ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड का अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने का अधिकार रद्द किया

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने की मान्यता रद्द कर दी है. विभाग ने आरोप लगाया कि हार्वर्ड ने आतंक समर्थक छात्रों को बढ़ावा दिया और यहूदी छात्रों के लिए असुरक्षित माहौल बनाया. हार्वर्ड ने इस फैसले को गैरकानूनी और प्रतिशोधात्मक बताया है.

डोनाल्ड ट्रंप और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक इमारत. (फोटो साभार: ह्वाइट हाउस/हार्वर्ड)

नई दिल्ली: अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने गुरुवार (22 मई) को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने की मान्यता रद्द कर दी है. यह फैसला ट्रंप प्रशासन और देश की सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव के बीच आया है.

गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी एल. नोएम का आदेश हार्वर्ड को नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने से रोकता है. इसके साथ ही, अब विश्वविद्यालय में पहले से पढ़ रहे विदेशी छात्रों को या तो किसी और संस्था में स्थानांतरित होना होगा या फिर वे अमेरिका में रहने का कानूनी दर्जा खो देंगे.

यह निर्णय विश्वविद्यालय के लगभग 27 प्रतिशत गैर अमेरिकी छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है. हार्वर्ड में हर साल तकरीबन 500-800 भारतीय छात्र पढ़ते हैं. 

ट्रंप प्रशासन ने अप्रैल में विश्वविद्यालय को इस प्रतिबंध की चेतावनी दी थी.

‘राष्ट्रीय सुरक्षा में बाधा डाल रहा है हार्वर्ड’: गृह सुरक्षा विभाग

डीएचएस ने हार्वर्ड पर गंभीर आरोप लगाए हैं. गृह सुरक्षा सचिव नोएम ने कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले पांच वर्षों में हिंसक प्रदर्शनों और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहे विदेशी छात्रों से जुड़े दस्तावेज सौंपने से इनकार किया है. 

नोएम ने कहा, ‘यह विश्वविद्यालय जानबूझकर अमेरिका-विरोधी और आतंक समर्थक लोगों को प्रोत्साहित करता रहा है, जिन्होंने कैंपस में छात्रों और स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा की.’ 

यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब कैंपस में गाज़ा के समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों के खिलाफ प्रशासन की सख्ती बढ़ रही है. 

नोएम ने चिट्ठी में लिखा, ‘चूंकि आपने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को आवश्यक जानकारी देने के कई अनुरोधों को नजरअंदाज किया है और एक ऐसा माहौल बनाए रखा है जो यहूदी छात्रों के लिए असुरक्षित है, हमास के प्रति सहानुभूति को बढ़ावा देता है, और नस्लवादी ‘विविधता, समानता और समावेशन’ नीतियों को अपनाता है. इसलिए आप यह विशेषाधिकार खो चुके हैं.’

चिट्ठी में नोएम ने यह भी लिखा है कि हार्वर्ड के खिलाफ की गई यह कार्रवाई बाकी संस्थानों के लिए एक सबक है. 

उन्होंने बिना कोई सार्वजनिक सबूत पेश किए यह भी आरोप लगाए कि हार्वर्ड ने चीन की अर्धसैनिक इकाइयों के सदस्यों को ट्रेनिंग दी है.

नोएम ने विश्वविद्यालय को 72 घंटे के भीतर अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े सभी अनुशासनात्मक और डिजिटल रिकॉर्ड (वीडियो व ऑडियो समेत) सौंपने का आदेश दिया है. 

हार्वर्ड ने इस कदम को गैरकानूनी और प्रतिशोधात्मक कहा 

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है. संस्थान के प्रवक्ता जेसन न्यूटन ने बयान जारी कर इसे ‘गैरकानूनी’ बताया और कहा कि विश्वविद्यालय अपने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सुरक्षा के लिए हर कानूनी रास्ता अपनाएगा.

न्यूटन ने कहा, ‘हार्वर्ड पूरी तरह से इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि हम 140 से अधिक देशों से आने वाले छात्रों और शोधकर्ताओं का स्वागत करते रहें, जो हमारे विश्वविद्यालय और देश दोनों, में बहुमूल्य योगदान देते हैं.’

उन्होंने चेतावनी दी कि यह फैसला न केवल विश्वविद्यालय समुदाय को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि अमेरिका की शैक्षणिक और शोध प्रणाली पर भी असर डालेगा.

साल 2024–25 के शैक्षणिक सत्र में हार्वर्ड में कुल 6,793 अंतरराष्ट्रीय छात्र थे. आर्थिक रूप से भी यह फैसला खासकर उन विभागों को प्रभावित कर सकता है जो विदेशी छात्रों पर निर्भर हैं.

गौरतलब है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में हार्वर्ड को पहले ही 2.7 अरब डॉलर से अधिक की संघीय फंडिंग पर रोक का सामना करना पड़ा है. विश्वविद्यालय इस समय व्हाइट हाउस के खिलाफ एक कानूनी लड़ाई भी लड़ रहा है, जिसमें वह ट्रंप प्रशासन पर विश्वविद्यालय के भीतर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगा रहा है.

व्हाइट हाउस का क्या कहना है? 

व्हाइट हाउस ने इस फैसले को ‘अमेरिकी मूल्यों की रक्षा’ बताया है. प्रेस सचिव एबिगेल जैकसन ने कहा, ‘हार्वर्ड एक प्रतिष्ठित संस्थान से अमेरिका-विरोधी और यहूदी-विरोधी तत्वों का अड्डा के रूप में बदल गया है. अब उन्हें अपने कृत्यों का अंजाम भुगतना होगा.’ 

16 अप्रैल को ट्रम ने हार्वर्ड को ‘एक मजाक’ करार करते हुए कहा था कि उसे सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए.