नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा एक अमेरिकी अदालत में दाखिल हलफनामे में यह दावा किए जाने के बाद कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध अमेरिकी टैरिफ की धमकी के चलते टल गया, भारत ने स्पष्ट किया है कि तनाव के उन चार दिनों के दौरान भारतीय और अमेरिकी नेताओं की बातचीत में इस मुद्दे का कहीं कोई उल्लेख नहीं हुआ था.
मालूम हो कि 23 मई को अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड डब्ल्यू. लुटनिक ने ट्रंप प्रशासन के तीन अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर हस्ताक्षरित हलफनामा यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दाखिल किया था. यह हलफनामा ट्रंप के वैश्विक और देश-विशेष टैरिफ के खिलाफ छोटे व्यवसायों के समूह द्वारा दायर मुकदमे का विरोध करने के लिए दाखिल किया गया था.
हालांकि, बुधवार (28 मई) रात कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप का आपातकालीन स्थिति के दौरान निहित शक्तियों का इस्तेमाल असंवैधानिक था.
अपने लिखित बयान में लुटनिक ने भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव का हवाला देते हुए दावा किया कि ट्रंप की ओर से व्यापारिक पहुंच की पेशकश ने हालात को शांत करने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि ट्रंप इससे पहले भी सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर ऐसे दावे करते रहे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब इस तरह की बात किसी औपचारिक कानूनी दस्तावेज़ का हिस्सा बनी है
भारत ने दावा ख़ारिज किया
इसके बाद गुरुवार (29 मई) को भारतीय विदेश मंत्रालय के साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने 13 मई के अपने बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका के साथ बातचीत में व्यापार का मुद्दा नहीं उठा था.
उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई को हुई और 10 मई को जब संघर्षविराम और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी, उस दौरान भारत और अमेरिका के नेताओं के बीच मौजूदा सैन्य हालात को लेकर बातचीत हुई थी. इन चर्चाओं में कहीं भी व्यापार या टैरिफ का ज़िक्र नहीं हुआ था.’
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गोलीबारी रोकने का फैसला दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर सीधे संपर्क से लिया गया था. उन्होंने कहा, ‘विदेश मंत्री भी यह साफ़ कर चुके हैं कि फायरिंग रोकने का निर्णय भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच सीधे संपर्क के ज़रिये हुआ. मुझे लगता है इससे आपका सवाल स्पष्ट हो जाता है.’
जब संवाददाताओं ने लुटनिक के दावे के शपथपत्र में दर्ज होने की बात उठाई, तो जायसवाल ने कहा, ‘मैंने जो कहा है, वह भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के तौर पर कहा है.. और जब मैं कुछ कहता हूं, तो मेरे दोनों ओर तिरंगा लगा होता है, इसका एक मतलब होता है, उसका अपना महत्व होता है.’
इसके अलावा जयसवाल ने भारतीय छात्रों और एक्सचेंज विज़िटर वीज़ा आवेदकों को लेकर हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताई.
उन्होंने कहा, ‘हम मानते हैं कि वीज़ा जारी करना एक संप्रभु प्रक्रिया है, लेकिन हमें उम्मीद है कि भारतीय छात्रों के आवेदन योग्यता के आधार पर देखे जाएंगे और वे समय पर अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकेंगे.’
अमेरिका ने हाल ही में एक नई प्रणाली लागू करने के चलते छात्रों के लिए नए वीज़ा अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाई थी, इस प्रणाली के तहत आवेदकों की सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच भी शामिल है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जयसवाल ने बताया कि साल 2023-24 के शैक्षणिक वर्ष में 3.3 लाख भारतीय छात्र अमेरिका गए थे.
