिन अगर कोई पूर्ण हमला होता है या इसी तरह की कोई स्थिति बनती है, तो निश्चित रूप से यह पूर्ण युद्ध में तब्दील हो जाएगा.’

हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में आसिफ ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता, ‘हम नहीं चाहते कि यह युद्ध भड़के, क्योंकि अगर युद्ध भड़का तो यह इस क्षेत्र के लिए तबाही ला सकता है.’

आतंकी घटना की अंतरराष्ट्रीय जांच चाहता है पाकिस्तान

पाकिस्तान का मानना है कि पहलगाम मामले में अंतरराष्ट्रीय जांच की जरूरत है और वह अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं के साथ काम करने को तैयार है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने शुक्रवार (25 अप्रैल 2025) को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के हवाले से यह जानकारी दी.

आसिफ ने अखबार को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान ‘किसी भी अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं द्वारा कराई जाने वाली जांच में सहयोग करने को तैयार है.’

भारत का कहना है कि मंगलवार (22 अप्रैल 2025) को हुए इस हमले में पाकिस्तानी तत्व शामिल थे, लेकिन पाकिस्तान ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है.

भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित किया, अब आगे क्या?

हमले के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई कदम उठाए हैं. भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है, जबकि पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है.

आसिफ ने अखबार को बताया कि भारत ने ‘आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने और घरेलू राजनीतिक फायदे के लिए’ इस घटना का बहाना बनाया है.

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने ‘बिना किसी सबूत और जांच’ के पाकिस्तान को सजा देने के कदम उठाए हैं.