श्रीनगर: पहलगाम आतंकी हमले को लेकर हुई चूक और गृह मंत्रालय द्वारा इसकी जिम्मेदारी से बचने के बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने कहा है कि पर्यटकों को बैसरन घास के मैदान में जाने के लिए कभी भी पुलिस की अनुमति की आवश्यकता नहीं रही है.
मालूम हो कि बैसरन ही पहलगाम की वह जगह है, जहां 22 अप्रैल को यह आतंकवादी हमला हुआ था.
इस संबंध में सोमवार (28 अप्रैल) को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के विशेष सत्र, जिसे पहलगाम हमले की निंदा करने के लिए बुलाया गया था, के दौरान बोलते हुए मीर ने कहा कि जिस मैदानी क्षेत्र में यह हमला हुआ था, वहां इस साल पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी गई है.
उन्होंने कहा, ‘कोई भी विभाग बैसरन, अरु, चंदनवारी और बेताब घाटी में जाने के लिए अनुमति नहीं मांगता. पर्यटक (पहलगाम) आते हैं और जहां चाहें वहां चले जाते हैं. अगर वहां रोजाना 400-500 पर्यटक जा रहे थे, तो सुरक्षा बलों को (बैसरन में) चौकसी बढ़ानी चाहिए थी, जो नहीं हुआ.’
उन्होंने आगे कहा, ‘यह मैं नहीं कह रहा हूं. इसे (केंद्रीय) गृह मंत्री (अमित शाह) ने खुद स्वीकार किया है.’
द वायर के पास मौजूद आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में पहलगाम से लगभग सात किलोमीटर दूर, ऊंचे इलाकों में स्थित हरे-भरे घास के मैदान को पिछले साल 13 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया था. यह कदम घास के मैदान के बाहर स्थित टिकट संग्रह काउंटर के लिए टेंडर प्रक्रिया के समापन के बाद उठाया गया था .
ज्ञात हो कि बैसरन दक्षिण कश्मीर के पर्यटक रिसॉर्ट में स्थित कई संपत्तियों में से एक है, जिसे सरकारी पहलगाम विकास प्राधिकरण (पीडीए) द्वारा दो या उससे अधिक वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को आउटसोर्स किया गया है. इस सूची में बेताब घाटी, कुछ होटल, कॉटेज, पार्क समेत अरु गांव और अन्य भी शामिल है.
पहलगाम में इन जगहों पर जाने या रहने के लिए दरें पीडीए द्वारा तय की जाती हैं, लेकिन अनुबंध प्रक्रिया खुली निविदाओं के माध्यम से होती है. 2024 में बैसरन घास के मैदान में एक व्यक्ति के प्रवेश की कीमत 35 रुपये तय की गई थी.
एक सूत्र ने इस अवधि के दौरान बेचे गए टिकटों की संख्या का हवाला देते हुए कहा, ’13 अप्रैल, 2024 से 12 अप्रैल, 2025 तक लगभग 2.3 लाख पर्यटक इस घास के मैदान में आए थे.’
गुरुवार (24 अप्रैल) को दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक के दौरान अमित शाह ने कथित तौर पर पार्टी नेताओं को बताया था कि 20 से 22 अप्रैल के बीच ‘लगभग एक हजार पर्यटक’ बैसरन घास के मैदान में आए थे.
हालांकि, ऊपर उद्धृत स्रोत ने कहा कि इस साल 13 अप्रैल से 22 अप्रैल तक दस दिनों में लगभग 20,000 पर्यटक बैसरन का दौरा कर चुके थे, जब आतंकवादी हमला हुआ था.
स्रोत ने कहा कि टिकट संग्रह के लिए निविदा पिछले साल दी गई थी और मैदान के खुलने से पहले पुलिस की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी.
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के इस रिसॉर्ट में पर्यटकों की आवाजाही केवल वार्षिक अमरनाथ यात्रा के दौरान ही प्रतिबंधित होती है.
इस यात्रा के दौरान हजारों सुरक्षाकर्मियों को हिंदू तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है. अधिकारी ने कहा, ‘यह घास का मैदान हमेशा पर्यटकों के लिए खुला रहता है, सिवाय सर्दियों के महीनों के जब ऊबड़-खाबड़ रास्ते बर्फ से ढके रहते हैं.’
श्रीनगर में एक टूर ऑपरेटर ने कहा कि कश्मीर में कुछ पर्यटन स्थलों पर नियंत्रण रेखा या अन्य सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रतिबंध लगा हुआ है. हालांकि, बैसरन उनमें से नहीं है.
टूर ऑपरेटर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, ‘बोटापाथरी और बंगस घाटी जैसी कुछ जगहों पर जाने के लिए पुलिस और सेना की अनुमति की आवश्यकता होती है. बैसरन एक लोकप्रिय जगह है, लेकिन यह हमेशा बिना किसी प्रतिबंध के खुला रहता है.’
बैसरन घास के मैदान तक हेलिकॉप्टर, पैदल या घोड़े पर सवार होकर पहुंचा जा सकता है, जो पर्यटकों के लिए अधिक लोकप्रिय विकल्प है. लगभग 800-1200 लोग पर्यटकों को घोड़े पर सवार हो इस विशाल घास के मैदान तक ले जाते हैं, जहां बीते 22 अप्रैल को खून-खराबे का मंजर देखा गया था.
अनंतनाग के एक निवासी, जो पहलगाम में अपने घोड़े को चलाते हैं, ने कहा, ‘हम कई सालों से बैसरन और पहलगाम के अन्य स्थानों पर जा रहे हैं. दरें पीडीए द्वारा तय की जाती हैं, लेकिन ये जगह हमेशा खुली रहती हैं, सिवाय तबके जब मौसम अच्छा न हो.’
कांग्रेस नेता मीर ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कहा कि बैसरन में हुए हमले जैसे आतंकवादी हमले की संभावना के बारे में ‘सार्वजनिक अफवाहें’ थीं.
दक्षिण कश्मीर के विधायक मीर ने कहा, ‘सुरक्षा एजेंसियों ने भी कहा है कि उनके पास इनपुट थे. अगर इनपुट के साथ-साथ अफवाहें भी थीं, तो इन इनपुट को इकट्ठा करने का प्रयास क्यों नहीं किया गया? आखिर चूक कहां हुई?’
उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि मैदान खोलने से पहले पुलिस की अनुमति नहीं ली गई थी.
मालूम हो कि इससे पहले गृह मंत्रालय और खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों ने पिछले गुरुवार को सर्वदलीय बैठक में बताया था कि बैसरन घास के मैदान को खोलने के लिए पुलिस की अनुमति नहीं ली गई थी.
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