ट्रंप प्रशासन ने नए छात्र वीज़ा रोके, सोशल मीडिया जांच और सख्त करने की तैयारी

अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने छात्रों के वीज़ा के लिए नई अपॉइंटमेंट्स पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है. ट्रंप प्रशासन अब सभी छात्र वीज़ा आवेदकों के सोशल मीडिया की गहन जांच की तैयारी कर रहा है.

अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो व्हाइट हाउस में एक कैबिनेट बैठक के दौरान बोलते हुए, साथ में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हैं. फोटो: एपी/पीटीआई/फाइल

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा देश की उच्च शिक्षा संस्थाओं के खिलाफ छेड़ी गई लड़ाई को और तेज़ करते हुए, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने छात्रों के वीज़ा के लिए नई अपॉइंटमेंट्स पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है.

ट्रंप प्रशासन अब सभी छात्र वीज़ा आवेदकों के सोशल मीडिया की गहन जांच की तैयारी कर रहा है.

इस आंतरिक आदेश को सबसे पहले पॉलिटिको ने रिपोर्ट किया. रिपोर्ट में कहा गया कि प्रशासन ने अमेरिका के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिया है कि वे छात्र वीज़ा आवेदकों के लिए नई इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स तय करना फिलहाल रोक दें, क्योंकि सरकार वीज़ा प्रक्रिया में नई जांच प्रक्रियाओं की तैयारी कर रही है.

27 मई के इस आदेश में कहा गया है,आवश्यक सोशल मीडिया स्क्रीनिंग और जांच के विस्तार की तैयारी के तहत, वीज़ा विभाग तत्काल प्रभाव से कोई नई छात्र या एक्सचेंज विज़िटर (F, M, और J कैटेगरी) वीज़ा अपॉइंटमेंट्स नहीं जोड़ें, जब तक कि अगला आदेश नहीं आता, जिसकी हमें आने वाले दिनों में उम्मीद है.’

पॉलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि सोशल मीडिया जांच के मानदंड क्या होंगे, लेकिन यह ज़रूर साफ है कि इस तरह की कुछ जांच पहले से ही जारी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग ज़्यादातर उन छात्रों पर केंद्रित थी जो इज़रायल के गाज़ा पर हमलों के खिलाफ प्रदर्शनों में शामिल होकर वापस अमेरिका लौट रहे थे.

ट्रंप प्रशासन पहले ही ऐसे कई छात्र वीज़ाधारकों को सज़ा दे चुका है या हिरासत में ले चुका है, जिन्होंने फ़िलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किया या बयान दिए थे. भारतीय मूल के छात्र भी इसकी ज़द में आए हैं.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पीएचडी की पूर्व छात्रा रंजनी श्रीनिवासन का वीज़ा अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा यह आरोप लगाते हुए रद्द कर दिया गया था कि उन्होंने ‘हिंसा और आतंकवाद का समर्थन किया है.’ 

वहीं, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पोस्ट डॉक्टोरल फेलो बदर ख़ान सूरी को 17 मार्च को गिरफ़्तार किया गया था. उन्हें इस महीने की शुरुआत में टेक्सास के एक डिटेंशन सेंटर से कोर्ट के आदेश पर रिहा किया गया है. उनके वकीलों ने कहा कि सूरी को फ़िलिस्तीनी अधिकारों का समर्थन करने और गाज़ा से पारिवारिक संबंध होने के कारण निशाना बनाया गया.

भारत ने मार्च में कहा था कि न तो श्रीनिवासन और न ही सूरी ने भारतीय मिशनों से मदद मांगी थी, और यह भी दोहराया कि भारतीय नागरिकों को विदेशों में स्थानीय क़ानूनों का पालन करना चाहिए.

ब्लूमबर्ग के अनुसार, रुबियो ने पहले कहा था, ‘अगर कोई छात्र अमेरिका आने के लिए वीज़ा के लिए आवेदन करता है और कहता है कि वह सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि उन आंदोलनों में हिस्सा लेने आ रहा है जो विश्वविद्यालयों में तोड़फोड़ करते हैं, छात्रों को डराते हैं, बिल्डिंग्स पर क़ब्ज़ा करते हैं, तो हम उसे वीज़ा नहीं देंगे.’

ह्वाइट हाउस ने हाल ही में हार्वर्ड विश्वविद्यालय को विदेशी छात्रों को दाखिला देने से रोक लगा दी थी, लेकिन एक न्यायाधीश ने इस फैसले पर अंतरिम पर रोक लगा दी है.