लखनऊ यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मेड्यूसा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत मिली

लखनऊ विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर और व्यंग्यकार डॉ. मेड्यूसा के ख़िलाफ़ पहलगाम हमले से संबंधित एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, जिसमें भारत की संप्रभुता, एकता व अखंडता को ख़तरे में डालने से जुड़े आरोप शामिल हैं.

प्रोफेसर माद्री काकोटी उर्फ डॉ. मेड्यूसा (फोटो: Screengrab/Youtube)

नई दिल्ली: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार (9 जून) को लखनऊ विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर और व्यंग्यकार माद्री काकोटी उर्फ डॉ. मेड्यूसा को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी.

रिपोर्ट के मुताबिक, माद्री के खिलाफ पहलगाम हमले से संबंधित एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भारतीय न्याय संहिता के तहत कई अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया है, जिसमें भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित आरोप शामिल हैं.

इस संबंध में बार एंड बेंच ने बताया कि माद्री काकोटी को सोमवार जस्टिस राजीव सिंह की ग्रीष्मावकाश कालीन एकल पीठ ने राहत दी.

मालूम हो कि माद्री काकोटी, जो सोशल मीडिया पर व्यंग्यकार डॉ. मेड्यूसा के नाम से लोकप्रिय हैं, लखनऊ यूनिवर्सिटी में भाषा विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों को उठाती रहती हैं. साथ ही सरकार की आलोचना के लिए अक्सर व्यंग्यात्मक शैली अपनाती हैं.

हाल ही में उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक वीडियो पोस्ट किया था, जो पाकिस्तान में भी वायरल हुआ. इसमें उन्होंने धार्मिक आधार पर देश में एकता की कमी को रेखांकित करते हुए और कश्मीरियों की सुरक्षा की मांग की थी. उन्होंने कहा कि देश इतना बंटा हुआ है कि दंगे भड़कने में एक पल भी नहीं लगेगा.

डॉ. मेड्यूसा का एक और पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने लिखा था-

‘धर्म पूछकर गोली मारना आतंकवाद है.
और धर्म पूछकर लिंच करना,
धर्म पूछकर नौकरी से निकालना,
धर्म पूछकर घर न देना,
धर्म पूछकर घर बुलडोज़ करना, वगैरह वगैरह भी आतंकवाद है.
असली आतंकी को पहचानो.’

ज्ञात हो कि माद्री के खिलाफ लखनऊ के हसनगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. शिकायतकर्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र सदस्य जतिन शुक्ला हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन एबीवीपी के सदस्य बताए जा रहे हैं. शुक्ला का मानना है कि डॉ. मेड्यूसा के हालिया पोस्ट देश की शांति और सद्भावना को भंग कर सकते हैं.

मेड्यूसा के खिलाफ देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की है.

उन पर बीएनएस की धारा धारा 196 (धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों में दुश्मनी को बढ़ावा देना), 197 (राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप या दावे), 353 (लोक विघटन से संबंधित बयान) 302 (धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने वाले शब्द) 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य (बीएनएस में सीधे तौर पर राजद्रोह (जो पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 124A में था) का जिक्र नहीं है, लेकिन नई आपराधिक संहिता में धारा 152 लगभग वही काम करता है.)

इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A भी इन पर लागू की गई है, जो सरकार को इंटरनेट कंटेंट को ब्लॉक करने का अधिकार देती है.

गौरतलब है कि मेड्यूसा के अलावा लोक गायिका नेहा सिंह राठौर पर भी इन्हीं धाराओं के तहत लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. नेहा भी तमाम मुद्दे को लेकर लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रही हैं. उनके खिलाफ अभय सिंह की ओर से मामला दर्ज करवाया गया है.

मेड्यूसा के अलावा अशोका विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर की गई सोशल मीडिया पोस्ट के संबंध में गिरफ्तार किया गया था. वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. महमूदाबाद पर भी देशद्रोह और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे हैं.